हवलदार हंगपन दादा (जन्म- 2 अक्टूबर, 1979,)

October 02, 2017

हवलदार हंगपन दादा (अंग्रेज़ी: Hangpan Dada, जन्म- 2 अक्टूबर, 1979, अरुणाचल प्रदेश; शहादत- 27 मई, 2016, जम्मू और कश्मीर) भारतीय सेना के जांबाज सैनिकों में से एक थे, जिन्होंने आतंकवादियों के साथ लड़ते हुए शहादत प्राप्त की। वे 27 मई, 2016 को उत्तरी कश्मीर के शमसाबाड़ी में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए। वीरगति प्राप्त करने से पूर्व उन्होंने चार हथियारबंद आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया। इस शौर्य के लिए 15 अगस्त, 2016 को उन्हें मरणोपरांत 'अशोक चक्र' से सम्मानित किया गया। 'अशोक चक्र' शांतिकाल में दिया जाने वाला भारत का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है।


परिचय
शहीद हंगपन दादा का का जन्म अरुणाचल प्रदेश के बोरदुरिया नामक गाँव में 2 अक्टूबर, 1979 को हुआ था। हंगपन दादा के बड़े भाई लापहंग दादा के अनुसार- हंगपन बचपन में शरारती थे। वे बचपन में पेड़ पर चढ़कर फलों को तोड़कर खुद भी खाते और अपने दोस्‍तों को भी खिलाते। वे शारीरिक रूप से बेहद फिट थे। हर सुबह दौड़ लगाते, पुश-अप करते। इसी दौरान खोंसा में सेना की भर्ती रैली हुई, जहां वह भारतीय सेना के लिए चुन लिये गए।


उनके गाँव के ही डॉन बॉस्को चर्च के फ़ादर प्रदीप के अनुसार- हंगपन दादा सेना में जाने के बाद अपने काम से काफ़ी खुश थे। वे मेरे पास आए थे और मुझसे कहा था कि फादर मेरी पोस्टिंग जम्मू और कश्मीर हो रही है।"


हंगपन दादा के बचपन के मित्र सोमहंग लमरा के अनुसार- "आज यदि मैं जिंदा हूं तो हंगपन दादा की वजह से। उन्‍होंने बचपन में मुझे पानी में डूबने से बचाया था। हंगपन को फ़ुटबॉल खेलना, दौड़ना सरीखे सभी कामों में जीतना पसंद था।"

26 मई, 2016 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा ज़िले के नौगाम सेक्टर में आर्मी ठिकानों का आपसी संपर्क टूट गया। तब हवलदार हंगपन दादा को उनकी टीम के साथ भाग रहे आतंकवादियों का पीछा करने और उन्हें पकड़ने का जिम्मा सौंपा गया। उनकी टीम एलओसी के पास शामशाबारी माउंटेन पर करीब 13000 की फीट की ऊंचाई वाले बर्फीले इलाके में इतनी तेजी से आगे बढ़ी कि उन्होंने आतंकवादियों के बच निकलने का रास्ता रोक दिया। इसी बीच आतंकवादियों ने टीम पर गोलीबारी शुरू कर दी। आतंकवादियों की तरफ़ से हो रही भारी गोलीबारी की वजह से इनकी टीम आगे नहीं बढ़ पा रही थी। तब हवलदार हंगपन दादा जमीन के बल लेटकर और पत्थरों की आड़ में छुपकर अकेले आतंकियों के काफ़ी करीब पहुंच गए। फिर दो आतंकवादियों को मार गिराया। लेकिन इस गोलीबारी में वे बुरी तरह जख्मी हो गए। तीसरा आतंकवादी बच निकला और भागने लगा। हंगपन दादा ने जख्मी होने के बाद भी उसका पीछा किया और उसे पकड़ लिया। इस दौरान उनकी इस आतंकी के साथ हाथापाई भी हुई। लेकिन उन्होंने इसे भी मार गिराया। इस एनकाउंटर में चौथा आतंकी भी मार गिराया गया।


भारत के 68वें गणतंत्र दिवस (2017) के मौके पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश के लिए शहीद हुए हवलदार हंगपन दादा को मरणोपरांत 'अशोक चक्र' से सम्मानित किया। राजपथ पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों शहीद की पत्नी चासेन लोवांग दादा ने भावुक आंखों से ये सम्मान ग्रहण किया। भारतीय सेना ने हंगपन दादा की इस शहादत पर एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म भी रिलीज की, जिसका नाम था- 


स्मारक
नवंबर, 2016 में शिलांग के असम रेजीमेंटल सेंटर (एआरसी) में प्लेटिनियम जुबली सेरेमनी के दौरान एक एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक का नाम हंगपन दादा के नाम पर रखा गया है।


Havildar Hangpan Dada AC (2 October 1979 — 27 May 2016) was a soldier in the Assam Regiment of the Indian Army. He was posthumously awarded the Ashoka Chakra, India's highest peacetime military decoration in August 2016.Dada was born in Borduria village, Tirap district, Arunanchal Pradesh, India.Dada saved his childhood friend Somhang Lamra from drowning in a river.


Dada joined the 3rd battalion of the Parachute Regiment on 28 October 1997. In 2005, he was transferred to the Assam Regimental Centre, and on 24 January 2008, he joined the 4th battalion, Assam Regiment. He then requested a transfer to a Rashtriya Rifles battalion on operations in Kupwara district, Jammu and Kashmir. He was posted to 35 Rashtriya Rifles in May 2016, the unit with which he was serving when he was killed.


On the night of 26 May 2016, Dada, as Sabu Post Commander of 35 Rashtriya Rifles, while establishing a stop along with his section at 12,500 feet, led a charge on hiding terrorists in the Shamshabari Ranges in Naugam, Jammu and Kashmir, resulting in the neutralisation of four heavily armed terrorists.He along with his team spotted the movement of terrorists in the area and engaged them in a fierce encounter that went on for over 24 hours. He charged at the spot where terrorists were and killed two terrorists on the spot and later the third one after a hand-to-hand scuffle as they slid down the hill towards the Line of Control. Dada sustained a sudden burst of automatic fire from the hiding fourth terrorist, receiving a gun shot wound. He continued to pin down the fourth terrorist and later succumbed to his injuries received before wounding the terrorist.


Dada's action of eliminating three terrorists in an engagement at close quarters and injuring a fourth one, in disregard to his personal safety, foiled the infiltration bid and ensured the safety of his men. He was honoured posthumously, with the government announcing the highest gallantry award during peace-time operations, the Ashok Chakra, on the eve of the Republic Day in 2017.Dada was married to Chasen Lowang and they had two children.

To remember his service, the Assam Regimental Centre (ARC) named its main office block in its headquarters after Hangpan Dada. The plaque was inaugurated by Dada’s wife. Pema Khandu, the then chief minister of Arunachal Pradesh renamed the annual football and volleyball (men and women) tournaments for Chief Minister's Trophy as Hangpan Dada Memorial Trophy.

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