संजय गाँधी (मृत्यु: 23 जून, 1980)

June 23, 2017

संजय गाँधी (जन्म: 14 दिसम्बर, 1946; मृत्यु: 23 जून, 1980) एक भारतीय नेता थे। संजय गाँधी इंदिरा गाँधी के छोटे पुत्र थे। भारत में आपातकाल के समय उनकी भूमिका बहुत विवादास्पद रही। अल्पायु में ही एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मौत हो गयी। मेनका गाँधी संजय गाँधी की पत्नी और वरुण गांधी संजय गाँधी के पुत्र है।


जीवन परिचय
भारतीय राजनीति में संजय गाँधी का नाम एक ऐसे युवा नेता के रूप में दर्ज है जिसकी वजह से देश की राजनीति में कई बड़े परिवर्तन हुए। भारत की सबसे प्रभावी व्यक्तित्व वाली प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और फ़िरोज़ गाँधी के पुत्र संजय गाँधी को एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है जिसने भारत के लोकतंत्र को तानाशाही में बदल दिया था। अपनी तेज तर्रार शैली और दृढ निश्चयी सोच की वजह से देश की युवा की पसंद बने इस नेता के फैसलों के आगे कई बार तात्कालिक प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को भी पीछे हटने को मजबूर कर दिया। आलोचकों के निशाने पर रहने के बावजूद उनके कई फैसलों को आज तक सराहा जाता है। 14 दिसंबर 1946 को जन्मे संजय गाँधी ने 70 के दशक की भारतीय राजनीति में कई उदाहरण पेश किये जिसे आज तक याद किया जाता है।  


देश के सबसे बड़े राजनीतिक घराने नेहरू गाँधी परिवार में जन्मे संजय गाँधी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के छोटे भाई थे| कहा जाता है कि बचपन से ही अपने जिद्दी स्वाभाव की वजह से वह माता पिता के तमाम प्रयासों के वाबजूद पढाई में रुचि नहीं लेते थे। जिस वजह से संजय गाँधी को देश के मशहूर स्कूल दून कालेज छोड़ना पड़ा जबकि उनके बड़े भाई राजीव ने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई वहीं पूरी की थी। हर काम को अपने अंदाज में करने के आदी संजय गाँधी ने व्यक्तिगत जीवन के साथ साथ देश का भविष्य तय करने वाले कुछ ऐसे फैसले लिए जिनकी वजह से देश को विषम परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो 1975 के आपातकाल में संजय गाँधी ही ऐसी ताकत साबित हुए थे जिसने राष्ट्रीय कांग्रेस के अस्तित्व को बचने की हिम्मत दिखाई थी। 19 माह के आपातकाल से उभरने के बाद वर्ष 1977 के चुनाव में भले ही कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उसके बाद संजय गाँधी और इंदिरा गाँधी को गिरफ्तार कर जेल भेजने की तैयारियां भी की गई। हालाँकि तात्कालिक सरकार ज्यादा दिनों तक सत्ता सुख नहीं भोग सकी और वर्ष 1979 के चुनाव ने कांग्रेस की सत्ता में वापसी करवा दी।
आजाद भारत के इतिहास में संजय गांधी इकलौते ऐसे राजनेता हैं जिनके व्यक्तित्व और क्रियाकलापों के बारे में जानने की जिज्ञासा भारतीय जनमानस में अब भी है, लेकिन उनके बारे में ज्यादा लिखित सामग्री उपलब्ध नहीं है, लिहाजा उनके बारे में सबसे ज्यादा किवदंतियां सुनी जाती रही हैं। संजय गांधी खुद कहा करते थे कि उनकी रैलियों के दौरान किसी को भी पैसे देकर रैली में नहीं लाया जाता है बल्कि ये लोगों की मेरे बारे में जानने और मुझको देखने की जिज्ञासा से मेरी रैली में खिंचे चले आते हैं। आपातकाल के दौरान संजय गांधी के तानाशाही रवैये को लेकर काफ़ी कुछ लिखा गया है, उनके दोस्तों और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ज्यादतियों के बारे में भी सैकड़ों लेख लिखे गए, किताबें भी आईं। इस बात की भी काफ़ी चर्चा हुई कि संजय गांधी की महात्वाकांक्षा इंदिरा गांधी को लगातार कमज़ोर करती रही। संजय गांधी को भारत में कई लोकतांत्रिक संस्थाओं को खत्म करने या कमज़ोर करने का भी जिम्मेदार माना जाता है। आपातकाल, उस दौरान सरकारी कामकाज, इंदिरा गांधी के दांव पेंच आदि के बारे में राजनीतिक टिप्पणीकार इतने उलझ गए कि संजय गांधी की जीवनी या उनपर कोई मुक्कमल किताब लिखने के बारे में सोचा ही नहीं गया। अगर सोचा गया होता तो संजय गांधी पर लिखने के लिए बेहद श्रम करना होता क्योंकि उनके व्यक्तित्व के कई पहलू हैं और विश्लेषण के अनेक विंदु। संजय गांधी को भगवान ने बहुत छोटी सी उम्र दी लेकिन उस छोटी उम्र में ही संजय ने देश को हिलाकर रख दिया था।


