एन. टी. रामाराव (जन्म- 28 मई 1923)

May 28, 2017

एन. टी. रामाराव या नन्दमूरि तारक रामाराव (जन्म- 28 मई 1923 निम्माकुरु, मद्रास प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत; मृत्यु- 18 जनवरी 1996, हैदराबाद, आंध्र प्रदेश) तेलुगु फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता, निर्देशक और निर्माता थे। वे अभिनेता के साथ ही एक अच्छे राजनेता भी थे। एनटीआर के उपनाम से प्रसिद्ध रामाराव ने तेलुगु देशम पार्टी की स्थापना की और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। राजनीति में आने से पहले वे तेलुगु फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता थे। उन्होंने हिन्दू देवताओं जैसे कृष्ण और राम के जीवन से सम्बंधित बहुत-सी फ़िल्मों में काम किया और दर्शकों के चहेते बन गए। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए, वे भारत सरकार के द्वारा सन 1968 में पद्म श्री से सम्मानित किए गये।


परिचय
एन. टी. रामाराव का जन्म 28 मई 1923 को मद्रास प्रेसीडेंसी के कृष्ण ज़िले के एक छोटे से ग्राम निम्माकुरु में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गाँव के ही एक शिक्षक सुब्बाराव से ग्रहण की। उनके माता-पिता ने बचपन में ही उन्हें उनके मामा को गोद दे दिया था। गांव में अच्छी शिक्षा का प्रबंध नहीं था, इसलिए वे अपने गांव में महज पांचवीं कक्षा तक ही पढ़ाई कर पाए। इसके पश्चात वह अपने दत्तक माता-पिता के साथ विजयवाड़ा चले गए जहाँ उन्होंने नगर निगम के विद्यालय में दाखिला लिया। उन्होंने सन 1940 में दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की और उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए विजयवाड़ा के एस. आर. आर. और सी. वी. आर. कॉलेज में दाखिला लिया। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए पढ़ाई के दौरान रामाराव अपने परिवार की मदद करने के लिए विजयवाड़ा के स्थानीय होटलों में दूध वितरण का कार्य करते थे। वर्ष 1945 में उन्होंने स्नातक की पढ़ाई के लिए आन्ध्र-क्रिश्चियन कॉलेज में दाखिला लिया। सन 1942 में उन्होंने अपने मामा की बेटी के साथ विवाह किया।


एन. टी. रामाराव का सन 1942 में उनके मामा की बेटी बासव तारकम से विवाह हुआ, जिनसे उनके आठ बेटे और चार बेटियां हुईं। वर्ष 1985 में उनकी पत्नी बासव तारकम का देहांत हो गया। 1993 में सत्तर साल की उम्र में रामाराव ने लक्ष्मी पार्वती से पुनः विवाह किया, जो एक तेलुगु लेखक थीं। लेकिन एन.टी.आर. के परिवार ने लक्ष्मी को कभी भी स्वीकार नहीं किया।


एन.टी. रामाराव ने अपने फ़िल्मी कॅरियर की शुरुआत 1949 में 'मना देसम' नामक तेलुगु फ़िल्म से की थी, जिसमें उन्होंने पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभाई थी। इसके बाद उन्होंने एक अंग्रेज़ी नाटक 'पिजारो' पर आधारित और बी. ए. सुब्बाराव द्वारा निर्देशित फ़िल्म ‘पल्लेतुरी पिल्ला’ में अभिनय किया। इस फ़िल्म ने जबरदस्त सफलता हासिल की। इस फ़िल्म के बाद रामाराव एक लोकप्रिय अभिनेता बन गए। अपनी पहली पौराणिक फ़िल्म ‘माया बाज़ार’ में उन्होंने हिन्दू देवता कृष्ण का चरित्र निभाया था। यह फ़िल्म भी बहुत कामयाब हुई, जिसके बाद एन. टी. रामाराव ने अधिकांशत: हिंदू देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित फ़िल्में की।


