के. सी. रेड्डी -जन्म: (4 मई, 1902)

May 04, 2017

के. सी. रेड्डी (जन्म- 4 मई, 1902, कोलार ज़िला, कर्नाटक; मृत्यु- 27 फ़रवरी, 1976) कर्नाटक के प्रथम मुख्यमंत्री थे। अपने राजनीति जीवन में इन्होंने कई महत्त्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया था। के. सी. रेड्डी लगातार तीन बार मैसूर विधान सभा के नेता और राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे। वर्ष 1965 से 1971 तक इन्होंने मध्य प्रदेश के राज्यपाल का पद भी सम्भाला था।


जन्म-
के. सी. रेड्डी का जन्म 4 मई, 1902 ई. में कर्नाटक में कोलार ज़िले के एक ग्राम में हुआ था। अपनी शिक्षा के अंतर्गत इन्होंने बी.ए. तथा क़ानून की डिग्री प्राप्त की थी।वर्ष 1835 से 1937 तक के. सी. रेड्डी 'मैसूर पीपुल्स फेडरेशन' के प्रसीडेन्ट रहे।
आप कुछ समय तक 'जनवाणी' के संपादक भी रहे।
सन 1937-1938 तथा 1946-1947 में के. सी. रेड्डी मैसूर कांग्रेस के अध्यक्ष रहे तथा मैसूर राज्य में उत्तरदायिवत्वपूर्ण शासन की स्थापना हेतु सत्याग्रह किया।
1944-1945 में देशी राज्य प्रजा परिषद के कार्यकारिणी के सदस्य भी रहे।
के. सी. रेड्डी लगातार तीन बार (1947 से 1952 तक) मैसूर विधान सभा के नेता तथा मैसूर राज्य के मुख्यमंत्री रहे।
भारतीय संविधान सभा के सन 1947 से 1950 तक सदस्य भी रहे।
वर्ष 1952 में के. सी. रेड्डी मैसूर विधान सभा के सदस्य चुने गये तथा 1952 से 1957 तक राज्य सभा के सदस्य तथा उत्पादन विभाग के मंत्री रहे।
ये 1957 से 1964 तक लोक सभा के सदस्य रहे थे।
के. सी. रेड्डी 'स्कूल ऑफ़ इकॉनामिक्स' के संस्थापक सदस्य भी थे।
1957-1961 में ये निर्माण, आवास और आपूर्ति के मंत्री रहे तथा 1961-1962 में वाणिज्य तथा उद्योग मंत्री रहे।
वर्ष 1963-1964 में के. सी. रेड्डी संसद की कांग्रेस पार्टी के उपनेता रहे।
विदेश यात्रा


के. सी. रेड्डी ने संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और यूनाइटेड किंगडम की यात्रा भी की थी। के. सी. रेड्डी 11 फ़रवरी, 1965 से 8 मार्च, 1971 तक मध्य प्रदेश के राज्यपाल पद को सुशोभीत करते रहे।


के. सी. रेड्डी का 27 फ़रवरी, 1976 को निधन हुआ।


Kyasamballi Chengalaraya Reddy (4 May 1902 – 27 February 1976) was the first Chief Minister of Karnataka (then Mysore State).


Reddy hailing from Telugu speaking family Kyasamballi village in Bangarpet taluk of Kolar district.
After graduating in law, Reddy along with other political activists, founded the Praja Paksha (Peoples' Party) in 1930. The aim of this party was to achieve responsible government in the Princely state of Mysore. The party gained support in rural areas as it largely highlighted the issues of farmers. The Praja Paksha and Praja Mitra Mandali joined to form the Praja Samyukta Paksha (Mysore People's Federation) in 1934. Reddy served as its president from 1935 to 1937.Later, the federation merged with the Indian National Congress and participated in the Indian independence movement. Reddy served as the president of Mysore Congress twice, in 1937–38 and 1946–47. He was also a member of the Constituent Assembly of India.


After independence of India in 1947, he was in the forefront of the Mysore Chalo movement seeking responsible state government in Mysore State and went on to become the first Chief Minister of the state. He served in this position from 1947 to 1952.


Reddy was elected as a member of the Mysore Legislative Assembly in 1952. Subsequently, he served as a member of the Rajya Sabha from 1952 to 1957 and as a member of the Lok Sabha, representing Kolar from 1957 to 1962. During this period, he also served as Union Minister for Housing and Supplies (1957–61) and as Union Minister for Commerce and Industries (1961–62). Later, he also served as the governor of Madhya Pradesh from 1965 to 1971.


Reddy's birth centenary was commemorated in 2002 when his contribution towards the development of Karnataka was hailed.