किशोर कुमार ( मृत्यु: 13 अक्टूबर, 1987)

October 13, 2017

किशोर कुमार (अंग्रेज़ी: Kishore Kumar, जन्म: 4 अगस्त 1929 - मृत्यु: 13 अक्टूबर, 1987) भारतीय संगीत के इतिहास में अमर गायक, अभिनेता, निर्देशक, निर्माता और गीतकार थे। किशोर कुमार का असली नाम 'आभास कुमार गांगुली' था।


जीवन परिचय
किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त, 1929 ई. को खंडवा, मध्य प्रदेश में एक बंगाली परिवार में हुआ था। किशोर कुमार एक विलक्षण शख़्सियत रहे हैं। हिन्दी सिनेमा की ओर उनका बहुत बड़ा योगदान है। किशोर कुमार के पिता कुंजीलाल खंडवा शहर के जाने माने वक़ील थे। किशोर चार भाई बहनों में सबसे छोटे थे। सबसे छोटा होने के नाते किशोर कुमार को सबका प्‍यार मिला। इसी चाहत ने किशोर को इतना हंसमुख बना दिया था कि हर हाल में मुस्कुराना उनके जीवन का अंदाज बन गया। उनके सबसे बड़े भाई अशोक कुमार मुंबई में एक अभिनेता के रूप में स्थापित हो चुके थे और उनके एक और भाई अनूप कुमार भी फ़िल्मों में काम कर रहे थे। किशोर कुमार बचपन से ही एक संगीतकार बनना चाहते थे, वह अपने पिता की तरह वक़ील नहीं बनना चाहते थे। किशोर कुमार ने 81 फ़िल्मों में अभिनय किया और 18 फ़िल्मों का निर्देशन भी किया। फ़िल्म 'पड़ोसन' में उन्होंने जिस मस्त मौला आदमी के किरदार को निभाया वही किरदार वे ज़िंदगी भर अपनी असली ज़िंदगी में निभाते रहे। हिन्दी सिनेमा में इलैक्ट्रिक संगीत लाने का श्रेय किशोर कुमार को जाता है।


फ़िल्मी सफ़र
किशोर कुमार के. एल. सहगल के गानों से बहुत प्रभावित थे और उनकी ही तरह गायक बनना चाहते थे। किशोर कुमार के भाई अशोक कुमार की चाहत थी कि किशोर कुमार नायक के रूप में हिन्दी फ़िल्मों के हीरो के रूप में जाने जाएं, लेकिन किशोर कुमार को अदाकारी की बजाय पा‌र्श्व गायक बनने की चाहत थी। किशोर कुमार ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा कभी किसी से नहीं ली थी। किशोर कुमार की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में फ़िल्म 'शिकारी' (1946) से हुई। इस फ़िल्म में उनके बड़े भाई अशोक कुमार ने प्रमुख भूमिका की थी। किशोर कुमार ने 1951 में फणी मजूमदार द्वारा निर्मित फ़िल्म 'आंदोलन' में हीरो के रूप में काम किया मगर फ़िल्म फ्लॉप हो गई। 1954 में किशोर कुमार ने बिमल राय की 'नौकरी' में एक बेरोज़गार युवक की संवेदनशील भूमिका कर अपनी अभिनय प्रतिभा से भी परिचित किया। इसके बाद 1955 में बनी 'बाप रे बाप', 1956 में 'नई दिल्ली', 1957 में 'मि. मेरी' और 'आशा', और 1958 में बनी 'चलती का नाम गाड़ी' जिस में किशोर कुमार ने अपने दोनों भाईयों अशोक कुमार और अनूप कुमार के साथ काम किया और उनकी अभिनेत्री मधुबाला थी।