उन्होंने भगवान राम, कृष्ण, भीष्म, अर्जुन, कर्ण, दुर्योधन, विष्णु, शिव आदि के किरदार निभाए। उन्होंने 17 फ़िल्मों में कृष्ण का चरित्र निभाया था, जिनमें प्रमुख फ़िल्में इस प्रकार हैं- ‘श्री कृष्णार्जुन युधम’, ‘कर्ण’ और ‘दानवीर सूर कर्ण’। कुछ समय बाद रामाराव ने पौराणिक फ़िल्मों को छोड़ ऐसे किरदारों को निभाया जो स्थापित व्यवस्था के ख़िलाफ़ लड़ता है। ये फ़िल्में आम आदमी के बीच बहुत लोकप्रिय हुईं। इनमें प्रमुख इस प्रकार हैं- ‘देवुदु चेसिना मनुशुलु’, ‘अदावी रामुडु’, ‘ड्राईवर रामुडु’, ‘वेतागादु’, ‘सरदार पापा रायुडु’, ‘जस्टिस चौधरी’ इत्यादि।


लेखक व निर्माता
एन. टी. रामाराव ने फ़िल्मों में पटकथा लेखन भी किया है। उन्होंने फ़िल्म निर्माता के तौर पर कई फ़िल्में भी बनायीं और राजनीति में प्रवेश के बाद भी फ़िल्मों में कार्य करते रहे। उनकी प्रतिभा और फ़िल्म जगत में योगदान के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए उनके नाम पर एन.टी.आर. नेशनल अवॉर्ड दिया जाता है।


प्रमुख फ़िल्में
क्रम संख्या फ़िल्म का नाम क्रम संख्या फ़िल्म का नाम
1. मना देसम 2. पल्लेतुरी पिल्ला
3. कर्ण 4. दानवीर सूर कर्ण
5. अदावी रामुडु 6. ड्राईवर रामुडु
7. सरदार पापा रायुडु 8. जस्टिस चौधरी
9. श्री कृष्णार्जुन युधम 10. देवुदु चेसिना मनुशुलु
11. वेतागादु 12. पाताल भैरवी

एन. टी. रामाराव ने सन 1982 में आंध्र प्रदेश को कांग्रेस के राज और आधिपत्य से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से तेलुगु देशम पार्टी की स्थापना कर राजनीति में प्रवेश किया। जब उन्होंने राजनैतिक जीवन आरम्भ किया तब वे तेलुगु सिनेमा के सफल और लोकप्रिय अभिनेता थे। चुनावों में उनकी पार्टी को जबरदस्त सफलता मिली। 9 जनवरी 1983 को वे दस कैबिनेट मंत्रिओं और पांच राज्य मंत्रिओं के साथ आंध्र प्रदेश के दसवें मुख्यमंत्री बने। 1983 से 1994 के बीच वह तीन बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। अपने पहले कार्यकाल के दौरान रामाराव ने जन मानस को एकत्र करना शुरू किया और महिलाओं और समाज के अन्य पिछड़े वर्गों को मुख्य धारा में लाने का कार्य किया। अगस्त 1984 में आन्ध्र प्रदेश के राज्यपाल रामलाल ने उन्हें हटाकर भास्कर राव को मुख्यमंत्री बना दिया पर भारी विरोध प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री ने राज्यपाल रामलाल को हटाकर शंकर दयाल शर्मा को नया राज्यपाल नियुक्त किया जिन्होंने रामाराव को सितम्बर 1984 में फिर से मुख्यमंत्री बनाया।


एन.टी. रामाराव इतने लोकप्रिय थे, कि इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद जब पूरे देश में कांग्रेस की लहर थी तब बस आंध्र प्रदेश में कांग्रेस नहीं जीत पाई। इतना ही नहीं तेलुगु देशम लोक सभा में मुख्य विपक्षी दल भी बन गया। वर्ष 1989 के चुनाव में विरोधी लहर के कारण तेलुगु देशम पार्टी चुनाव हार गयी और कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में वापस आ गयी। सन 1994 में एन. टी. रामाराव दोबारा सत्ता में लौटे। उनकी तेलुगु देशम पार्टी की 226 सीटों पर विजय हुई। इस बार ये महज 9 महीने के लिए ही मुख्यमंत्री पद रह पाए क्योंकि उनके दामाद चंद्रबाबू नायडू ने पार्टी के अन्दर भीतरघात कर रामाराव को पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद से हटा दिया।


