कादम्बिनी गांगुली (मृत्यु- 3 अक्टूबर, 1923)

October 03, 2017

कादम्बिनी गांगुली (अंग्रेज़ी: Kadambini Ganguly; जन्म- 18 जुलाई, 1861, भागलपुर, बिहार; मृत्यु- 3 अक्टूबर, 1923, कलकत्ता, ब्रिटिश भारत) भारत की पहली महिला स्नातक और पहली महिला फ़िजीशियन थीं। यही नहीं कांग्रेस अधिवेशन में सबसे पहले भाषण देने वाली महिला का गौरव भी कादम्बिनी गांगुली को ही प्राप्त है। कादम्बिनी गांगुली पहली दक्षिण एशियाई महिला थीं, जिन्होंने यूरोपियन मेडिसिन में प्रशिक्षण लिया था। इन्होंने कोयला खदानों में काम करने वाली महिलाओं की लचर स्थिति पर भी काफ़ी कार्य किया। बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय की रचनाओं से कादम्बिनी बहुत प्रभावित थीं। उनमें देशभक्ति की भावना बंकिमचन्द्र की रचनाओं से ही जागृत हुई थी।


जन्म तथा शिक्षा
कादम्बिनी गांगुली का जन्म ब्रिटिशकालीन भारत में 18 जुलाई, 1861 ई. में भागलपुर, बिहार में हुआ था। उनका परिवार चन्दसी (बारीसाल, अब बांग्लादेश में) से था। इनके पिता का नाम बृजकिशोर बासु था। उदार विचारों के धनी कादम्बिनी के पिता बृजकिशोर ने पुत्री की शिक्षा पर पूरा ध्यान दिया। कादम्बिनी ने 1882 में 'कोलकाता विश्वविद्यालय' से बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। वे भारत की दो में से पहली महिला स्नातक थीं। 3 अक्टूबर, 1923 में कादम्बिनी गांगुली का देहांत कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में हुआ।


कोलकाता विश्वविद्यालय' से 1886 में चिकित्सा शास्त्र की डिग्री लेने वाली भी वे पहली महिला थीं। इसके बाद वे विदेश गई और ग्लासगो और ऐडिनबर्ग विश्वविद्यालयों से चिकित्सा की उच्च डिग्रियाँ प्राप्त कीं। देश में भले ही महिलाओं को उच्चतर शिक्षा पाने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा हो, लेकिन कादम्बिनी गांगुली के रूप में भारत को पहली महिला डॉक्टर 19वीं सदी में ही मिल गई थी। कादम्बिनी गांगुली को न सिर्फ भारत की पहला महिला फ़िजीशियन बनने का गौरव हासिल हुआ, बल्कि वे पहली साउथ एशियन महिला थीं, जिन्होंने यूरोपियन मेडिसिन में प्रशिक्षण लिया था।


ब्रह्म समाज के नेता द्वारकानाथ गंगोपाध्याय से कादम्बिनी का विवाह हुआ था। द्वारकानाथ महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए पहले से ही प्रयत्नशील थे। कादम्बिनी इस क्षेत्र में भी उनकी सहायक सिद्ध हुईं। उन्होंने बालिकाओं के विद्यालय में गृह उद्योग स्थापित करने के कार्य को प्रश्रय दिया। बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय की रचनाओं से कादम्बिनी बहुत प्रभावित थीं। बंकिमचन्द्र की रचनाएँ उनके भीतर देशभक्ति की भावनाएँ उत्पन्न करती थीं। वे सार्वजनिक कार्यों में भाग लेने लगी थीं।


कांग्रेस के 1889 के मद्रास अधिवेशन में उन्होंने भाग लिया और भाषण दिया। संस्था के उस समय तक के इतिहास में भाषण देने वाली कादम्बिनी पहली महिला थीं। 1906 ई. की कोलकाता कांग्रेस के अवसर पर आयोजित महिला सम्मेलन की अध्यक्षता भी कादम्बिनी जी ने ही की थी। महात्मा गाँधी उन दिनों अफ़्रीका में रंगभेद के विरुद्ध 'सत्याग्रह आन्दोलन' चला रहे थे। कादम्बिनी ने उस आन्दोलन की सहायता के लिए कोलकाता में चन्दा जमा किया। 1914 ई. में जब गाँधीजी कोलकाता आये तो उनके सम्मान में आयोजित सभा की अध्यक्षता भी कादम्बिनी ने ही की।


Kadambini Ganguly (18 July 1861 – 3 October 1923) and Chandramukhi Basu were the first two female graduates from India and the entire British Empire. She was also the first South Asian female physician, trained in western medicine, to graduate in South Asia. Anandi Gopal Joshi, another Indian, graduated as a physician the same year (1886) in the United States.The daughter of Brahmo reformer Braja Kishore Basu, she was born on 18 July 1861 at Bhagalpur, Bihar in British India. The family was from Chandsi, in Barisal which is now in Bangladesh. Her father was headmaster of Bhagalpur School. He and Abhay Charan Mallick started the movement for women's emancipation at Bhagalpur, establishing the women's organisation Bhagalpur Mahila Samiti in 1863, the first in India.


Kadambini started her education at Banga Mahila Vidyalaya and while at Bethune School (established by Bethune) in 1878 became the first woman to pass the University of Calcutta entrance examination. It was partly in recognition of her efforts that Bethune College first introduced FA (First Arts), and then graduation courses in 1883. She and Chandramukhi Basu became the first graduates from Bethune College, and in the process became the first female graduates in the country and in the entire British Empire.Ganguly studied medicine at the Calcutta Medical College. In 1886, she was given a Graduate of Bengal Medical College degree. She thus became one of the two, Anandi Gopal Joshi being the other, Indian women doctors who qualified to practice western medicine. Also another Indian woman by the name of Abala Bose passed entrance in 1881 but was refused admission to the medical college and went to Madras (now Chennai) to study medicine but never graduated.


Kadambini overcame some opposition from the teaching staff, and orthodox sections of society. She went to the United Kingdom in 1892 and returned to India after qualifying as LRCP (Edinburgh), LRCS (Glasgow), and GFPS (Dublin). After working for a short period in Lady Dufferin Hospital, she started her own private practice.As the mother of eight children, she had to devote considerable time to her household affairs. She was deft in needlework.


The noted American historian David Kopf has written, "Ganguli's wife, Kadambini, was appropriately enough the most accomplished and liberated Brahmo woman of her time. From all accounts, their relationship was most unusual in being founded on mutual love, sensitivity and intelligence… Mrs. Ganguli's case was hardly typical even among the more emancipated Brahmo and Christian women in contemporary Bengali society. Her ability to rise above circumstances and to realize her potential as a human being made her a prize attraction to Sadharan Brahmos dedicated ideologically to the liberation of Bengal's women.