पार्श्वगायन


किशोर कुमार को पहली बार गाने का मौक़ा 1948 में बनी फ़िल्म 'ज़िद्दी' में मिला। फ़िल्म 'ज़िद्दी' में किशोर कुमार ने देव आनंद के लिए गाना गाया था। 'जिद्दी' की सफलता के बावज़ूद उन्हें न तो पहचान मिली और न कोई ख़ास काम मिला। किशोर कुमार ने गायकी का एक नया अंदाज़ बनाया जो उस समय के नामचीन गायक रफ़ी, मुकेश और सहगल से काफ़ी अलग था। किशोर कुमार सन् 1969 में निर्माता निर्देशक शक्ति सामंत की फ़िल्म 'आराधना' के ज़रिये गायकी के दुनिया में सबसे सफल गायक बन गये। किशोर कुमार को शुरू में एस डी बर्मन और अन्य संगीतकारों ने अधिक गंभीरता से नहीं लिया और उनसे हल्के स्तर के गीत गवाए गए, लेकिन किशोर कुमार ने 1957 में बनी फ़िल्म "फंटूस" में 'दुखी मन मेरे' गीत को गाकर अपनी ऐसी धाक जमाई कि जाने माने संगीतकारों को किशोर कुमार की प्रतिभा का लोहा मानना पड़ा। किशोर कुमार को इसके बाद एस डी बर्मन ने अपने संगीत निर्देशन में कई गीत गाने का मौक़ा दिया। लता मंगेशकर को किशोर कुमार गायकों में सबसे ज़्यादा अच्छे लगते थे। लता जी ने कहा कि किशोर कुमार हर तरह के गीत गा लेते थे और उन्हें ये मालूम था कि कौन सा गाना किस अंदाज़ में गाना है। किशोर कुमार लता जी की बहन आशा भोंसले के भी सबसे पसंदीदा गायक थे और उनका मानना है कि किशोर अपने गाने दिल और दिमाग़ दोनों से ही गाते थे। आज भी उनकी सुनहरी आवाज़ लाखों संगीत के दीवानों के दिल में बसी हुई है और उसका जादू हमारे दिलों दिमाग़ पर छाया हुआ है।


आर. डी. बर्मन के संगीत निर्देशन में


आर डी बर्मन के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार ने मुनीम जी, टैक्सी ड्राइवर, फंटूश, नौ दो ग्यारह, पेइंग गेस्ट, गाईड, ज्वेल थीफ़, प्रेमपुजारी, तेरे मेरे सपने जैसी फ़िल्मों में अपनी जादुई आवाज़ से फ़िल्मी संगीत के दीवानों को अपना दीवाना बना लिया। एक अनुमान के मुताबिक किशोर कुमार ने वर्ष 1940 से वर्ष 1980 के बीच के अपने करियर के दौरान क़रीब 574 से अधिक गाने गाए।


अन्य भाषाओं में गीत


किशोर कुमार ने हिन्दी के साथ ही तमिल, मराठी, असमी, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी, मलयालम और उड़िया फ़िल्मों के लिए भी गीत गाए।


वैवाहिक जीवन
किशोर कुमार की पहली शादी रुमा देवी के से हुई थी, लेकिन जल्दी ही शादी टूट गई और इस के बाद उन्होंने मधुबाला के साथ विवाह किया। उस दौर में दिलीप कुमार जैसे सफल और शोहरत की बुलंदियों पर पहुँचे अभिनेता जहाँ मधुबाला जैसी रूप सुंदरी का दिल नहीं जीत पाए वही मधुबाला किशोर कुमार की दूसरी पत्नी बनी। 1961 में बनी फ़िल्म 'झुमरु' में दोनों एक साथ आए। यह फ़िल्म किशोर कुमार ने ही बनाई थी और उन्होंने ख़ुद ही इसका निर्देशन किया था। इसके बाद दोनों ने 1962 में बनी फ़िल्म 'हाफ़ टिकट' में एक साथ काम किया, जिसमें किशोर कुमार ने यादगार कॉमेडी कर अपनी एक अलग छवि पेश की। 1976 में उन्होंने योगिता बाली से शादी की मगर इन दोनों का यह साथ मात्र कुछ महीनों का ही रहा। इसके बाद योगिता बाली ने मिथुन चक्रवर्ती से शादी कर ली। 1980 में किशोर कुमार ने चौथी शादी लीना चंद्रावरकर से की जो उम्र में उनके बेटे अमित से दो साल बड़ी थीं।


