मन्ना डे -जन्म: (1 मई, 1920)

May 01, 2017

मन्ना डे (मूल नाम: 'प्रबोध चन्द्र डे', जन्म: 1 मई, 1920 - मृत्यु: 24 अक्टूबर, 2013) भारतीय सिनेमा जगत् में हिन्दी एवं बांग्ला फ़िल्मों के सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक थे। 1950 से 1970 के दशकों में इनकी प्रसिद्धि चरम पर थी। इनके गाए गीतों की संख्या 3500 से भी अधिक है। इन्हें 2007 के प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार के लिए चुना गया। भारत सरकार ने इन्हें सन 2005 में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। इन्होंने अपने जीवन के 50 साल मुंबई में बिताये।


परिचय-
प्रबोध चन्द्र डे उर्फ मन्ना डे का जन्म 1 मई 1920 को कोलकाता में हुआ। मन्ना डे के पिता उन्हें वकील बनाना चाहते थे, लेकिन मन्ना डे का रुझान संगीत की ओर था। वह इसी क्षेत्र में अपना कैरियर बनाना चाहते थे। 'उस्ताद अब्दुल रहमान ख़ान' और 'उस्ताद अमन अली ख़ान' से उन्होंने शास्त्रीय संगीत सीखा। मन्ना डे ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने चाचा 'के सी डे' से हासिल की। मन्ना डे के बचपन के दिनों का एक दिलचस्प वाकया है। उस्ताद बादल ख़ान और मन्ना डे के चाचा एक बार साथ-साथ रियाज कर रहे थे। तभी बादल ख़ान ने मन्ना डे की आवाज़ सुनी और उनके चाचा से पूछा, यह कौन गा रहा है। जब मन्ना डे को बुलाया गया तो उन्होंने कहा कि बस, ऐसे ही गा लेता हूं। लेकिन बादल ख़ान ने मन्ना डे में छिपी प्रतिभा को पहचान लिया। इसके बाद वह अपने चाचा से संगीत की शिक्षा लेने लगे। मन्ना डे ने अपने बचपन की पढ़ाई एक छोटे से स्कूल 'इंदु बाबुर पाठशाला' से की। 'स्कॉटिश चर्च कॉलिजियेट स्कूल' व 'स्कॉटिश चर्च कॉलेज' से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने कोलकाता के 'विद्यासागर कॉलेज' से स्नातक की शिक्षा पूरी की। अपने स्कॉटिश चर्च कॉलेज के दिनों में उनकी गायकी की प्रतिभा लोगों के सामने आयी। तब वे अपने साथ के विद्यार्थियों को गाकर सुनाया करते थे और उनका मनोरंजन किया करते थे। यही वो समय था जब उन्होंने तीन साल तक लगातार 'अंतर-महाविद्यालय गायन-प्रतियोगिताओं' में प्रथम स्थान पाया। बचपन से ही मन्ना को कुश्ती, मुक्केबाजी और फुटबॉल का शौक़ रहा और उन्होंने इन सभी खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उनका काफ़ी हँसमुख छवि वाला व्यक्तित्व रहा है और अपने दोस्तों व साथियों के साथ मजाक करते रहते हैं।


