चो रामस्वामी (जन्म- 5 अक्टूबर)

October 05, 2017

चो रामस्वामी (अंग्रेज़ी: Cho Ramaswamy, जन्म- 5 अक्टूबर, 1934, मद्रास; मृत्यु- 7 दिसम्बर, 2016, तमिलनाडु) भारतीय अभिनेता, हास्य कलाकार, चरित्र अभिनेता, संपादक, राजनीतिक व्यंग्यकार, नाटककार, संवाद लेखक, फ़िल्म निर्देशक और अधिवक्ता थे। उनका पूरा नाम 'श्रीनिवास अय्यर रामस्वामी' था। बाबूराव पटेल की 'मदर इंडिया' की तर्ज पर चो रामस्वामी ने तमिल में राजनीतिक व्यंय की पहली पत्रिका शुरू की थी और इसका नाम 'तुग़लक़' रखा था। द्रविड़ आंदोलन और कांग्रेस का एक भी नेता उनके व्यंग्य के निशाने से नहीं बच पाया। इससे तुग़लक़ के पाठकों में यह विश्वास पनपा कि चो रामस्वामी की मारक लेखनी से कोई बच नहीं सकता। असंख्य लोग व्यग्यों के जरिये सामाजिक बदलाव लाने के चो रामस्वामी के काम को प्रशंसा और सम्मान की दृष्टि से देखते थे। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं जयललिता के चो रामस्वामी गहरे मित्र थे।


परिचय
चो रामस्वामी का जन्म 5 अक्टूबर सन 1934 को ब्रिटिशकालीन भारत में मद्रास में हुआ था। तमिलनाडु के कद्दावर नेताओं को भी यह पता था कि चो रामस्वामी किसी आलोचना से परे नहीं हैं। इसमें कोई शक नहीं कि व्यंग्यकार, पत्रकार, नाटककार, अभिनेता और राजनीतिक सलाहकार चो रामस्वामी का राजनीतिक झुकाव दक्षिणपंथ की ओर था। इसके बावजूद जो भी पार्टी सत्ता में रही हो, जब भी मीडिया की आज़ादी या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात उठी, वे मोर्चे पर सबसे आगे रहे।  देश के कई नेताओं के साथ रामस्वामी के अच्छे व्यक्तिगत संबंध थे। तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता से भी उनकी काफ़ी अच्छी दोस्ती थी। जब चो रामस्वामी गंभीर रूप से बीमार पड़े, तब जयललिता के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनसे मिलने के लिए पहुंचे थे। चो रामस्वामी का निधन 7 दिसम्बर, 2016 को चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ। तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के दो दिन बाद ही चो रामस्वामी ने भी अंतिम सांस ली। चो रामस्वामी का लंबे समय से अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा और बेटी हैं। उन्होंने उस दौर में दक्षिणपंथी अनुदारवाद का प्रतिनिधित्व किया, जब यह धारा इतनी मजबूती से नहीं उभरी थी। इसके बावजूद उनकी छवि पर ख़ास फर्क नहीं पड़ता था। असंख्य लोग व्यग्यों के जरिये सामाजिक बदलाव लाने के उनके काम को प्रशंसा और सम्मान की दृष्टि से देखते थे।


पचास वर्ष पहले तमिलनाडु जब द्रविड़ वैचारिकता की गिरफ्त में आ गया था, तब श्रीनिवास अय्यर रामस्वामी यानी चो रामस्वामी विरोध की अकेली आवाज थे। लेकिन उन्होंने हरसंभव कोशिश की कि उनकी आवाज को उनके तीखेपन में नहीं, बल्कि व्यंग्य की पैनी और रचनात्मक शैली में सुना जाए। वर्ष 1967 में जब द्रमुक को तमिलनाडु की सत्ता मिली, तब रामस्वामी करीब पैंतीस साल के थे। वकालत का पेशा छोड़ने के बाद फिल्मों और रंगमंच में उन्हें ठहराव मिला। दो सौ के करीब फिल्मों में हालांकि उन्होंने मसखरे की भूमिका ही निभाई, पर कुल तेईस नाटकों के जरिये रामस्वामी ने अपनी अलग पहचान बना ली, क्योंकि इनमें विदूषक की भूमिका निभाते हुए संवाद उनके लिए हुए थे; लिहाजा रंगमंच पर उनकी मसखरी में भी संदेश निहित होता था। उनके शुरुआती नाटक सामाजिक व्यंग्य थे। द्रविड़ पार्टी के सत्ता में आने के बाद उनके नाटक राजनीतिक होते गए, जिनमें नए उभरते द्रविड़ नेताओं पर करारा व्यंग्य होता था।


एक पारंपरिक कांग्रेसी परिवाद से आने के कारण चो रामस्वामी राजाजी और कामराज के प्रशंसक थे। मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था और निजी क्षेत्र के समर्थक होने के कारण नेहरू से भी अधिक वह राजाजी को पसंद करते थे। वर्ष 1969 में कांग्रेस को विभाजित कर इंदिरा गांधी ने जब तमिलनाडु में द्रमुक के साथ गठजोड़ किया, तब चो रामस्वामी उन थोड़े लोगों में थे, जो राजाजी और कामराज का समर्थन कर रहे थे।