वर्ष फ़िल्म
1988 कौन जीता कौन हारा
1982 चलती का नाम गाड़ी
1974 बढ़ती का नाम दाढ़ी
1971 दूर का राही
1971 हंगामा
1968 साधू और शैतान
1968 पड़ोसन
1968 हाय मेरा दिल
1966 प्यार किये जा
1966 लड़का लड़की
1964 दूर गगन की छाँव में
1964 मिस्टर एक्स इन बॉम्बे
1962 हाफ टिकट
1962 मनमौजी
1962 नॉटी बॉय
1961 झुमरू
1960 गर्ल फ्रैंड
1960 महलों के ख़्वाब
1960 काला बाज़ार
1959 चाचा ज़िन्दाबाद
1958 चलती का नाम गाड़ी
1958 रागिनी
1957 आशा
1957 मिस मैरी
1957 बंदी
1956 भाई भाई
1956 पैसा ही पैसा
1956 ढाके की मलमल
1956 मेम साहिब
1955 भगवत महिमा
1955 पहली झलक
1955 बाप रे बाप
1954 नौकरी
1954 धोबी डॉक्टर
1953 लड़की
1952 तमाशा
1946 शिकारी



किशोर कुमार के कुछ प्रसिद्ध गीत
गीत फ़िल्म संगीतकार
हमें और जीने की चाहत न होती... अगर तुम न होते राहुल देव बर्मन
आदमी जो कहता है… मजबूर लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
आने वाला पल जाने वाला है… गोलमाल (1979) राहुल देव बर्मन
ओ मेरे दिल के चैन… मेरे जीवन साथी राहुल देव बर्मन
कोई हमदम न रहा… झूमरू किशोर कुमार
खाईके पान बनारस वाला… डॉन (1978) कल्याणजी-आनंदजी
ख्वाब हो तुम या कोई हक़ीकत कौन हो तुम बतलाओ… तीन देवियाँ राहुल देव बर्मन
गीत गाता हूँ मैं… लाल पत्थर शंकर जयकिशन
घुँघरू की तरह बजता ही रहा हूँ मैं… चोर मचाये शोर रविन्द्र जैन
चलते चलते मेरे ये गीत… चलते चलते बप्पी लहरी
चिंगारी कोई भड़के… अमरप्रेम राहुल देव बर्मन
छूकर मेरे मन को… याराना राजेश रोशन
जीवन से भरी तेरी आँखें… सफ़र कल्याणजी-आनंदजी
तेरी दुनिया से, होके मजबूर चला… पवित्र पापी प्रेम धवन
दिल आज शायर है… गैम्बलर सचिन देव बर्मन
दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा… अमानुष श्यामल मित्रा
दीवाना लेके आया है… मेरे जीवन साथी राहुल देव बर्मन
दुखी मन मेरे, सुन मेरा कहना… फंटूश सचिन देव बर्मन
प्यार दीवाना होता है… कटी पतंग राहुल देव बर्मन
फिर वोही रात है… फिर वो ही रात राहुल देव बर्मन
फूलों का तारों का… हरे रामा हरे कृष्णा राहुल देव बर्मन
माना जनाब ने पुकारा नहीं… पेइंग गेस्ट सचिन देव बर्मन
मुसाफ़िर हूँ यारो… परिचय सचिन देव बर्मन
मेरा जीवन कोरा काग़ज़ कोरा ही रह गया… कोरा काग़ज़ कल्याणजी आनंदजी
मेरी भीगी भीगी सी… अनामिका राहुल देव बर्मन
मेरे नैना सावन भादों… महबूबा राहुल देव बर्मन
मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू… आराधना सचिन देव बर्मन
ये जीवन है… पिया का घर लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
ये दिल न होता बेचारा… ज्वेल थीफ सचिन देव बर्मन
ये शाम मस्तानी, मदहोश किये जाये… कटी पतंग राहुल देव बर्मन
रिम झिम गिरे सावन… मंज़िल राहुल देव बर्मन
रोते हुए आते हैं सब… मुकद्दर का सिकंदर कल्याणजी आनंदजी
सागर जैसी आँखों वाली… सागर राहुल देव बर्मन
हम हैं राही प्यार के… नौ दो ग्यारह सचिन देव बर्मन
हमें तुमसे प्यार कितना… कुदरत राहुल देव बर्मन
ज़िंदगी इक सफ़र है सुहाना… अंदाज़ शंकर जयकिशन
ज़िंदगी प्यार का गीत है… सौतन ऊषा खन्ना



