अरुणा रॉय (जन्म- 26 मई, 1946)

May 26, 2017

अरुणा रॉय (जन्म- 26 मई, 1946, चेन्नई) भारत की उन महिलाओं में से एक हैं, जो बेहतर सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ-साथ राजनीति में भी सक्रिय रूप से क्रियाशील हैं। इन्हें राजस्थान के गरीब लोगों के जीवन को सुधारने और इस दिशा में किये गए उनके प्रयासों के लिए विशेष तौर पर जाना जाता है। भारत में सूचना का अधिकार लागू करने के लिए उनके द्वारा किये गए प्रयत्न और योगदान प्रशंसनीय हैं। अरुणा रॉय राजस्थान के राजसमंद ज़िले में स्थित देवडूंगरी ग्राम से सम्पूर्ण भारत में संचालित 'मज़दूर किसान शक्ति संगठन' की संस्थापिका और अध्यक्ष हैं।


समाज सेवा
26 मई, 1946 को अरुणा रॉय का जन्म मद्रास (वर्तमान चेन्नई) में हुआ था। वे 'भारतीय प्रशासनिक सेवा' (आई.ए.एस.) के लिए चुनी गईं थीं। 1968 से 1973 तक इस प्रतिष्ठित सेवा के बाद इन्होंने सामाजिक कार्यों के हित में यह पद त्याग दिया। अरुणा रॉय ने सामाजिक सेवा का काम तिलोनिया, राजस्थान स्थित 'सोशल वर्क एण्ड रिसर्च सेंटर' से शुरू किया। यह संस्थान उनके पति संजीव बंकर राय द्वारा स्थापित किया गया था।


संगठन की स्थापना


1983 में उनका अपने पति से अलगाव हुआ और वह 1987 में राजस्थान के राजसमंद ज़िले के देवडूंगरी गाँव आ गईं। वहाँ काम करते हुए 1990 में 'मज़दूर किसान शक्ति संगठन' की स्थापना की। यह एक गैर राजनीतिक जन-संगठन माना गया। इस संगठन के लिए काम करते हुए अरुणा रॉय ने स्त्रियों तथा मज़दूर-किसानों को संगठित करके उन्हें जागरूकता का पाठ पढ़ाया।


पुरस्कार
सन 2000 में अरुणा रॉय को 'सामुदायिक नेतृत्व' की श्रेणी में 'मेग्सेसे पुरस्कार' और 'मेवाड़ सेवाश्री' आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार देते हुए इनके उस प्रयास को विशेष रूप से पहचाना गया, जिसके ज़रिये इन्होंने स्त्रियों तथा मज़दूर किसानों को उनके सूचना पाने के अधिकार की व्यापक जानकारी दी थी। अरुणा रॉय ने पुरस्कार से प्राप्त राशि को एक ट्रस्ट को सौंप दिया था, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों के पक्ष में संघर्ष को बल मिले।


Aruna Roy (born 26 May 1946) is an Indian political and social activist who founded the Mazdoor Kisan Shakti Sangathan (MKSS) ("Workers and Peasants Strength Union") along with Shankar Singh, Nikhil Dey and many others. Known for her work for the vulnerable sections of society, she was also a member of the NAC, national advisory committee which was set up by the then UPA-1 government which was headed by Sonia Gandhi through most of its tenure.



Roy was born in Chennai.[She grew up in Delhi where her father was a government employee. She studied English literature at Indraprastha College, Delhi University.


She served as a civil servant in the Indian Administrative Service between 1968 and 1974.
Roy resigned from the political service and began to work on issues related to the poor and marginalised. She joined the Social Work and Research Center (SWRC) in Tilonia, Rajasthan.In 1987, she along with Nikhil Dey, Shankar Singh and others founded the Mazdoor Kisan Shakti Sangathan.


The MKSS began by fighting for fair and equal wages for workers which shaped and evolved into a struggle for the enactment of India's Right to Information Act. Aruna Roy is a leader of the Right to Information movement in India through the MKSS and the National Campaign for People’s Right to Information (NCPRI), which was finally successful with the passage of the Right to Information Act in 2005.



Aruna Roy has been at the forefront of a number of campaigns for the rights of the poor and the marginalised. These have included, most prominently, the Right to Information, the Right to Work (the NREGA), and the Right to Food. More recently, she has been involved with the campaign for universal, non-contributory pension for unorganised sector workers as a member of the Pension Parishad[10][11] and the NCPRI for the passage and enactment of the Whistleblower Protection Law and Grievance Redress Act.


She served as a member of the National Advisory Council until 2006 when she resigned.


In 2000, she received the Ramon Magsaysay Award for Community Leadership. In 2010 she received the Lal Bahadur Shastri National Award for Excellence in Public Administration, Academia and Management. In 2011, she was named as one of the hundred most influential people in the world by Time magazine. In September 2017 India Times listed Roy as one of the 11 Human Rights Activists Whose Life Mission Is To Provide Others With A Dignified Life.