पंकज मलिक -जन्म: (10 मई, 1905)

May 10, 2017

पंकज मलिक ( जन्म- 10 मई, 1905, कलकत्ता, ब्रिटिश भारत; मृत्यु- 19 फ़रवरी, 1978, पश्चिम बंगाल) बांग्ला संगीत और फ़िल्मों में सफलता के साथ-साथ हिन्दी फ़िल्मों में भी अपनी कामयाबी का परचम लहराने वाले शास्त्रीय संगीत के विशेषज्ञ थे। उनका पूरा नाम 'पंकज कुमार मलिक' था। वे ऐसे संगीतकार व गायक थे, जिनकी आवाज़ के जादू ने आज भी उनके लाखों प्रशंसकों को बांध रखा है। बहुमखी प्रतिभा के धनी पंकज मलिक को संगीत और गायन के अलावा अभिनय में भी कुशलता हासिल थी। वह जब भी परदे पर अवतरित हुए कामयाब रहे। उनकी ऐसी हिन्दी फ़िल्मों में 'डाक्टर', 'आंधी', और 'नर्तकी' आदि विशेष चर्चित हैं। जाति प्रथा की समस्या के ख़िलाफ़ संदेश देने वाली फ़िल्म 'डाक्टर' में पंकज मलिक ने कई गाने खुद गाए थे, जो काफ़ी हिट हुए। पंकज मलिक की अपनी विशिष्ट गायन शैली थी, जिसकी बदौलत उन्होंने हज़ारों लोगों को अपना प्रशंसक बनाया। उन्हें हिन्दी फ़िल्मों के सर्वोच्च सम्मान 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' से भी नवाजा गया।


जन्म-
पंकज मलिक का जन्म 10 मई, 1905 को कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में हुआ था। उनके पिता का नाम मनीमोहन मलिक और माता का नाम मनमोहिनी था। उनके पिता पारम्परिक बंगाली संगीत में विशेष रुचि रखते थे। पंकज मलिक ने दुर्गादास बन्धोपाध्याय के संरक्षण में 'भारतीय शास्त्रीय संगीत' की अपनी प्रारम्भिक शिक्षा पाई थी। कम उम्र में ही उन्होंने ख्याल, ध्रुपद, टप्पा और अन्य शास्त्रीय संगीत का ज्ञान हासिल कर लिया था। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के 'स्कॉटिश चर्च कॉलेज' में अध्ययन किया। शिक्षा समाप्त करने के बाद ही उनके जीवन में एक अहम मोड़ आया। उनका सम्पर्क दीनेन्द्रनाथ टैगोर से हुआ, जो रवीन्द्रनाथ टैगोर के भतीजे थे। उन्होंने दीनेन्द्रनाथ टैगोर से रवीन्द्र संगीत सीखा। बांग्ला भाषियों में रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविताओं को लोकप्रिय बनाने में मलिक के गाए गीतों का बड़ा योगदान माना जाता है। पंकज मलिक आकाशवाणी से जुड़ने वाले शुरुआती कलाकारों में थे। पंकज मलिक का फ़िल्मी सफर मूक फ़िल्मों के दौर में ही शुरू हो गया था, किंतु उन्हें सही पहचान 1930 के दशक में बोलती फ़िल्मों की शुरूआत के साथ मिली। हिन्दी और बांग्ला दोनों भाषाओं को मिलाकर उन्होंने एक सौ से अधिक फ़िल्मों में संगीत दिया और कई में अभिनय भी किया। उनकी उल्लेखनीय संगीत रचनाओं में 'महिषासुरमर्दिनी' भी शामिल है। आकाशवाणी के लिए बनाए गए बांग्ला और संस्कृत मिश्रित इस कार्यक्रम में हेमंत कुमार सहित उस दौर के सभी प्रसिद्ध गायकों ने अपनी आवाज़ दी। इस कार्यक्रम को आज भी प्रतिवर्ष चैत्र मास के नवरात्र से ठीक पहले महालय के अवसर पर आकाशवाणी द्वारा प्रसारित किया जाता है और लोग इसे बेहद रुचि से सुनते हैं।
पंकज मलिक के संगीत निर्देशन वाली शुरूआती हिन्दी फ़िल्मों में से एक 'धरती माता' काफ़ी चर्चित हुई। ग्रामीण भारत के जीवन पर आधारित इस फ़िल्म में किसानों की समस्याएँ और उन्हें मुसीबतों से जूझने का रास्ता दिखाने का प्रयास किया गया था। पंकज मलिक ने इस फ़िल्म में बेहतरीन संगीत दिया और उनकी धुनों के कारण पूरी फ़िल्म में ग्रामीण परिवेश जीवंत होता दिखाई दिया। 'धरती माता' फ़िल्म में के. एल. सहगल ने आदर्शवादी युवक की भूमिका निभायी थी। इस फ़िल्म के गीत 'प्रभु मोहे बुला गांव में दुनिया रंगरंगीली बाबा दुनिया रंगरंगीली' आदि बेहद कामयाब रहे। 'धरती माता' के बाद पंकज मलिक की कई फ़िल्में प्रदर्शित हुईं, जिन्हें समीक्षकों के अलावा दर्शकों ने काफ़ी पसंद किया। ऐसी फ़िल्मों में 'दुश्मन', 'काशीनाथ', 'ज़िंदगी', 'नर्तकी' और 'मेरी बहन' आदि शामिल हैं। 'नर्तकी' संगीत की दृष्टि से एक अहम फ़िल्म थी। देवकी बोस निर्देशित इस फ़िल्म में पंकज मलिक ने एक कवि की भूमिका निभायी और कई गीत भी गाए थे। इन गानों में 'ये कौन आया सबेरे सबेरे कौन तुझे समझाए मूरख' विशेष तौर पर याद किए जाते हैं।[1]


