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Armenia

Armenia

Geography:- Armenia is located in the southern Caucasus and is the smallest of the former Soviet republics. It is bounded by Georgia on the north, Azerbaijan on the east, Iran on the south, and Turkey on the west. Contemporary Armenia is a fraction of the size of ancient Armenia. A land of rugged mountains and extinct volcanoes, its highest point is Mount Aragats, 13,435 ft (4,095 m).

Government:- Republic.

History:-One of the world's oldest civilizations, Armenia once included Mount Ararat, which biblical tradition identifies as the mountain that Noah's ark rested on after the flood. It was the first country in the world to officially embrace Christianity as its religion (c. A.D.300). In the 6th century B.C. , Armenians settled in the kingdom of Urartu (the Assyrian name for Ararat), which was in decline. Under Tigrane the Great (fl. 95–55 B.C. ) the Armenian empire reached its height and became one of the most powerful in Asia, stretching from the Caspian to the Mediterranean seas. Throughout most of its long history, however, Armenia has been invaded by a succession of empires. Under constant threat of domination by foreign forces, Armenians became both cosmopolitan as well as fierce protectors of their culture and tradition. Over the centuries Armenia was conquered by Greeks, Romans, Persians, Byzantines, Mongols, Arabs, Ottoman Turks, and Russians. From the 16th century through World War I, major portions of Armenia were controlled by their most brutal invader, the Ottoman Turks, under whom the Armenians experienced discrimination, religious persecution, heavy taxation, and armed attacks. In response to Armenian nationalist stirrings, the Turks massacred thousands of Armenians in 1894 and 1896. The most horrific massacre took place in April 1915 during World War I, when the Turks ordered the deportation of the Armenian population to the deserts of Syria and Mesopotamia. According to the majority of historians, between 600,000 and 1.5 million Armenians were murdered or died of starvation. The Armenian massacre is considered the first genocide of the 20th century. Turkey denies that a genocide took place and claims that a much smaller number died in a civil war.

National Name: Hayastani Hanrapetut'yun Languages: Armenian (official) 97.9%, Kurdish (spoken by Yezidi minority) 1%, other 1% (2011 est.) Ethnicity/race: Armenian 98.1%, Yezidi (Kurd) 1.1%, other 0.7% (2011 est.) Religion: Armenian Apostolic 92.6%, Evangelical 1%, other 2.4%, none 1.1%, unspecified 2.9% (2011 est.) National Holiday: Independence Day, September 21 Literacy rate: 99.4% (2012 est.) Economic summary: GDP/PPP (2013 est.): $20.61 billion; per capita $6,300. Real growth rate: 4.6%. Inflation:6.2%. Unemployment:17.3% (2013 est.). Arable land: 14.47%. Agriculture: fruit (especially grapes), vegetables; livestock. Labor force: 1.394 million; agriculture 44.2%, industry 16.8%, services 39% (2008 est). Industries:diamond processing, metal-cutting machine tools, forging-pressing machines, electric motors, tires, knitted wear, hosiery, shoes, silk fabric, chemicals, trucks, instruments, microelectronics, jewelry manufacturing, software development, food processing, brandy. Natural resources: small deposits of gold, copper, molybdenum, zinc, alumina. Exports: $1.653 billion (2013): diamonds, mineral products, foodstuffs, energy. Imports: $3.459 billion (2013 est.): natural gas, petroleum, tobacco products, foodstuffs, diamonds. Major trading partners: Russia, Belgium, Germany, Iran, U.S., Georgia, Netherlands, Canada, Bulgaria, Switzerland(2012) Communications: Telephones: main lines in use: 584,000 (2012); mobile cellular: 3.223 (2012). Broadcast media:2 public TV networks operating alongside more than 40 privately owned TV stations that provide local to near nationwide coverage; major Russian broadcast stations are widely available; subscription cable TV services are available in most regions; Public Radio of Armenia is a national, state-run broadcast network that operates alongside about 20 privately owned radio stations; several major international broadcasters are available (2008). Internet hosts: 194,142 (2012). Internet users: 208,200 (2011). Transportation: Railways: total: 869 km (2012). Highways: total: 7,705 km (2012). Waterways: n.a. Ports and harbors: none. Airports: 11 (2013). International disputes: the dispute over the break-away Nagorno-Karabakh region and the Armenian military occupation of surrounding lands in Azerbaijan remains the primary focus of regional instability; residents have evacuated the former Soviet-era small ethnic enclaves in Armenia and Azerbaijan; Turkish authorities have complained that blasting from quarries in Armenia might be damaging the medieval ruins of Ani, on the other side of the Arpacay valley; in 2009, Swiss mediators facilitated an accord reestablishing diplomatic ties between Armenia and Turkey, but neither side has ratified the agreement and the rapprochement effort has faltered; local border forces struggle to control the illegal transit of goods and people across the porous, undemarcated Armenian, Azerbaijani, and Georgian borders; ethnic Armenian groups in the Javakheti region of Georgia seek greater autonomy from the Georgian Government.

