ज्ञानी ज़ैल सिंह - जन्म: (5 मई, 1916)

May 05, 2017

ज्ञानी ज़ैल सिंह (जन्म 5 मई, 1916; मृत्यु 25 दिसंबर, 1994) सिख धर्म के विद्वान् पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके थे। वह अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति, सत्यनिष्ठा के राजनीतिक कठिन रास्तों को पार करते हुए भारत के राष्ट्रपति पद पर पहुँचे। 1982 में भारत के गौरवमयी राष्ट्रपति के पद पर आसीन हुए। 1987 तक के अपने कार्यकाल के दौरान इन्हें 'ब्लूस्टार ऑपरेशन' एवं इंदिरा गांधी की हत्या जैसी दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों से गुजरना पड़ा।


परिचय-
उनका जन्म पंजाब में फरीदकोट ज़िले के संधवा नामक गांव में 5 मई, 1916 ई. को हुआ। ज्ञानी ज़ैल सिंह का बचपन का नाम जरनैल सिंह था। पिता खेती करते थे। वह एक किसान के बेटे थे जिसने हल चलाया, फसल काटी, पशु चराए और खेती के विभिन्न काम करते थे, एक दिन भारत का राष्ट्रपति बन गये। यह बहुत ही असाधारण बात है और इसे सिद्ध कर दिखाया और ज्ञानी ज़ैल सिंह देश के आठवें राष्ट्रपति बन गये। ज्ञानी ज़ैल सिंह की स्कूली शिक्षा भी पूरी नहीं हो पाई कि उन्होंने उर्दू सीखने की शुरूआत की, फिर पिता की राय से गुरुमुखी पढ़ने लगे। इसी बीच में वे एक परमहंस साधु के संपर्क में आए। अढाई वर्ष तक उससे बहुत कुछ सीखने-पढ़ने को मिला। फिर गाना-बजाना सीखने की धुन सवार हुई तो एक हारमोनियम बजाने वाले के कपड़े धोकर, उसका खाना बनाकर हारमोनियम बजाना सीखने लगे। पिता ने राय दी कि तुम्हें गाना आता है तो कीर्तन करो, गुरुवाणी का पाठ करो। इस पर जरनैल सिंह ने ‘ग्रंथी’ बनने का निश्चय किया और स्कूली शिक्षा छूटी रह गई। वे गुरुग्रंथ साहब के ‘व्यावसायिक वाचक’ बन गए। इसी से ‘ज्ञानी’ की उपाधि मिली। अंग्रेजों द्वारा कृपाण पर रोक लगाने के विरोध में ज़ैल सिंह को भी जेल जाना पड़ा था। वहां उन्होंने अपना नाम जैल सिंह लिखवा दिया। छूटने पर यही जैल सिंह नाम प्रसिद्ध हो गया।
ज्ञानी ज़ैल सिंह क्रांतिकारियों के भी संपर्क में रहे। उन्होंने ‘प्रजामंडल’ का गठन किया। वे मास्टर तारासिंह के संपर्क में आए, जिन्होंने उन्हें फिर पढ़ने के लिए भेज दिया। वहां वे अधिक समय नहीं टिके और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में नौकरी कर ली। स्वतंत्रता की भावना और राष्ट्रीय विचार उनके अंदर आरंभ से ही थे। 1946 में जब फरीदकोट में अफसरों ने तिरंगा झंडा नहीं फहराने दिया तो ज्ञानी जी ने नेहरू जी को निमंत्रित कर लिया। इस अवसर पर पूरे फरीदकोट को ज्ञानी जी के पीछे खड़ा देखकर नेहरू जी ने उनके प्रभाव का अनुभव किया और ज्ञानी जी उनके निकट आ गए। 1969 में उनकी इंदिरा जी से राजनीतिक निकटता बढ़ी। 1972 से 1977 तक ज्ञानी जी पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। 1980 में जब इंदिरा जी पुनः सत्ता में आईं तो उन्होंने ज्ञानी जी को देश का गृहमंत्री बनाया।
1982 में श्री नीलम संजीव रेड्डी का कार्यकाल समाप्त होने पर ज्ञानी जी देश के आठवें राष्ट्रपति चुने गए। 25 जुलाई, 1982 को उन्होंने पद की शपथ ली। उनके कार्यकाल में अमृतसर में स्वर्ण मंदिर परिसर में ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ तथा प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या प्रमुख घटनाएं हैं। इंदिरा जी की हत्या के बाद राजीव गांधी को आपने ही प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई। यद्यपि अंतिम दिनों में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के संबंधों में खिंचाव के समाचार आने लगे थे, पर ज्ञानी जी अपना संतुलन बनाए रहे। 25 जुलाई, 1987 में उनका कार्यकाल पूरा हुआ था।


ज्ञानी ज़ैल सिंह का निधन 25 दिसंबर, 1994 ई. को एक सड़क दुर्घटना में घायल होने के कारण हो गया।


Gyani Zail Singh ( born Jarnail Singh, 5 May 1916 – 25 December 1994) was the seventh President of India serving from 1982 to 1987. Prior to his presidency, he was a politician with the Indian National Congress party, and had held several ministerial posts in the Union Cabinet, including that of Home Minister.He also served as the Secretary-General of the Non-Aligned Movement from 1983 to 1986.


His presidency was marked by Operation Blue Star, the assassination of Indira Gandhi, and the 1984 anti-Sikh riots. He died of injuries in 1994 after a car accident.


In 1982 he was unanimously nominated to serve as the President. Nonetheless, some in the media felt that the President had been chosen for being an Indira loyalist rather than an eminent person. "If my leader had said I should pick up a broom and be a sweeper, I would have done that. She chose me to be President," Singh was quoted to have said after his election. He took the oath of office on 25 July 1982. He was the first Sikh to hold the office.


He served beside Gandhi, and protocol dictated that he should be briefed every week by her on the affairs of the state. On 31 May 1984, The day before Operation Blue Star, he met with Gandhi for more than an hour, but she omitted even sharing a word about her plan.Following the operation he was pressured to resign from his post by Sikhs. He decided against resignation fearing to aggravate the situation on advice from Yogi Bhajan. He was subsequently called before the Akal Takhat to apologize and explain his inaction at the desecration of the Harimandir Sahib and killing of innocent Sikhs. Indira Gandhi was assassinated on 31 October in the same year, and he appointed her elder son Rajiv Gandhi as Prime Minister.


On 29 November 1994, Zail Singh suffered multiple injuries following a motor accident near Kiratpur Sahib in Ropar district when a truck driving down the wrong side of the road hit the car he was travelling in.Singh died in Chandigarh where he had been undergoing treatment on Christmas Day in 1994, aged 78. The Government of India announced seven days of official mourning following his death.[16] He was cremated at the Raj Ghat Memorial in Delhi. He is survived by his two daughters. He was also survived by his wife, who outlived him for seven years and died on 12 May 2002.


A commemorative postage stamp was issued by India's Department of Posts on the occasion of Singh's first death anniversary in 1995.