मौलाना हसरत मोहानी -मृत्यु: (13 मई, 1951

May 13, 2017

मौलाना हसरत मोहानी ( मूल नाम- सैयद फ़ज़्लुल्हसन, जन्म-1 जनवरी, 1875, उन्नाव, उत्तर प्रदेश; मृत्यु- 13 मई, 1951 कानपुर) भारत की आज़ादी की लड़ाई के सच्चे सिपाही होने के साथ-साथ शायर, पत्रकार, राजनीतिज्ञ और ब्रिटिश भारत के सांसद थे।


 परिचय-
मौलाना हसरत मोहानी 'इन्कलाब ज़िन्दाबाद' का नारा देने वाले आज़ादी के सच्चे सिपाही थे, उनका वास्तविक नाम 'सैयद फ़ज़्लुल्हसन' और उपनाम 'हसरत' था। वे उत्तर प्रदेश के ज़िला उन्नाव के मोहान गांव में पैदा हुये थे इसलिये 'मौलाना हसरत मोहानी' के नाम से मशहूर हुए। इनका उपनाम इतना प्रसिद्ध हुआ कि लोग इनका वास्तविक नाम भूल गए। इनकी आरंभिक शिक्षा घर पर ही हुई थी। ये बहुत ही होशियार और मेहनती विद्यार्थी थे और उन्होंने राज्य स्तरीय परीक्षा में टॉप किया था। बाद में उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी में पढ़ाई की जहाँ उनके कालेज के साथी मौलाना मोहम्मद अली जौहर और मौलाना शौक़त अली आदि थे। अलीगढ़ के छात्र दो दलों में बँटे हुए थे। एक दल देशभक्त था और दूसरा दल स्वार्थभक्त था। ये प्रथम दल में सम्मिलित होकर उसकी प्रथम पंक्ति में आ गए। यह तीन बार कॉलेज से निर्वासित हुए। उन्होंने सन 1903 ई. में बी. ए. परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके अंर्तगत इन्होंने एक पत्रिका 'उर्दुएमुअल्ला' भी निकाली और नियमित रूप से स्वतंत्रता के आंदोलन में भाग लेने लगे। यह कई बार जेल गए तथा देश के लिए बहुत कुछ बलिदान किया। उन्होंने एक खद्दर भण्डार भी खोला, जो खूब चला। हसरत मोहानी ने लखनऊ के प्रसिद्ध शायर और अपने उस्ताद तसलीम लखनवी और नसीम देहलवी से शायरी की शिक्षा हासिल की। हसरत ने उर्दू ग़ज़ल को एक नितांत नए तथा उन्नतिशील मार्ग पर मोड़ दिया है। उर्दू कविता में स्त्रियों के प्रति जो शुद्ध और लाभप्रद दृष्टिकोण दिखलाई देता है, प्रेयसी जो सहयात्री तथा मित्र रूप में दिखाई पड़ती है तथा समय से टक्कर लेती हुई अपने प्रेमी के साथ सहदेवता तथा मित्रता दिखलाती ज्ञात होती है, वह बहुत कुछ हसरत ही की देन है। उनकी कुछ खास किताबें 'कुलियात-ए-हसरत', 'शरहे कलामे ग़ालिब', 'नुकाते-ए-सुखन', 'मसुशाहदाते ज़िन्दां' आदि बहुत मशहूर हुयीं। उस्ताद ग़ुलाम अली द्वारा गाई गई उनकी ग़ज़ल 'चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है' भी बहुत मशहूर हुई जिसे बाद में फिल्म निकाह में फिल्माया गया। उन्होंने ग़ज़लों में ही शासन, समाज तथा इतिहास की बातों का ऐसे सुंदर ढंग से उपयोग किया है कि उसका प्राचीन रंग अपने स्थान पर पूरी तरह बना हुआ है। उनकी ग़ज़लें अपनी पूरी सजावट तथा सौंदर्य को बनाए रखते हुए भी ऐसा माध्यम बन गई हैं कि जीवन की सभी बातें उनमें बड़ी सुंदरता से व्यक्त की जा सकती है। उन्हें सहज में 'उन्नतशील ग़ज़लों का प्रवर्तक कहा जा सकता है। हसरत ने अपना सारा जीवन कविता करने तथा स्वतंत्रता के संघर्ष में प्रयत्न एवं कष्ट उठाने में व्यतीत किया। साहित्य तथा राजनीति का सुंदर सम्मिलित कराना कितना कठिन है, ऐसा जब विचार उठता है, तब स्वत: हसरत की कविता पर दृष्टि जाती है। इनकी कविता का संग्रह 'कुलियात-ए-हसरत' के नाम से प्रकाशित है।


