केशव प्रसाद मौर्य -जन्म: (7 मई, 1968)

May 07, 2017

केशव प्रसाद मौर्य (जन्म- 7 मई, 1968, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश) भारत के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञों में से एक हैं। उत्तर प्रदेश में 2017 के विधान सभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की शानदार विजय के बाद जब योगी आदित्यनाथ को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया, तब केशव प्रसाद मौर्य तथा दिनेश शर्मा को उप-मुख्यमंत्री बनाया गया। उन्होंने 19 मार्च, 2017 को उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। केशव जी पिछड़ों और दलितों का चेहरा माने जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह ही केशव प्रसाद मौर्य भी बचपन में चाय बेचते थे, इसलिए कहा जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उनसे विशेष स्नेह रहा है।


परिचय
केशव प्रसाद मौर्य का जन्म 7 मई, 1968 को कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश के सिराथू में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। पिता का नाम श्याम लाल मौर्य और माता का नाम धनपति देवी मौर्य है। केशव जी ने अपने माता-पिता के साथ कृषि कार्यों को करते हुए अपनी शिक्षा पूर्ण करने के लिए कौशाम्बी के सिराथू रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान भी चलायी और समाचार पत्र का विक्रय भी किया। वे कोइरी समाज से हैं। उनकी पत्नी का नाम राजकुमारी देवी मौर्य है। उनके दो पुत्र हैं- योगेश कुमार और आशीष कुमार। उत्तर प्रदेश में पिछड़ों और दलितों का चेहरा माने जाने वाले केशव प्रसाद मौर्य को भारतीय जनता पार्टी ने विधान सभा चुनाव, 2017 से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। 'राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ' के सम्पर्क में आने के बाद केशव प्रसाद मौर्य 'विश्व हिन्दू परिषद', 'बजरंग दल' और भारतीय जनता पार्टी में करीब 18 साल तक प्रचारक रहे। साथ ही 'श्रीराम जन्म भूमि' और गोरक्षा व हिन्दू हित के लिए अनेकों आन्दोलन किये और इसके लिए जेल भी गये।
बीजेपी में केशव प्रसाद मौर्य का राजनीतिक जीवन 2012 में शुरू हुआ। 2012 में इलाहाबाद की सिराथू सीट से वह एमएलए बने। इसके बाद वर्ष 2014 में वह फूलपुर से भाजपा प्रत्याशी के रूप में तीन लाख आठ हज़ार तीन सौ आठ मतों से ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाले प्रत्याशी रहे और फिर सांसद बने। इलाहाबाद को 'स्मार्ट सिटी' के रूप में जो उपहार मिला, उसमें भी उन्होने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। 2016 में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बन गए। बीजेपी में उनका राजनीतिक जीवन चार साल का ही है, लेकिन विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल में वह बारह साल रहे हैं।


केशव प्रसाद मौर्य 'विश्व हिंदू परिषद' से 18 साल तक जुड़े रहे और गंगापार तथा यमुनापार में प्रचारक रहे। 2002 में पश्चिमी विधान सभा सीट से उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी के रूप में जब चुनाव लड़ा तो बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी राजू पाल के हाथों हार का सामना करना पड़ा। लेकिन केशव मौर्य के लिए हार का सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ। 2007 के चुनाव में भी उन्होंने इसी विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और एक बार फिर हार का मुंह देखना पड़ा। लेकिन आखिरकार 2012 के चुनाव में उन्हें सिराथू विधान सभा सीट से भारी जीत मिली। दो साल तक विधायक रहने के बाद 2014 के लोक सभा चुनाव में पहली बार फूलपुर सीट पर विजय पाई और भारतीय जनता पार्टी का झंडा फहरा दिया।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सबसे करीबी और विश्व हिन्दू परिषद के तेज तर्रार नेताओं में गिने जाने वाले केशव प्रसाद मौर्य ने विधान सभा चुनाव, 2017 के लिए अपनी पार्टी का धुआंधार प्रचार किया। चुनाव में मौर्य अच्छे वक्ता साबित हुए और उन्होंने बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा 155 चुनावी सभाएं कीं। बीजेपी में पिछड़ी जाति का चेहरा कहे जाने वाले केशव प्रसाद मौर्य को अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खोज माना जाता है और केशव मौर्य इन दोनों ही बड़े नेताओं के करीबी माने जाते हैं।


Keshav Prasad Maurya (born 7 May 1969) is an Indian politician who is the current Deputy Chief Minister of the Indian state of Uttar Pradesh. He is a member of the Bharatiya Janata Party and contested the Indian general elections, 2014 from the Phulpur parliamentary constituency of Allahabad district and won it.


On 8 April 2016, on the first day of Chaitra, he was declared Bharatiya Janata Party chief of Uttar Pradesh, India's most populous state. Like his party's top leader - Prime Minister Narendra Modi - Maurya sold tea in his youth at his father's stall in their village. A member of the Rashtriya Swayamsevak Sangh, he also participated in the Ram Janmabhoomi movement. 


Born in 1969, in Sirathu in Kausambhi district, adjoining Allahabad, Maurya went on to study Hindi Literature at the Hindu Sahitya Sammelan in Allahabad. Hailing from a Kushwaha farming family, Maurya sold tea and newspapers during his childhood. Maurya Family runs Petrol Pump & Schools in Sirathu Area & Also Holding the Director position of Kamdhenu Logistics private limited with his son Yogesh Maurya.


Though he keeps a low-profile and is not popular outside the Kaushambi-Allahabad-Varanasi belt, Maurya’s pro-Hindutva image, and his promotion could be a sign of things to come. He has been associated with the RSS and the VHP-Bajrang Dal from an early age, holding the posts of Nagar Karyawah and VHP Pranth Sanghathan Mantri, among others. While being active in the gauraksha (cow-protection) movements, he also participated in the Ram Janmabhoomi movement. In the BJP, Maurya has been the regional (Kashi) coordinator of the backward class cell and the BJP Kisan Morcha.


He has contested the 2002, 2007 and 2012 assembly elections and was the sitting MLA from Sirathu assembly constituency before getting elected as MP from the Phulpur seat in 2014 with a thumping five lakh votes and over 52 per cent votes.


As on March 18, 2017 he has been appointed as the Deputy Chief Minister of Uttar Pradesh.


He became the first MLA of BJP from Sirathu Tahseel in the year 2012 and It was the first time when any MLA of BJP was elected from Sirathu Tahseel. And after two and half year he became the MP from Phoolpur from BJP. He got the ministries of public works department (PWD), food processing, entertainment tax and public enterprises department.