Nandamuri Taraka Rama Rao (28 May 1923 – 18 January 1996), popularly known as NTR, was an Indian actor, producer, director, editor and politician who served as Chief Minister of Andhra Pradesh for seven years over three terms. NTR received three National Film Awards for co-producing Thodu Dongalu (1954) and Seetharama Kalyanam (1960) under National Art Theater, Madras, and directing Varakatnam (1970), NTR has received the erstwhile Rashtrapati Awards for his performance(s) in the films Raju Peda (1954) and Lava Kusa (1963).He garnered the Nandi Award for Best Actor for Kodalu Diddina Kapuram in 1970, and the Inaugural Filmfare Award for Best Actor – Telugu in 1972 for Badi Panthulu.


NTR made his debut as an actor in a Telugu social film Mana Desam, directed by L. V. Prasad in 1949. He gained popularity in the 1950s when he became well known for his portrayals of Hindu deities, especially Krishna and Rama,roles which have made him a "messiah of the masses". He later became known for portraying antagonistic characters and Robin Hood-esque hero characters in films. In total, he starred in 300 films, and has become one of the most prominent figures in the history of Telugu cinema.He was voted "Greatest Indian Actor of All Time" in a CNN-IBN national poll conducted in 2013 on the occasion of the Centenary of Indian Cinema.


He starred in such films as Patala Bhairavi (1951), which premiered at the first India International Film Festival, held in Mumbai on 24 January 1952,Malliswari (1951), premiered at Asia Pacific Film Festival, the enduring classics Mayabazar (1957) and Nartanasala (1963), featured at Afro Asian film festival in Jakarta.All the four films were included in CNN-IBN's list of "Hundred greatest Indian films of all time".


He co-produced Ummadi Kutumbam, nominated by Film Federation of India as one of its entries to the 1968 Moscow Film Festival.Besides Telugu, he has also acted in a few Tamil films.Widely recognised for his portrayal of mythological characters, NTR was one of the leading method actors of Indian cinema,[9] He was referred to in the media as Viswa Vikhyatha Nata Sarvabhouma. He was awarded the Padma Shri by the Government of India in 1968, recognizing his contribution to Indian cinema.


After his career in films, NTR entered politics. He founded the Telugu Desam Party (TDP) in 1982 and served three tumultuous terms as Chief Minister of Andhra Pradesh between 1983 and 1995. He was known as an advocate of Andhra Pradesh's distinct cultural identity, distinguishing it from the erstwhile Madras State with which it was often associated. At the national level, he was instrumental in the formation of the National Front, a coalition of non-Congress parties which governed India from 1989 until 1990.


N. T. Rama rao (NTR) was born on 28 May 1923[1] in Nimmakuru, a small village in Gudivada taluk of Krishna District, which was a part of the erstwhile Madras Presidency of British India. He was born to a farming couple, Nandamuri Lakshmaih and Venkata Ramamma, but was given in adoption to his paternal uncle. He attended school at first in his village, and later in Vijayawada. After his matriculation in 1940, he studied at SRR & CVR college in Vijayawada and at the Andhra-Christian College in Guntur. In 1947, he joined the Madras Service Commission as a sub-registrar at Prathipadu of Guntur District, a much-coveted job that he nevertheless quit within three weeks to devote himself to acting.He developed a baritone singing voice as a young man.


NTR started his film career with a walk-on role as a policeman in Mana Desam (1949).[9] Following this, he appeared in Palletoori Pilla, directed by B. A. Subba Rao.His first mythological film was in 1957, where he portrayed Krishna in the blockbuster film Maya Bazaar.He essayed the role of Krishna in 17 films,[30] including some landmark films such as Sri Krishnarjuna Yudham (1962), the Tamil film Karnan (1964) and Daana Veera Soora Karna (1977). He was also Known for his portrayal of Lord Rama, essaying that role in films such as Lava Kusha (1963) and Shri Ramanjaneya Yuddham (1974) to name a few. He has also portrayed other characters from the Ramayana, such as Ravana in Bhookailas (1958) and Seetharama Kalyanam (1961) among others. He portrayed Lord Vishnu in films such as Sri Venkateswara Mahatyam (1960) among others and Lord Shiva in Dakshayagnam (1962). He has also enacted the roles of Mahabharatha characters, such as Bheeshma, Arjuna, Karna and Duryodhana.