फ़िल्म फेयर पुरस्कार
किशोर कुमार को आठ फ़िल्म फेयर अवार्ड मिले हैं। किशोर कुमार को पहला फ़िल्म फेयर अवार्ड 1969 में 'अराधना' फ़िल्म के गीत 'रूप तेरा मस्ताना प्यार मेरा दीवाना' के लिए दिया गया था। किशोर कुमार की ख़ासियत यह थी कि उन्होंने देव आनंद से लेकर राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन के लिए अपनी आवाज़ दी और इन सभी अभिनेताओं पर उनकी आवाज़ ऐसी रची बसी मानो किशोर ख़ुद उनके अंदर मौजूद हों।


हिन्दी सिनेमा जगत में प्रचलित किस्से


किशोर कुमार के सम्मान में जारी डाक टिकट
किशोर कुमार की आवाज़ की पुरानी के साथ-साथ नई पीढ़ी भी दीवानी है। किशोर जितने उम्दा कलाकार थे, उतने ही रोचक इंसान भी थे। उनके कई किस्से हिन्दी सिनेमा जगत में प्रचलित हैं।


रशोकि रमाकु


किशोर कुमार को अटपटी बातों को अपने चटपटे अंदाज में कहने का फ़ितूर था। ख़ासकर गीतों की पंक्ति को दाएँ से बाएँ गाने में किशोर कुमार ने महारत हासिल कर ली थी। नाम पूछने पर वह कहते थे- रशोकि रमाकु।


तीन नायकों को बनाया महानायक


किशोर कुमार ने हिन्दी सिनेमा के तीन नायकों को महानायक का दर्जा दिलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है। उनकी आवाज़ के जादू से देव आनंद सदाबहार हीरो कहलाए। राजेश खन्ना को सुपर सितारा कहा जाने लगा और अमिताभ बच्चन महानायक हो गए।


मनोरंजन कर


किशोर कुमार ने बारह साल की उम्र तक गीत-संगीत में महारत हासिल कर ली थी। किशोर कुमार रेडियो पर गाने सुनकर उनकी धुन पर थिरकते थे। किशोर कुमार फ़िल्मी गानों की किताब जमा कर उन्हें कंठस्थ करके गाते थे। घर आने वाले मेहमानों को किशोर कुमार अभिनय सहित गाने सुनाते तो 'मनोरंजन-कर' के रूप में कुछ इनाम भी माँग लेते थे।


बाथरूम गायक


एक दिन अशोक कुमार के घर अचानक संगीतकार सचिन देव वर्मन पहुँच गए। बैठक में उन्होंने गाने की आवाज़ सुनी तो दादा मुनि से पूछा, 'कौन गा रहा है?' अशोक कुमार ने जवाब दिया- 'मेरा छोटा भाई है'। जब तक गाना नहीं गाता, उसका नहाना पूरा नहीं होता।' सचिन-दा ने बाद में किशोर कुमार को जीनियस गायक बना दिया।


दो बार आवाज़ उधार ली


मोहम्मद रफ़ी ने पहली बार किशोर कुमार को अपनी आवाज़ फ़िल्म 'रागिनी' में गीत 'मन मोरा बावरा' के लिए उधार दी। दूसरी बार शंकर-जयकिशन की फ़िल्म 'शरारत' में रफ़ी ने किशोर के लिए- 'अजब है दास्ताँ तेरी ये ज़िंदगी' गीत गाया।


महमूद से लिया बदला


महमूद ने फ़िल्म 'प्यार किए जा' में कॉमेडियन किशोर कुमार, शशि कपूर और ओमप्रकाश से ज़्यादा पैसे वसूले थे। किशोर को यह बात अखर गई। किशोर कुमार ने इसका बदला महमूद से फ़िल्म 'पड़ोसन' में दुगुना पैसा लेकर लिया।


खंडवे वाले की राम-राम


किशोर कुमार ने जब-जब स्टेज-शो किए, हमेशा हाथ जोड़कर सबसे पहले संबोधन करते थे- 'मेरे दादा-दादियों।' मेरे नाना-नानियों। मेरे भाई-बहनों, तुम सबको खंडवे वाले किशोर कुमार का राम-राम। नमस्कार।


हरफनमौला


किशोर कुमार का बचपन तो खंडवा में बीता, लेकिन जब वे किशोर हुए तो इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ने आए। हर सोमवार सुबह खंडवा से मीटरगेज की छुक-छुक रेलगाड़ी में इंदौर आते और शनिवार शाम लौट जाते। सफर में वे हर स्टेशन पर डिब्बा बदल लेते और मुसाफ़िरों को नए-नए गाने सुनाकर मनोरंजन करते थे।