अब तक संजय गांधी की एकमात्र जीवनी लिखी गई है जिसका नाम है –द संजय स्टोरी- और उसके लेखक हैं – वरिष्ठ पत्रकार विनोद मेहता। यह जीवनी भी ना तो प्रामाणिक होने का दावा करती है और ना ही आधिकारिक। संजय गांधी की जीवनी में विनोद मेहता ने बेहद वस्तुनिष्ठता के साथ संजय गांधी के बहाने उस दौर को भी परिभाषित किया है। आपातकाल की ज्यादतियों के अलावा मारुति कार प्रोजेकट के घपलों पर तो विस्तार से लिखा है लेकिन साथ ही आपातकाल हटने पर सरकारी कामकाज में ढिलाई पर भी अपने चुटीले अंदाज में वार किया है। वो लिखते हैं- जिस दिन 21 मार्च को आपातकाल हटाई गई उस दिन राजधानी एक्सप्रेस चार घंटे की देरी से पहुंची। कानपुर में एल आई सी के कर्मचारियों ने लंच टाइम में मोर्चा निकाला, दिल्ली के प्रेस क्लब में मुक्केबाजी हुई, कलकत्ता में दो फैमिली प्लानिंग वैन जलाई गई, मुम्बई के शाम के अखबारों में डांस क्लासेस के विज्ञापन छपे, तस्करी कर लाई जाने वाली व्हिस्की की कीमत दस रुपए कम हो गई। देश में हालात सामान्य हो गए। व्यगंयात्मक शैली में ये कहते हुए विनोद आपातकाल के दौर में इन हालातों के ठीक होने की तस्दीक करते हैं।
विनोद मेहता की किताबों में कई तथ्य पुराने हैं- जैसे दून स्कूल में ही संजय को कमलनाथ जैसा दोस्त मिला जो लगातार दो साल तक फेल हो चुका था। स्कूल से वापस आने के बाद संजय गांधी की दोस्तों के साथ मस्ती काफ़ी बढ़ गई थी और विनोद मेहता ने बिल्कुल फिक्शन के अंदाज में उसको लिखा है जिसकी वजह से रोचकता अपने चरम पर पहुंच जाती है। संजय गांधी की इस किताब में जो सबसे दिलचस्प अध्याय है वो है मारुति कार के बारे में देखे गए संजय के सपने के बारे में। मारुति- सन ऑफ द विंड गॉड में विनोद मेहता ने संजय गांधी की किसी भी कीमत पर अपनी मन की करने, किसी भी कीमत पर अपनी चाहत को हासिल करने की, उस हासिल करने के बीच में रोड़े अटकाने वाले को हाशिए पर पहुंचा देने की मनोवृत्ति का साफ तौर पर चित्रण किया है। संजय गांधी की बचपन से मशीनों और उपकरणों में ख़ास रुचि थी जिसे देखकर नेहरू जी कहा करते थे कि उनका नाती एक बेहतरीन इंजीनियर बनेगा।


भारतीय राजनीति में तेज़ी से उभरे संजय गाँधी 23 जून 1980 को एक हवाई दुर्घटना शिकार हो गए।


Sanjay Gandhi (14 December 1946 – 23 June 1980) was an Indian politician. He was a family member of the Nehru-Gandhi dynasty. During his lifetime he was widely expected to succeed his mother, Indira Gandhi as head of the Indian National Congress, but following his early death in a plane crash his elder brother Rajiv became their mother's political heir, and succeeded her as Prime Minister of India after her death. Sanjay's widow Maneka Gandhi and son Varun Gandhi are leading politicians in the BJP.


Sanjay was born in New Delhi, on 14 December 1946, as the younger son of Indira Gandhi and Feroze Gandhi. Like his elder brother Rajiv Gandhi, Sanjay studied first at Welham Boys' School and then at the Doon School in Dehra Dun. Sanjay did not attend university, but took up automotive engineering as a career and underwent an apprenticeship with Rolls-Royce in Crewe, England for three years. He was very interested in sports cars, and also obtained a pilot's licence in 1976.He was interested in aircraft acrobatics and won several prizes in that sport.His elder brother Rajiv Gandhi was however a Captain in Indian Airlines flying the Boeing 737-200ADV aircraft. Sanjay was also close to his mother.


In 1974, the opposition-led protests and strikes had caused a widespread disturbance in many parts of the country and badly affected the government and the economy. On 25 June 1975 following an adverse court decision against her, Indira Gandhi declared a national emergency, delayed elections, censored the press and suspended some constitutional freedoms in the name of national security. Non-Congress governments throughout the country were dismissed. Thousands of people, including several freedom fighters like Jaya Prakash Narayan and Jivatram Kripalani who were against the Emergency were arrested.


In the extremely hostile political environment just before and soon after the Emergency, Sanjay Gandhi rose in importance as Indira's adviser. With the defections of former loyalists, Sanjay's influence with Indira and the government increased dramatically, although he was never in an official or elected position. According to Mark Tully, "His inexperience did not stop him from using the Draconian powers his mother, Indira Gandhi, had taken to terrorise the administration, setting up what was in effect a police state."


It was said that during the Emergency, he virtually ran India along with his friends, especially Bansi Lal.It was also quipped that Sanjay Gandhi had total control over his mother and that the government was run by the PMH (Prime Minister House) rather than the PMO (Prime Minister Office).He "recruited into the party thousands of younger people, many of them hooligans and ruffians, who used threats and force to intimidate rivals and those who opposed Mrs Gandhi's authority or his own."


During the emergency, Indira Gandhi declared a 20-point economic programme for development. Sanjay also declared his own much shorter five points program promoting


Literacy
Family planning
Tree Planting
Eradication of Casteism
Abolition of dowry
Later during the emergency Sanjay's programme was merged with Indira's 20-point programme to make a combined twenty-five point programme.[14]


Out of the five points, Sanjay is now chiefly remembered for the family planning initiative that attracted much notoriety and caused longterm harm to population control in India.


Sanjay Gandhi escaped an assassination attempt in March 1977. Unknown gunmen fired at his car about 300 miles south-east of New Delhi during his election campaign.