गुरु हनुमान (मृत्यु: 24 मई, 1999)

May 24, 2017

गुरु हनुमान (अंग्रेज़ी: Guru Hanuman, जन्म: 15 मार्च, 1901 - मृत्यु: 24 मई, 1999) भारत के महान कुश्ती प्रशिक्षक (कोच) थे। वे स्वयं भी महान पहलवान थे उन्‍होंने सम्‍पूर्ण विश्‍व में भारतीय कुश्‍ती को महत्त्वपूर्ण स्‍थान दिलाया। उनकी कुश्‍ती के क्षेत्र विशेष में उपलब्धियों के कारण इन्हें सन 1988 में द्रोणाचार्य पुरस्कार और सन 1983 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।


जीवन परिचय
गुरु हनुमान का जन्म राजस्थान के झुंझुनू ज़िला के चिड़ावा तहसील में 1901 में हुआ था। गुरु हनुमान का बचपन का नाम विजय पाल था। बचपन में कमज़ोर सेहत का होने के कारण अक्सर ताकतवर लड़के इन्हें तंग करते थे। इसलिए उन्होंने सेहत बनाने के लिए बचपन में ही पहलवानी को अपना लिया था। कुश्ती के प्रति अपने आगाध प्रेम के चलते इन्होंने 20 साल की उम्र में दिल्ली की और प्रस्थान किया। भारतीय मल्लयुद्ध के भगवान हनुमान से प्ररित होकर इन्होंने अपना नाम हनुमान रख लिया और ताउम्र ब्रह्मचारी रहने का प्रण कर लिया। उनके अनुसार उनकी शादी तो कुश्ती से ही हुई थी। ये बात कोई अतिश्योक्ति भी नहीं थी क्योंकि जितने पहलवान उनके सान्निध्य में आगे निकले है शायद किसी और गुरु को इतना सम्मान मिल पाया है। कुश्ती के प्रति उनके प्रेम के चलते मशहूर भारतीय उद्योगपति के.के बिरला ने उन्हें दिल्ली में अखाडा चलने के लिए ज़मीन दान में दे दी थी। सन 1940 में वो आजादी की लड़ाई में शामिल हो गये। 1947 में भारत विभाजन के समय पाकिस्तान से शरणार्थियों की उन्होंने खूब सेवा की। 1947 के बाद हनुमान अखाडा दिल्ली पहलवानों का मंदिर हो गया। 1980 में इनको पद्मश्री से सम्मानित किया गया।


गुरु हनुमान एक गुरु ही नहीं बल्कि अपने शिष्यों के लिए पिता तुल्य थे। कुश्ती का जितना सूक्ष्म ज्ञान उन्हें था शायद ही किसी को हो! गुरु हनुमान ने जब ये देखा की उनके पहलवानों को बुढ़ापे में आर्थिक तंगी होती है तो उन्होंने सरकार से पहलवानों के लिए रोज़गार के लिए सिफारिश की परिणामस्वरुप आज बहुत से राष्ट्रीय प्रतियोगिता जीतने वाले पहलवानों को भारतीय रेलवे में हाथों हाथ लिया जाता है। इस तरह उन्होंने हमेशा अपने शिष्यों की सहायता अपने बच्चो के समान की। उनका रहन सहन बिल्कुल गाँव वालों की तरह ही था। उन्होंने अपने जीवन के तमाम वर्ष एक धोती कुरते में ही गुजर दिए। भारतीय स्टाइल की कुश्ती के वे माहिर थे, उन्होंने भारतीय स्टाइल और अंतर्राष्ट्रीय स्टाइल का मेल कराकर अनेक एशियाई चैम्पियन दिए। पहलवानों को कुश्ती की गुर सिखाने के लिए उनकी लाठी कुश्ती जगत में मशहूर थी जिसके प्रहार से उन्होंने महाबली सतपाल, करतार सिंह, 1972 के ओलम्पियन प्रेमनाथ, सैफ विजेता वीरेंदर ठाकरान (धीरज पहलवान), सुभाष पहलवान, हंसराम पहलवान जैसे अनगिनत पहलवान कुश्ती की मिसाल बने। ये उनकी लाठी का ही कमाल था जो अखाड़े के पहलवानों को 3 बजे ही कसरत करने के लिए जगा देता था। उनके अखाड़े में रहकर खिलाड़ी केवल पहलवानी ही नहीं बल्कि ब्रह्मचारी, आत्मनिर्भर और शाकाहार की ताकत सीखते थे। अपने यहाँ आने वालो को भी वो चाय के स्थान पर बादाम की लस्सी पिलाते थे। उनके शिष्य महाबली सतपाल छत्रसाल स्टेडियम में पहलवानों को अत्याधुनिक तरीके से मैट पर प्रशिक्षण देते है जिसके परिणामस्वरूप पहलवान सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त एवं नरसिंह यादव जैसे पहलवान राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रहे है। गुरु के रूप में उनका योगदान यादगार है, कुश्ती के प्रति अपने प्रेम के चलते वो जीवन भर प्रात: 3 बजे ही उठ जाते थे। वे कुँवारे थे और उन्होंने ब्रह्मचर्य व्रत लिया था। वे 24 मई, 1999 को कार दुर्घटना में हरिद्वार में उनकी मृत्यु हो गयी।