खंडवा की दूध जलेबी


किशोर कुमार ज़िंदगीभर क़स्बाई चरित्र के भोले मानस बने रहे। मुंबई की भीड़-भाड़, पार्टियाँ और ग्लैमर के चेहरों में वे कभी शामिल नहीं हो पाए। इसलिए उनकी आख़िरी इच्छा थी कि खंडवा में ही उनका अंतिम संस्कार किया जाए। इस इच्छा को पूरा किया गया, वे कहा करते थे- 'फ़िल्मों से सन्न्यास लेने के बाद वे खंडवा में ही बस जाएँगे और रोजाना दूध-जलेबी खाएँगे।


मृत्यु
वर्ष 1987 में किशोर कुमार ने मुंबई की भागम-दौड़ वाली ज़िंदगी से उब कर यह फैसला किया कि वह फ़िल्मों से सन्न्यास लेने के बाद वापस अपने गाँव खंडवा जाकर रहेंगे। लेकिन उनका यह सपना भी अधूरा ही रह गया। 13 अक्टूबर 1987 को उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वह पूरी दुनिया से विदा हो गये।भले ही वो आज हमारे बीच नहीं है। लेकिन अपनी सुरमयी आवाज़ और बेहतरीन अदायकी से वो हमेशा हमारे बीच रहेंगे।


Kishore Kumar (4 August 1929 – 13 October 1987) was an Indian playback singer, actor, lyricist, composer, producer, director, and screenwriter. He is considered one of the most successful playback singers in the Hindi film industry.


Apart from Hindi, he sang in many Indian languages including Bengali, Marathi, Assamese, Gujarati, Kannada, Bhojpuri, Malayalam, Odia, and Urdu. He has also sung in private albums in several languages especially in Bengali which are noted as all time classics. He won 8 Filmfare Awards for Best Male Playback Singer and holds the record for winning the most Filmfare Awards in that category. He was awarded the "Lata Mangeshkar Award" by the Madhya Pradesh government in the year 1985-86. In the year 1997, the Madhya Pradesh Government initiated an award called the "Kishore Kumar Award" as a contribution to Hindi cinema. Recently, Kishore Kumar's unreleased last song was sold for Rs 15.6 lakh (1.56 million) at the Osian’s Cinefan Auction, New Delhi in 2012.


Kishore Kumar was born in a Bengali family in Khandwa, Central Provinces (now in Madhya Pradesh) as Abhas Kumar Ganguly. His father, Kunjalal Ganguly (Gangopadhyay) was a lawyer and his mother, Gouri Devi came from a wealthy Bengali family. Kunjalal Gangopadhyaya was invited by the Kamavisadar Gokhale family of Khandwa to be their personal lawyer. Kishore was the youngest of four siblings, the older three being Ashok (the eldest), Sati Devi, and Anoop. While Kishore was still a child, his brother Ashok became a Bollywood actor. Later, Anoop also ventured into cinema with Ashok's help. Spending time with his brothers, Kishore became interested in films and music. He became a fan of singer-actor K. L. Saigal—whom he considered his guru, and tried to emulate his singing style. He graduated from Christian College, Indore.


After Ashok Kumar became a star of Hindi films, the Ganguly family visited Mumbai regularly. Abhas Kumar changed his name to 'Kishore Kumar' and started his cinema career as a chorus singer at Bombay Talkies, where his brother worked. Kumar's first film appearance was in Shikari (1946), in which his brother, Ashok played the lead role. Music director Khemchand Prakash gave Kumar a chance to sing "Marne ki duayen kyon mangu" for the film Ziddi (1948). After this, Kumar was offered many other assignments, but he was not very serious about a film career. In 1949, he settled in Mumbai.[citation needed] Kumar played the hero in the Bombay Talkies film Andolan (1951), directed by Phani Majumdar. Although he got some acting assignments with the help of his brother, he was more interested in becoming a singer. But Ashok wanted Kumar to be an actor like him.