Later in his career, he stopped playing the role of a prince in his commercial films and began to play roles of a poor yet heroic young man fighting against the existing system. These films appealed to the sentiments of the common man. Some of these films are Devudu Chesina Manushulu (1973), Adavi Ramudu (1977), Driver Ramudu (1979), Vetagadu (1979), Sardar Papa Rayudu (1980), Kondaveeti Simham (1981), Justice Chowdhary (1982) and Bobbili Puli (1982). He also portrayed fantasy roles, his notable film in that genre being Yamagola (1977).[citation needed] His film Lava Kusa, in which he starred as Rama, collected 10 million rupees in 1963. He directed and acted in the hagiographical film Shrimad Virat Veerabrahmendra Swami Charitra (1984). He also acted in films such as Brahmasri Viswamitra (1991) and Major Chandrakanth (1993). His last film was Srinatha Kavi Sarvabhowmudu, a biopic on the Telugu poet Srinatha, which released in 1993.


In the later half of his career, NTR became a screenwriter. Despite having no formal training in script writing, he authored several screenplays for his own movies as well as for other producers. He also produced many of his films as well as other actor's films through his film production house National Art Theater Private Limited, Madras and later Ramakrishna Studios, Hyderabad. He actively campaigned for the construction of a large number of cinemas through this production house.He was influential in designing and implementing a financial system that funded the production and distribution of movies.He was so dedicated to his profession that he would often learn new things in order to portray a particular character on-screen perfectly and realistically. At the age of 40, he learnt dance from the renowned Kuchipudi dancer Vempati Chinna Satyam for his role in the film Nartanasala (1963).
NTR entered politics when he founded the Telugu Desam Party (TDP) on 29 March 1982 in Hyderabad. He said that this decision was based on a historic need to rid Andhra Pradesh of the corrupt and inept rule of the Indian National Congress, which had governed the state since its formation in 1956 and whose leadership had changed the Chief Minister five times in five years.


On 23 August 1995, after nine months into his third tenure, he was removed as Chief Minister and as the president of the TDP by his son-in-law, Nara Chandrababu Naidu, who engineered an internal party coup against him and took over the offices.[49] Naidu claimed that the reason for overthrowing NTR was that the latter was planning to hand over the reins of the party to his second wife Lakshmi Parvathi and felt that the party was in danger of disintegrating under her rule. Most of the TDP MLA's sided with Naidu and camped at the Viceroy Hotel in Hyderabad, the centre of the revolt.[50] NTR's sons Nandamuri Harikrishna, Nandamuri Balakrishna and his other son-in-law Daggubati Venkateswara Rao played a crucial role in the coup, but they all fell out with Naidu soon afterwards.[51] The reason for this is that Naidu is said have promised to make Venkateswara Rao the Deputy Chief Minister and Harikrishna the party's general secretary, but he sidelined all of them soon after becoming the Chief Minister and Party President.[50] In an emotional interview after the coup, NTR called the coup a planned treachery and lambasted Naidu for being power-hungry and untrustworthy, likening him to Aurangzeb, the Mughal Emperor who jailed his father and killed his siblings to become the King of the Mughal Empire.


Awards and honors
Civilian honor
1968 Padma Shri award from the Government of India
National Film Awards
1954 – Certificate of Merit for Best Feature Film in Telugu (producer — National Art Theater) for Thodu Dongalu
1960 – Certificate of Merit for Best Feature Film in Telugu (producer — National Art Theater) for Seetharama Kalyanam
1968 – National Film Award for Best Feature Film in Telugu (director- National Art Theater) for Varakatnam
Rashtrapati Awards
1954 – Best Acting for Raju Peda
1963 – Best Acting for Lava Kusa
Nandi Awards
1970 – Nandi Award for Best Actor for Kodalu Diddina Kapuram
Filmfare Awards South
1972 — Best Telugu Actor for Badi Panthulu