सम्मान और पुरस्कार
कुश्ती के प्रति उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें सन 1988 में "द्रोणाचार्य पुरस्कार" से सम्मानित किया गया। उनके तीन चेले सुदेश कुमार, प्रेम नाथ, वेदप्रकाश ने 1972 कार्डिफ़ कॉमनवेल्थ खेल में स्वर्ण पदक जीता था। सतपाल पहलवान और करतार सिंह ने 1982 और 1986 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। उनके 8 चेलों ने भारत का खेल सम्मान अर्जुन पुरस्कार जीता है।


Guru Hanuman (1901–1999) was a legendary wrestling coach of India who coached many medal-winning wrestlers. He was awarded the prestigious Dronacharya Award in 1987, the highest recognition for a sports coach in India, and the Padma Shri in 1983.


Guru was born as Vijay Pal on 15 March 1901, in the Chirawa town of Rajasthan state. He did not attend school, but began wrestling at the local village akhada from an early age. He moved to Delhi in 1919 to set up a shop near Birla Mills in Subzi Mundi, but instead became a wrestler and soon gained popularity in the field.


The Indian industrialist K. K. Birla gave him land to set up Akhara in Malkaganj, Subzi Mandi (Old Delhi), thus 'Birla Mills Vyayamshala' was born around 1925 which is being managed by Birla Mills, Kamla Nagar, Delhi, which subsequently known as the Guru Hanuman Akhara.


Both as a wrestler and as a coach, Guru Hanuman was a legend as he created a template for modern Indian wrestling, by mixing traditional Indian wrestling style, pehlwani with international wrestling standards. In time he coached almost all of India's freestyle international wrestlers. Three of his disciples Sudesh Kumar, Prem Nath and won gold medals at the Cardiff Commonwealth Games in 1958. Other notable disciples, Satpal and Kartar Singh won gold medals in Asian Games in 1982 and 1986 respectively. Eight of his disciples got the highest Indian sporting honour Arjuna award.


He was a bachelor and vegetarian. He died in a car crash on 24 May 1999, near Meerut, on his way to Haridwar.


On 9 August 2003, a statue of Guru Hanuman was unveiled at the Kalyan Vihar Sports Stadium, in New Delhi, by former Delhi Chief Minister, Madan Lal Khurana,
Guru Hanuman Akhara is a wrestlers training centre or akhara in traditional Hindi dialect. Established in 1925 at Shakti Nagar, near Roshanara Bagh in North Delhi and it soon became the epicentre of Indian wrestling. Situated in the Old Delhi region, this akhara is said to have produced some of the brightest Indian wrestlers like, Dara Singh, Guru Satpal, Hans Ram (Post India Best Wrestler) Uddal Singh (national champion and multiple time Haryana state champion ) Subhash Verma, Virender Singh, Sushil Kumar, Yogendra Kumar, Vishal Trikha, Anuj Chowdhary, Rajiv Tomer, Anil Mann, Sujit Mann, Naveen, and Rakesh Goonga. It is the oldest extant wrestling school in India.


The young wrestlers training there have an unshakeable belief that the land is blessed. So much that even when the government offered to provide a larger land with better training facilities, most of the wrestlers refused to shift out of the dilapidated buildings. However, due to lack of space, a modern gymnasium was built by the government at some distance from the akhara which is used by the trainees. The akhara is named after Guru Hanuman and currently trains about 200 wrestlers under the guidance of Maha Singh Rao.


In 2014, the wrestling academy was chosen for the 2014 Rashtritya Khel Protsahan Puraskar (RKPP) by Government of India.