संगीत ने ही मन्ना डे को अपनी जीवनसाथी 'सुलोचना कुमारन' से मिलवाया था। 18 दिसम्बर 1953 को मन्ना डे ने केरल की सुलोचना कुमारन से विवाह किया। इनकी दो बेटियाँ हुईं। सुरोमा का जन्म 19 अक्टूबर 1956 और सुमिता का 20 जून 1958 को हुआ। दोनों बेटियां सुरोमा और सुमिता गायन के क्षेत्र में नहीं आईं। एक बेटी अमरीका में बसी है।
पहले वे के. सी. डे के साथ थे फिर बाद में सचिन देव बर्मन के सहायक बने। बाद में उन्होंने और भी कई संगीत निर्देशकों के साथ काम किया और फिर अकेले ही संगीत निर्देशन करने लगे। कई फ़िल्मों में संगीत निर्देशन का काम अकेले करते हुए भी मन्ना डे ने उस्ताद अमान अली और उस्ताद अब्दुल रहमान ख़ान से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेना जारी रखा। मन्ना डे 1940 के दशक में अपने चाचा के साथ संगीत के क्षेत्र में अपने सपनों को साकार करने के लिए मुंबई आ गए। वर्ष 1943 में फ़िल्म 'तमन्ना' में बतौर पार्श्व गायक उन्हें सुरैया के साथ गाने का मौका मिला। हालांकि इससे पहले वह फ़िल्म 'रामराज्य' में कोरस के रूप में गा चुके थे। दिलचस्प बात है कि यही एक एकमात्र फ़िल्म थी जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देखा था। मन्ना डे की प्रतिभा को पहचानने वालों में संगीतकार शंकर जयकिशन का नाम ख़ास तौर पर उल्लेखनीय है। इस जोडी़ ने मन्ना डे से अलग-अलग शैली में गीत गवाए। उन्होंने मन्ना डे से 'आजा सनम मधुर चांदनी में हम...' जैसे रुमानी गीत और 'केतकी गुलाब जूही...' जैसे शास्त्रीय राग पर आधारित गीत भी गवाए। दिलचस्प बात है कि शुरुआत में मन्ना डे ने यह गीत गाने से मना कर दिया था।


मन्ना डे ने 1943 की फ़िल्म "तमन्ना" से पार्श्व गायन के क्षेत्र में क़दम रखा। संगीत निर्देशन किया था कॄष्णचंद्र डे ने और मन्ना के साथ थीं सुरैया। 1950 की "मशाल" में उन्होंने एकल गीत "ऊपर गगन विशाल" गाया जिसको संगीत की मधुर धुनों से सजाया था सचिन देव बर्मन ने। 1952 में मन्ना डे ने बंगाली और मराठी फ़िल्म में गाना गाया। ये दोनों फ़िल्म एक ही नाम "अमर भूपाली" और एक ही कहानी पर आधारित थीं। इसके बाद उन्होंने पार्श्वगायन में अपने पैर जमा लिये। वर्ष 2005 में 'आनंदा प्रकाशन' ने बंगाली उनकी आत्मकथा "जिबोनेर जलासोघोरे" प्रकाशित की। उनकी आत्मकथा को अंग्रेज़ी में पैंगुइन बुक्स ने "Memories Alive" के नाम से छापा तो हिन्दी में इसी प्रकाशन की ओर से "यादें जी उठी" के नाम से प्रकाशित की। मराठी संस्करण "जिबोनेर जलासाघोरे" साहित्य प्रसार केंद्र, पुणे द्वारा प्रकाशित किया गया।