मौलाना हसरत मोहानी की मृत्यु 13 मई, सन 1951 ई. को कानपुर में हुई थी। इनके इन्तक़ाल के बाद 1951 में कराची पाकिस्तान में हसरत मोहानी मेमोरियल सोसायटी, हसरत मोहानी मेमोरियल लाईब्रेरी और ट्रस्ट बनाये गये। उनके वर्षी पर हर साल इस ट्रस्ट और हिन्दुस्तान पाकिस्तान के अन्य संगठनों द्वारा उनकी याद में सभायें और विचार गोश्ठियॉ आयोजित की जाती हैं। कराची पाकिस्तान में हसरत मोहानी कालोनी, कोरांगी कालोनी हैं और कराची के व्यवसायिक इलाके में बहुत बडे़ रोड का नाम उनके नाम पर रखा गया है।


Hasrat Mohani (1 January 1875 – 13 May 1951) was an Indian activist in the Indian Independence Movement, and a noted poet of the Urdu language. He coined the notable slogan Inquilab Zindabad (that translates to "Long live the revolution!") in 1921.Together with Swami Kumaranand, he is regarded as the first person to demand complete independence for India in 1921 at the Ahmedabad Session of the Indian National Congress.


He was born in 1875 as Syed Fazl-ul-Hasan at Mohan, a town in the Unnao district of United Provinces in British India. Hasrat was his pen name (takhallus) that he used in his Urdu poetry whereas his last name 'Mohani' refers to Mohan, his birthplace.


His ancestors migrated from Nishapur, in Iran.


Hasrat Mohani championed the freedom struggle.He also wrote verses expressing deep love for Krishna, and often went to Mathura to celebrate Krishna Janmashtami.


He studied in Aligarh Muslim University, where some of his colleagues were Maulana Mohammad Ali Jauhar and Maulana Shaukat Ali. His teachers in poetry were Tasleem Lucknawi and Naseem Dehlvi.
A few of his books are Kulliyat-e-Hasrat Mohani (en. Collection of Hasrat Mohani's poetry), Sharh-e-Kalam-e-Ghalib (en. Explanation of Ghalib's poetry), Nukaat-e-Sukhan (en. Important aspects of poetry), Mushahidaat-e-Zindaan (en. Observations in Prison), etc. A very popular ghazal Chupke Chupke Raat Din sung by Ghulam Ali and Ghazal King Jagjit Singh was penned by him. He was also featured in the film Nikaah of 1982. The famous slogan of Indian freedom fighters Inquilab Zindabad was coined by Mohani in 1921.


In 1921 Ram Prasad Bismil attended Ahmedabad Congress along with many volunteers from Shahjahanpur and occupied a place on the dais.[citation needed] A senior congressman Prem Krishna Khanna and revolutionary Ashfaqulla Khan was also with him. Bismil played an active role in the Congress with Mohani and got the most debated proposal of Poorn Swaraj passed in the General Body meeting of Congress.[citation needed] Mohandas K. Gandhi, who was not in the favour of this proposal became quite helpless before the overwhelming demand of youths. It was another victory of Bismil against the Liberal Group of Congress.He returned to Shahjahanpur and mobilised the youths of United Province for non-co-operation with the Government. The people of U.P. were so much influenced by the furious speeches and verses of Bismil that they became hostile against British Raj.


Maulana Hasrat Mohani died on 13 May 1951 in Lucknow, India.


Hasrat Mohani Memorial Society was founded by Maulana Nusrat Mohani in 1951. In Karachi, Sindh, Pakistan, Hasrat Mohani Memorial Library and Hall Trust, Karachi have been established by Hasrat Mohani Memorial Society (Regd.) Every year, on his death anniversary, a memorial meeting is conducted by this Trust as well as many other organisations in India and Pakistan.[citation needed] Also Hasrat Mohani Colony, at Korangi Town in Karachi, Sindh, Pakistan, was named after Maulana Hasrat Mohani. A famous and vast road is named after him in the financial hub of Karachi.[citation needed]


Hasrat Mohani Memorial Girls' Higher Secondary School in Metiabruz, Kolkata, India, is named after him.