Kumar next starred in Bimal Roy's Naukri (1954) and Hrishikesh Mukherjee's directorial debut Musafir (1957). Salil Chowdhury, the music director for Naukri, was initially dismissive of Kumar as a singer when he found that Kumar had no formal training in music. However, after hearing his voice, Chowdhury gave him the song Chhota sa ghar hoga, which was supposed to be sung by Hemant Kumar. Kishore starred in the films New Delhi (1957), Aasha (1957), Chalti Ka Naam Gaadi (1958), Half Ticket (1962), Ganga Ki Lehren and Padosan (1968). Chalti Ka Naam Gaadi (1958), his home production, had the three Ganguly brothers and Madhubala in main roles. Kumar played a car mechanic who has a romance with a city girl (Madhubala) with a subplot involving the brothers.


In the movie Half Ticket, for one of the songs - Aake Seedhi Lagi Dil Pe - the music director Salil Chowdhary had a duet in mind and wanted Kishore Kumar and Lata Mangeshkar to sing the song. However, since Lata Mangeshkar was not in town and Salil Chowdhury had to record that song before she could return, Kishore Kumar solved the problem by singing both the male and female parts of the song himself. The duet is actually for Pran and Kishore Kumar on the screen dressed as a woman. It just turned out to be fine as he did admirably well singing both in male and female voices.


Music director S. D. Burman is credited with spotting Kumar's talent for singing. During the making of Mashaal (1950), Burman visited Ashok's house, where he heard Kumar imitating K. L. Saigal. He complimented him and told him that he should develop a style of his own, instead of copying Saigal. Kumar eventually developed his own style of singing, which featured yodeling, which he had heard on the records of Tex Morton and Jimmie Rodgers.


Burman recorded Kumar's voice for Dev Anand's Munimji (1954), Taxi Driver (1954), House No. 44 (1955), Funtoosh (1956), Nau Do Gyarah (1957), Paying Guest (1957), Guide (1965), Jewel Thief (1967), Prem Pujari (1970), and Tere Mere Sapne (1971). He also composed music for Kumar's home production Chalti Ka Naam Gaadi (1958). Some of their songs were; "Maana Janaab Ne Pukara Nahin" from Paying Guest, "Hum Hain Rahi Pyar Ke" from Nau Do Gyarah (1957), "Ai Meri Topi Palat Ke Aa" from Funtoosh, and "Ek Ladki Bheegi Bhaagi Si" and "Haal Kaisa Hai Janaab Ka" from Chalti Ka Naam Gaadi (1958).[10] Asha Bhosle and Kishore performed duets composed by Burman including "Chhod Do Aanchal" from Paying Guest (1957), "Ankhon Mein Kya Ji" from Nau Do Gyarah (1957), "Haal Kaisa Hai Janaab Ka" and "Paanch Rupaiya Baara Aana" from Chalti Ka Naam Gaadi (1958) and "Arre Yaar Meri Tum Bhi Ho Gajab" from Teen Deviyan (1965).


Music director C. Ramchandra also recognized Kumar's talent as a singer. They collaborated on songs including "Eena Meena Deeka" from Aasha (1957). Kishore Kumar's work includes "Nakhrewaali" from New Delhi (1956) by Shankar Jaikishan, "C.A.T. Cat Maane Billi" and "Hum To Mohabbat Karega" from Dilli Ka Thug (1958) by Ravi, and "Chhedo Na Meri Zulfein" from Ganga Ki Lahren (1964) by Chitragupta.


Kumar acted in and composed the music for Jhumroo (1961), and wrote the lyrics for the film's title song, "Main Hoon Jhumroo". Later, he produced and directed Door Gagan Ki Chhaon Mein (1964). He also wrote the script and composed music for the film, which is about the relationship between a father (Kishore Kumar) and his deaf and mute son (played by his real-life son (Amit Kumar).


In the 1960s, as an actor, Kishore Kumar built up a notoriety for coming late for the shootings or bunking them altogether. His films flopped frequently and he landed in income tax trouble. As a singer, his work in this period includes "Zaroorat Hai Zaroorat Hai" from Manmauji (1961), "Gaata Rahe Mera Dil" from Guide (1965), and "Yeh Dil Na Hota Bechara" from Jewel Thief (1967).


In the late 1960s, Rahul Dev Burman worked with Kishore Kumar on the soundtrack of the film Padosan (1968), in which Kumar sang "Mere Saamne Wali Khidki Mein" and "Kehna Hai." Padosan was a comedy featuring Kishore as a dramatist-musician, Mehmood as a Carnatic music and dance teacher, and Sunil Dutt as a simpleton named Bhola. Kishore's character was inspired by his uncle, Dhananjay Bannerjee, a classical singer. The highlight of the film was a musical, comical duel between Kishore Kumar, Sunil Dutt and Mehmood: "Ek Chatur Nar Karke Singaar."