ये रात भीगी-भीगी (श्री 420)
कस्मे वादे प्यार वफा सब (उपकार)
लागा चुनरी में दाग़ (दिल ही तो है)
ज़िंदगी कैसी है पहली हाय (आनंद)
प्यार हुआ इकरार हुआ (श्री 420)
ऐ मेरी जोहरां जबी (वक़्त)
ऐ मेरे प्यारे वतन (काबुलीवाला)
पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई (मेरी सूरत तेरी आँखें)
यारी है ईमान मेरा यार मेरी ज़िंदगी (ज़ंजीर)
इक चतुर नार करके सिंगार (पड़ोसन)
तू प्यार का सागर है (सीमा)। 
मन्ना डे की गायकी के मुरीद
कुछ लोगों को प्रतिभाशाली होने के बावजूद वो मान-सम्मान या श्रेय नहीं मिलता, जिसके कि वे हकदार होते हैं। हिंदी फ़िल्म संगीत में इस दृष्टि से देखा जाए तो मन्ना डे का नाम सबसे पहले आता है। मन्ना ने जिस दौर में गीत गाए, उस दौर में हर संगीतकार का कोई न कोई प्रिय गायक था, जो फ़िल्म के अधिकांश गीत उससे गवाता था। मन्ना डे की प्रतिभा के सभी कायल थे, लेकिन सहायक हीरो, कॉमेडियन, भिखारी, साधु पर कोई गीत फ़िल्माना हो तो मन्ना डे को याद किया जाता था। मन्ना डे ठहरे सीधे-सरल आदमी, जो गाना मिलता उसे गा देते। ये उनकी प्रतिभा का कमाल है कि उन गीतों को भी लोकप्रियता मिली।  प्रसिद्ध गीतकार प्रेम धवन ने मन्ना डे के बारे में कहा था कि 'मन्ना डे हर रेंज में गीत गाने में सक्षम है। जब वह ऊंचा सुर लगाते है तो ऐसा लगता है कि सारा आसमान उनके साथ गा रहा है, जब वो नीचा सुर लगाते है तो लगता है उसमें पाताल जितनी गहराई है और यदि वह मध्यम सुर लगाते है तो लगता है उनके साथ सारी धरती झूम रही है।' मन्ना डे केवल शब्दों को ही नहीं गाते थे, अपने गायन से वह शब्द के पीछे छिपे भाव को भी ख़ूबसूरती से सामने लाते थे। शायद यही कारण है कि प्रसिद्ध हिन्दी कवि हरिवंश राय बच्चन ने अपनी अमर कृति मधुशाला को स्वर देने के लिए मन्ना डे का चयन किया।

सम्मान -
मन्ना डे ने अपने पांच दशक के कैरियर में लगभग 3500 गीत गाए। भारत सरकार ने मन्ना डे को संगीत के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान के लिए पद्म भूषण और पद्मश्री सम्मान से नवाजा। इसके अलावा 1969 में 'मेरे हज़ूर' और 1971 में बांग्ला फ़िल्म 'निशि पद्मा' के लिए 'सर्वश्रेष्ठ गायक' का राष्ट्रीय पुरस्कार भी उन्हें दिया गया। उन्हें मध्यप्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, उड़ीसा और बांग्लादेश की सरकारों ने भी विभिन्न पुरस्कारों से नवाजा है। मन्ना डे के संगीत के सुरीले सफर में एक नया अध्याय तब जुड़ गया जब फ़िल्मों में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें फ़िल्मों के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।


मन्ना डे का लंबी बीमारी के बाद बंगलोर शहर के एक अस्पताल में 24 अक्टूबर 2013 को सुबह तड़के निधन हो गया। 94 वर्षीय मन्ना डे को पांच माह पहले सांस संबंधी समस्याओं की वजह से नारायण हृदयालय में भर्ती कराया गया था। उन्होंने तड़के 3 : 50 मिनट पर अंतिम सांस ली। उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि अंतिम समय में मन्ना डे के पास उनकी पुत्री शुमिता देव और उनके दामाद ज्ञानरंजन देव मौजूद थे। मन्ना डे की दो बेटियां हैं। एक बेटी अमेरिका में रहती है।


Prabodh Chandra Dey (1 May 1919 − 24 October 2013), known by his stage name Manna Dey, was an Indian playback singer. He is considered one of the most versatile and celebrated vocalists of the Hindi film industry. He was one of the playback singers credited with the success of Indian classical music in Hindi commercial movies. He debuted in the film Tamanna in 1942. After the song "Upar Gagan Bishal" composed by S D Burman he saw success and went on to record more than 4,000 songs till 2013. The Government of India honoured him with the Padma Shri in 1971, the Padma Bhushan in 2005 and the Dadasaheb Phalke Award in 2007.


Dey sang in all the major regional Indian languages, though primarily in Hindi and Bengali. His peak period in Hindi playback singing was from 1953 to 1976.


Dey was born to Mahamaya and Purna Chandra Dey on 1 May 1919 in Kolkata. Besides his parents, his youngest paternal uncle, Sangeetacharya Krishna Chandra Dey highly inspired and influenced him. He received his early education in Indu Babur Pathshala, a small pre-primary school. He started doing stage shows in school since 1929. He attended Scottish Church Collegiate School and Scottish Church College.He participated in sports events like wrestling and boxing in his college days, taking training from Gobar Guha. He graduated from Vidyasagar College.