 


प्रमुख फ़िल्में
पंकज मलिक की कुछ प्रमुख फ़िल्मों के नाम निम्नलिखित हैं-


यांत्रिक - 1952
मंजूर - 1949
मेरी बहन - 1944
नर्तकी - 1940
जिन्दगी - 1940
डाक्टर - 1940
धरती माता - 1938
देवदास - 1936
यहूदी की लड़की - 1933


न्यू थियेटर्स से अपार प्रेम करने वाले पंकज मलिक इसके बंद होने तक इससे जुड़े रहे। 'जलजला' और 'कस्तूरी' उनकी आखिरी फ़िल्मों में थी, जिनका संगीत निर्देशन उन्होंने विशेष अनुरोध करने पर ही स्वीकर किया था। इसके बाद वह फ़िल्मों से अलग हो गए और संगीत की शिक्षा के क्षेत्र में विशेष तौर पर सक्रिय रहे और अंतत 19 फ़रवरी, 1978 को वह इस दुनिया को अलविदा कह गए। पंकज मलिक को अपने जीवन काल में वह सब मिला, जिसकी हसरत किसी कलाकार को होती है।



Pankaj Mullick, also known as Pankaj Kumar Mullick (Pôngkoj Kumar Mollik; 10 May 1905 – 19 February 1978), was a popular [Bengali] Indian music composer and playback singer, who was a pioneer of film music in Bengali cinema and Hindi cinema at the advent of playback singing, as well as an early exponent of Rabindra Sangeet.


He was awarded the Padma Shri in 1970,[5] followed by the Dadasaheb Phalke Award (India's highest award in cinema, given by the Government of India) in 1972 for lifetime contribution to Indian cinema.
He was born in Kolkata in 1905, to Monimohan Mullick and Monomohini. His father had a deep interest in traditional Bengali music. He started his early training in Indian classical music under the tutelage of Durgadas Bandyopadhyaya. He studied at the Scottish Church College of the University of Calcutta.An important turning point in his life came when, after finishing his studies, he came in contact with Dinendranath Tagore, who was Rabindranath Tagore's grand-nephew. This led to Pankaj Mullick's lasting interest in Rabindra Sangeet. Rabindranath Tagore, in turn, grew fond of him, and soon Mullick became known as one of the leading exponents of Tagore's songs.


Tagore's song Nemecche Aaj Prothom Badal became his first commercial recording, with the Kolkata-based Videophone Company in 1926, at the age of eighteen. This was the first of many albums which made him a household name in Rabindra sangeet.


He started his career with the Indian Broadcasting Corporation in Calcutta in 1927, the forerunner of All India Radio (AIR), along with composer R. C. Boral, where he contributed as a music director and artist for nearly fifty years.


He contributed in various capacities to Bengali, Hindi, Urdu and Tamil language films for 38 years, starting in 1931. He worked as music director to artists like K.L. Saigal, S.D. Burman, Hemanta Mukherjee, Geeta Dutt and Asha Bhosle. He acted with famous film actors like K L Saigal, P.C. Barua and Kanan Devi. Along with Nitin Bose and his renowned sound engineer brother Mukul Bose, Mullick introduced playback singing in Indian cinema.


He worked with one of the early film studios, New Theatres Calcutta for 25 years.


Filmography
Year Film
1955 Raikamal
1954 Chitrangada
1952 Yatrik
1952 Mahaprasthaner Pathey
1952 Zalzala
1950 Rupkatha
1949 Manzoor
1948 Pratibad
1947 Ramer Sumati
1945 Dui Purush
1944 Meri Bahen
1943 Kashinath
1943 Dikshul
1942 Meenakshi
1940 Doctor
1940 Nartaki
1940 Zindagi
1939 Badi Didi
1939 Dushman
1939 Kapal Kundala
1938 Abhagin
1938 Abhigyan
1938 Desher Mati
1938 Dharti Mata
1938 Jiban Maran
1937 Badi Bahen
1937 Didi
1937 Mukti
1936 Devdas
1936 Grihadah
1936 Karodpati a.k.a. Millionaire with R. C. Boral
1936 Maya
1936 Manzil
1933 Yahudi Ki Ladki
1931 Chasher Meye