In 1969, Shakti Samanta produced and directed Aradhana. He sang three songs in the film; "Mere Sapnon Ki Rani", "Kora Kagaj Tha Ye Man Mera" and "Roop Tera Mastana". Shakti Samanta suggested that Kumar sing the other songs too. When the film was released, Kumar's two songs established him as a leading Bollywood playback singer. Kishore Kumar won his first Filmfare award for "Roop Tera Mastana".



Kishore Kumar married four times. His first wife was Bengali singer and actress Ruma Guha Thakurta aka Ruma Ghosh. Their marriage lasted from 1950 to 1958. His second wife was actress Madhubala, who had worked with him in many films including his home production Chalti Ka Naam Gaadi (1958) and Jhumroo (1961). When Kumar proposed to her, Madhubala was ill and was planning to go to London for treatment. She had a ventricular septal defect (hole in the heart), and he was still married to Ruma. After his divorce, the couple had a civil wedding in 1960 and Kishore Kumar converted to Islam and reportedly changed his name to Karim Abdul. His parents refused to attend the ceremony. The couple also had a Hindu ceremony to please Kumar's parents, but Madhubala was never truly accepted as his wife. Within a month of their wedding she moved back to her bungalow in Bandra because of tension in the Kumar household. They remained married but under great strain for the remainder of Madhubala's life. Their marriage ended with Madhubala's death on 23 February 1969.


Kishore's third marriage was to Yogeeta Bali, and lasted from 1976 to 4 August 1978. Kishore was married to Leena Chandavarkar from 1980 until his death. He had two sons, Amit Kumar with Ruma, and Sumit Kumar with Leena Chandavarkar.


Kumar is said to have been paranoid about not being paid. During recordings, he would sing only after his secretary confirmed that the producer had made the payment. On one occasion, when he discovered that his dues had not been fully paid, he appeared on set with makeup on only one side of his face. When the director questioned him, he replied "Aadha paisa to aadha make-up." (Half make-up for half payment). On the sets of Bhai Bhai, Kishore Kumar refused to act because the director M V Raman owed him  5,000. Ashok Kumar persuaded him to do the scene but when the shooting started, Kishore walked a few paces and said, Paanch Hazaar Rupaiya (five thousand rupees) and did a somersault. After he reached the end of the floor, he left the studio. On another occasion, when producer R.C. Talwar did not pay his dues in spite of repeated reminders, Kumar arrived at Talwar's residence shouting "Hey Talwar, de de mere aath hazaar" ("Hey Talwar, give me my eight thousand") every morning until Talwar paid up.


The film Anand (1971) was originally supposed to star Kishore and Mehmood Ali in the lead. Hrishikesh Mukherjee, the director of the film, was asked to meet Kishore to discuss the project. However, when he went to Kumar's house he was driven away by the gatekeeper due to a misunderstanding. Kumar—himself a Bengali—had not been paid for a stage show organized by another Bengali man and had instructed his gatekeeper to drive away this "Bengali", if he ever visited the house. Consequently, Mehmood had to leave the film as well, and new actors (Rajesh Khanna and Amitabh Bachchan) were signed up for the film.


In spite of his "no money, no work" principle, sometimes Kumar recorded free even when the producers were willing to pay. Such films include those produced by Rajesh Khanna and Danny Denzongpa.[29] On one occasion, Kishore helped actor-turned-producer Bipin Gupta by giving him  20,000 for the film Dal Mein Kala (1964). When actor Arun Kumar Mukherjee—one of the first persons to appreciate Kishore's singing talent—died, Kumar regularly sent money to Mukherjee's family in Bhagalpur.


Many journalists and writers have written about Kishore Kumar's seemingly eccentric behavior. He placed a sign that said "Beware of Kishore" at the door of his Warden Road flat. Once, producer-director H. S. Rawail, who owed him some money, visited his flat to pay the dues. Kumar took the money and when Rawail offered to shake hands with him, reportedly Kishore put Rawail's hand in his mouth, bit it and asked "Didn’t you see the sign?". Rawail laughed off the incident and left quickly. According to another reported incident, once Kumar was due to record a song for producer-director G. P. Sippy. As Sippy approached his bungalow, he saw Kumar going out in his car. Sippy asked Kumar to stop his car but Kumar increased his speed. Sippy chased him to Madh Island where Kumar finally stopped his car near the ruined Madh Fort. When Sippy questioned his strange behavior, Kumar refused to recognize or talk to him and threatened to call the police. The next morning, Kumar reported for the recording session. An angry Sippy questioned him about his behaviour the previous day but Kumar said that Sippy must have dreamt the incident and said that he was in Khandwa on the previous day.