Dey began taking music lessons from Krishna Chandra Dey and Ustad Dabir Khan. During this period, he stood first for three consecutive years in three different categories of inter-collegiate singing competitions.


Dey also sang in Bhojpuri, Magadhi, Maithili, Punjabi, Assamese, Odia, Konkani, Sindhi, Gujarati, Marathi, Kannada, Malayalam, and Nepali.


In December 1953, Manna Dey married Sulochana Kumaran. She was originally from Kannur, Kerala. Together they had two daughters - Shuroma (b. 1956) and Sumita (b. 1958). Sulochana died in Bengaluru in January 2012. She had been suffering from cancer for some time. After her death Dey moved to Kalyan Nagar in Bengaluru after spending more than fifty years in Mumbai.



On 8 June 2013, Dey was admitted to the ICU in a Bengaluru hospital after a chest infection gave rise to other complications.His health gradually improved and about a month later doctors took him off the ventilator support.Later, he was released from hospital.


He was hospitalized again in the first week of October 2013, and died of a cardiac arrest at 3:45 pm on 24 October at Narayana Hrudayalaya hospital in Bengaluru, aged 94.Musicians, politicians, cricketers and other notable persons issued statements on his death.He was cremated at Bengaluru itself.
Dey's Bengali language autobiography, Jiboner Jalsaghorey, has been published by the renowned Ananda Publishers in the year 2005 which has been translated in English as Memories Come Alive, in Hindi as Yaden Jee Uthi and in Marathi as Jivanacha Jalasagarat.


Jibaner Jalsaghore, a documentary on Dey's life, was released in 2008. Manna Dey Sangeet Academy is developing a complete archive on Manna Dey. In association with Rabindra Bharati University, Kolkata, the Manna Dey Music Archive has been developed in the Sangeet Bhawan.


He also lent his voice for Madhushala, composed by Harivansh Rai Bachchan.


Accolades and awards
Dey was bestowed with the Padma Shri and Padma Bhushan.


The following is the list of Manna Dey's other awards:


1967 Bengal Film Journalists' Association Award - Best Male Playback Award for Sankhyabela
1968 National Film Award for Best Male Playback Singer for the Hindi Film Mere Huzoor[26]
1971 National Film Award for Best Male Playback Singer for the Bengali film Nishi Padma and Hindi film Mera Naam Joker
1971 Padma Shri Award by Government of India
1972 Filmfare Award for Best Male Playback Singer for Mera Naam Joker
1985 Lata Mangeshkar Award awarded by Government of Madhya Pradesh
1988 Michale Sahittyo Puraskar awarded by Renaissance Sanskritik Parishad, Dhaka
1990 Shyamal Mitra Award by Mithun Fans Association
1991 Sangeet Swarnachurr Award awarded by Shree Khetra Kala Prakashika, Puri
1993 P.C.Chandra Award by P.C.Chandra Group & others
1999 Kamala Devi Roy Award by Kamala Devi Group
2001 Anandalok Lifetime Award by the Anandabazar Group
2002 Special Jury Swaralaya Yesudas Award for outstanding performance in music
2003 Alauddin Khan Award by the Government of West Bengal
2004 National Award as Playback singer by Government of Kerala
2004 Hony D. Lit Award by the Rabindra Bharati University
2005 Lifetime Achievement award by the Government of Maharashtra
2005 Padma Bhushan Award by the Government of India
2007 First Akshaya Mohanty Award by Government of Orissa
2007 Awarded the Dada Saheb Phalke Award by the Government of India
2008 Hony D. Lit Award by Jadavpur University
2011 Filmfare Lifetime Achievement Award
2011 Banga-Vibhushan by Government of West Bengal
2012 Annanyo Samman given by 24 Ghanta TV channel for his lifetime achievement.
2013 Conferred with Sangeet Maha Samman by Government of West Bengal.