राजधानी    येरेवान

अर्मेनियाई मूल के लोग अपने को हयक का वंशज मानते हैं जो नूह (इस्लाम ईसाईयत और यहूदियों में पूज्य) का पर-परपोता था। कुछ ईसाईयों की मान्यता है कि नोआ (इस्लाम में नूह) और उसका परिवार यहीं आकर बस गया था। आर्मीनिया का अर्मेनियाई भाषा में नाम हयस्तान है जिसका अर्थ हायक की जमीन है। हायक नोह के पर-परपोते का नाम था।

आर्मीनिया (आर्मेनिया) पश्चिम एशिया और यूरोप के काकेशस क्षेत्र में स्थित एक पहाड़ी देश है जो चारों तरफ़ ज़मीन से घिरा है। १९९० के पूर्व यह सोवियत संघ का एक अंग था जो एक राज्य के रूप में था। सोवियत संघ में एक जनक्रान्ति एवं राज्यों के आजादी के संघर्ष के बाद आर्मीनिया को २३ अगस्त १९९० को स्वतंत्रता प्रदान कर दी गई, परन्तु इसके स्थापना की घोषणा २१ सितंबर१९९१ को हुई एवं इसे अंतर्राष्ट्रीय मान्यता २५ दिसंबर को मिली। इसकी राजधानी येरेवन है।

अर्मेनियाई मूल की लिपि आरामाईक एक समय (ईसा पूर्व ३००) भारत से लेकर भूमध्य सागर के बीच प्रयुक्त होती थी। पूर्वी रोमन साम्राज्य और फ़ारस तथा अरब दोनों क्षेत्रों के बीच अवस्थित होने के कारण मध्य काल से यह विदेशी प्रभाव और युद्ध की भूमि रहा है जहाँ इस्लाम और ईसाइयत के कई आरंभिक युद्ध लड़े गए थे। आर्मेनिया प्राचीन ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर वाला देश है। आर्मेनिया के राजा ने चौथी शताब्दी में ही ईसाई धर्म ग्रहण कर लिया था। इस प्रकार आर्मेनिया राज्य ईसाई धर्म ग्रहण करने वाला प्रथम राज्य है।देश में आर्मेनियाई एपोस्टलिक चर्च सबसे बड़ा धर्म है।इसके अलावा यहाँ ईसाईयों, मुसलमानों और अन्य संप्रदायों का छोटा समुदाय है।

आर्मेनिय़ा का कुल क्षेत्रफल २९,८०० कि.मी² (११,५०६ वर्ग मील) है जिसका ४.७१% जलीय क्षेत्र है। अनुमानतः (जुलाई २००८) यहाँ की जनसंख्या ३२,३१,९०० है एवं वर्ग किमी घनत्व १०१ व्यक्ति है। इसकी सीमाएँ तुर्कीजॉर्जियाअजरबैजान और ईरान से लगी हुई हैं। आज यहाँ ९७.९ प्रतिशत से अधिक आर्मीनियाई जातीय समुदाय के अलावा १.३% यज़िदी, ०.५% रूसी और अन्य अल्पसंख्यक निवास करते हैं। यहां की जनसंख्या का १०.६% भाग अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा (अमरीकी डालर १.२५ प्रतिदिन) से नीचे निवास करता है। आर्मेनिया ४० से अधिक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का सदस्य है। इसमें संयुक्त राष्ट्र, यूरोप परिषद, एशियाई विकास बैंक, स्वतंत्र देशों का राष्ट्रकुलविश्व व्यापार संगठन एवं गुट निरपेक्ष संगठन आदि प्रमुख हैं।

इतिहास

इस्लाम, ईसाई और यहूदी धर्म की उभय मान्यताओं के अनुसार पौराणिक महाप्रलय की बाढ़ से बचाने वाले नोआ (अरबी में नूह, हिन्दू मत्स्यावतार से मेल खाता) का नाव यरावन की पहाड़ियों के पास आकर रुक गया था। अर्मेनियाई अपने को नोहे के परपोते के पोते हयक का वंशज मानते हैं। कांस्य युग में हिट्टी तथा मितन्नी जैसे साम्राज्यों की भूमि रहा है। लौह काल में अरामे के उरातु साम्राज्य ने सभी शक्तियों को एक किया और उसी के नाम पर इस क्षेत्र का नाम अर्मेनिया पड़ा।

इतिहास के पन्नों पर आर्मीनिया का आकार कई बार बदला है। ८० ई.पू. में आर्मेनिया राजशाही के अंतर्गत वर्तमान तुर्की का कुछ भू-भाग, सीरियालेबनानईरानइराकअज़रबैजान और वर्तमान आर्मीनिया के भू-भाग सम्मिलित थे। रोमन काल में अर्मेनिया फ़ारस और रोम के बीच बंटा रहा। ईसाई धर्म का प्रचार यूरोप और ख़ुद अर्मेनिया में इसी समय हुआ। सन ५९१ में बिज़ेन्टाईनों ने पारसियों को हरा दिया पर ६४५ में वे ख़ुद दक्षिण में शक्तिशाली हो रहे मुस्लिम अरबों से हार गए। इसके बाद यहाँ इस्लाम के भी प्रचार हुआ। ईरान के सफ़वी वंश के समय (१५०१-१७३०) यह चार बार इस्तांबुल के उस्मानीतुर्कों और इस्फ़हान के शिया सफ़वी शासकों के बीच हस्तांतरित होता रहा। १९२० से लेकर १९९१ तक आर्मीनिया एक साम्यवादी देश था। यह सोवियत संघ का एक सदस्य था। आज आर्मीनिया की तुर्की औरअज़रबैजान से लगती सीमा संघर्ष की वजह से बंद रहती हैं। नागोर्नो-काराबाख पर आधिपत्य को लेकर १९९२ में आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच लड़ाई हुई थी जो १९९४ तक चली थी। आज इस जमीन पर आर्मीनिया का अधिकार है लेकिन अजरबैजान अभी भी जमीन पर अपना अधिकार बताता है।

 

 

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