Once, a producer went to court to get a decree that Kumar must follow the director's orders. As a consequence, he obeyed the director to the letter. He refused to alight from his car until the director ordered him to do so. After filming a car scene in Mumbai, Kumar drove until he reached Khandala because the director forgot to say "Cut". In the 1960s, a financier named Kalidas Batvabbal, who was disgusted with Kumar's alleged lack of cooperation during the shooting of Half Ticket, reported to the income tax authorities, who raided his house. Later, Kumar invited Batvabbal to his home, asked him to enter a cupboard for a chat and locked him inside. He unlocked Batvabbal after two hours and told him, "Don’t ever come to my house again".


Kishore Kumar was a loner; in an interview with Pritish Nandy (1985) he said that he had no friends—he preferred talking to his trees instead. Once, when a reporter made a comment about how lonely he must be, Kishore Kumar took her to his garden, named some of the trees there and introduced them to the reporter as his closest friends.


Year Song Film Music director Lyricist


1970 "Roop Tera Mastana" Aradhana Sachin Dev Burman Anand Bakshi
1976 "Dil Aisa Kisi Ne Mera" Amanush Shyamal Mitra Indeevar
1979 "Khaike Paan Banaras Wala" Don Kalyanji Anandji Anjaan
1981 "Hazaar Raahen Mudke Dekheen" Thodisi Bewafaii Khayyam Gulzar
1983 "Pag Ghungroo Baandh" Namak Halaal Bappi Lahiri Anjaan
1984 "Agar Tum Na Hote" Agar Tum Na Hote Rahul Dev Burman Gulshan Bawra
1985 "Manzilein Apni Jagah Hain" Sharaabi Bappi Lahiri Prakash Mehra
1986 "Saagar Kinaare" Saagar Rahul Dev Burman Javed Akhtar
Nominated:


Year Song Film Music Director Lyricist
1971 "Zindagi Ek Safar" Andaz Shankar Jaikishan Hasrat Jaipuri
1971 "Yeh Jo Mohabbat Hai" Kati Patang Rahul Dev Burman Anand Bakshi
1972 "Chingari Koi Bhadke" Amar Prem Rahul Dev Burman Anand Bakshi
1973 "Mere Dil Mein Aaj" Daag: A Poem of Love Laxmikant-Pyarelal Sahir Ludhianvi
1974 "Gaadi Bula Rahi Hai" Dost Laxmikant-Pyarelal Anand Bakshi
1974 "Mera Jeevan Kora Kagaz" Kora Kagaz Kalyanji Anandji M.G.Hashmat
1975 "Main Pyaasa Tum" Faraar Kalyanji Anandji Rajendra Krishan
1975 "O Manjhi Re" Khushboo Rahul Dev Burman Gulzar
1977 "Aap Ke Anurodh" Anurodh Laxmikant-Pyarelal Anand Bakshi
1978 "O Saathi Re" Muqaddar Ka Sikandar Kalyanji Anandji Anjaan
1978 "Hum Bewafa Harghiz" Shalimar Rahul Dev Burman Anand Bakshi
1979 "Ek Rasta Hai Zindagi" Kaala Patthar Rajesh Roshan Sahir Ludhianvi
1980 "Om Shanti Om" Karz Laxmikant-Pyarelal Anand Bakshi
1981 "Hameh Tumse Pyar" Kudrat Rahul Dev Burman Majrooh Sultanpuri
1981 "Chhookar Mere Mann Ko" Yaraana Rajesh Roshan Anjaan
1983 "Shayad Meri Shaadi" Souten Usha Khanna Sawan Kumar Tak
1984 "De De Pyar De" Sharaabi Bappi Lahiri Anjaan
1984 "Inteha Ho Gayi" Sharaabi Bappi Lahiri Anjaan
1984 "Log Kehete Hai (Mujhe Naulakha Manga De)" Sharaabi Bappi Lahiri Anjaan