चो रामस्वामी का नाटक 'मोहम्मद बिन तुग़लक़' एक व्यंग्य नाटक था, इसमें तुग़लक़ भारत का प्रधानमंत्री बन जाता है। यह नाटक तत्कालीन प्रधानमंत्री इदिरा गांधी के क्रियाकलापों पर पैरोडी था। बाबूराव पटेल की 'मदर इंडिया' की तर्ज पर चो रामस्वामी ने तमिल में राजनीतिक व्यंय की पहली पत्रिका शुरू की और इसका नाम 'तुग़लक़' रखा। उन्होंने इसे अंग्रेज़ी में भी 'पिकविक' नाम से शुरू किया, पर यह प्रयोग सफल नहीं रहा। अलबत्ता तुग़लक़ सफलता की नई ऊंचाई छू रही थी। जब चुनाव में राज्य के मतदाताओं ने इंदिरा और द्रमुक के पक्ष में थोक में वोट डाले, तब तुग़लक़ विरोधियों की आवाज बनी। सत्ता में बैठे ताकतवरों को निशाना बनाते उनके दुस्साहसी व्यंग्यों ने उभरते मध्य और उच्च मध्य वर्ग को प्रभावित किया। करुणानिधि सरकार ने सता और कानून के जरिये चो रामस्वामी को डराने की कोशिश की, पर वे और लोकप्रिय बनकर भरे।


आपातकाल चो रामस्वामी की रचनात्मकता का स्वर्ग युग था। सेंसर की मार उनकी पत्रिका पर भी पड़ी। वह सामान्य मुद्दों को भी राजनीतिक रंग देने में सफल होते थे। द्रविड़ आंदोलन और कांग्रेस का एक भी नेता उनके व्यंग्य के निशाने से नहीं बच पाया। इससे तुग़लक़ के पाठकों में यह विश्वास पनपा कि चो रामस्वामी की मारक लेखनी से कोई बच नहीं सकता। लेकिन 80 और 90 में खोजी पत्रकारिता के दौर में तुग़लक़ की लोकप्रियता कम होने लगी। भाजपा और हिंदुत्व के उभार के दौरान चो रामस्वामी उनके साथ हो गए। अब वह राजनीति में मध्यस्थ की भूमिका भी निभाने लगे। जयललिता के बचपन का मित्र होने के बावजूद चो रामस्वामी ने 1996 में उन्हें सत्ता से बाहर करने के लिए द्रमुक और तमिल मनीला कांग्रेस के बीच गठबंधन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पर 2004 के बाद उन्होंने जयललिता के प्रति नरमी दिखाई और द्रमुक का विरोध किया। वर्ष 1999 से 2005 तक वह राज्य सभा में रहे।


चो रामस्वामी के ईमानदार और निष्पक्ष आलोचक होने की छवि पर तब ग्रहण लगा, जब प्रशांत भूषण ने दस्तावजों के जरिये यह साबित किया कि चो रामस्वामी उस वक्त जयललिता की अनेक तथाकथित फर्जी कंपनियों के निदेशक थे, जब उनके अपनी दोस्त शशिकला नटराजन से रिश्ते खराब हो गए थे। द्रमुक को निरंतर व्यंग्य के अपने अचूक तीर से बेधते रहने के बावजूद करुणानिधि से चो रामस्वामी के दोस्ताना रिश्ते थे। सिर्फ करुणानिधि ही क्यों, व्यक्तिगत तौर पर उन्होंने उन सबसे बेहतर संबंध रखे, जिन्हें वह अपनी पत्रिका में निशाना बनाते थे। अपने लेखन में वह इतने ईमानदार और साहसी थे कि तब भी अपनी भावनाएं नहीं छिपाते थे, जब उन्हें पता होता था कि राजनीतिक तौर पर वह गलत हैं। स्त्री विमर्श और महिलाओं के सार्वजनिक पदों पर आसीन होने के वह विरोधी तो थे ही, समाजवाद और तर्कवाद के भी वह विरोधी थे, और इसे छिपाते नहीं थे।


Srinivasa Iyer, also known as Cho Ramaswamy (5 October 1934 – 7 December 2016), was an Indian actor, comedian, character actor, editor, political satirist, playwright, dialogue writer, film director and lawyer in Tamil Nadu.Cho made his debut in 1963 with Paar Magale Paar as comedian. From 1963 to 2005 he acted in 180 Tamil films and directed 5 films. He also wrote and directed 20 plays. He also wrote and acted in 27 Television serials. He wrote 10 books. Apart from being an actor, he was both the screenplay and story writer of films such as Thenmazhai, Ninaivil Nindraval, Bommalattam, Aayiram Poi and Panam Paththum Seyyum, all of which proved to be box office hits.


Cho played the role of a bike mechanic in the play Petralthan Pillaiya, written by Pattu of the United Amateur Artistes (UAA), which became a huge success. When the play was later adapted into a film by director A. Bhimsingh, Sivaji Ganesan persuaded Cho to play the same role in the film too, leading to Cho's entry into the film world.


Many scenes in Hindi films have been directly borrowed and plagiarized from what Cho performed in his films. The sequence in Adimai Penn, where Cho exchanges the various glasses of juices kept while narrating a story to R.S. Manohar, by which the villain's poisonous glass gets mixed up, was later on borrowed in Andaz Apna Apna in 1994, where Aamir Khan foils the plan of the villains. Similarly, the scene in Thenmazhai, where Cho acts as a doctor to look after a fraud patient played by Nagesh and brings carpenter's tools to operate on the patient, was again copied in Andaz Apna Apna in 1994.


Mr. Cho and Jayalalithaa have worked together in 19 films and also had been part of the same drama troupe. In fact, Mr. Cho had been consulted at the creation of Jayalalithaa's political career by the then actress and by MGR himself. During the rehearsal of the play The Whole Truth, Cho, donning the role of the villain, was supposed to strangle the character played by Jayalalithaa but as he closed in, she could not help laughing instead of being afraid. She later disclosed "His expressions made me laugh." After years, Cho said: "She might have treated my stinging comments too as comical."


His career's best performances are regarded as Muhammad Bin Tughlaq, Thenmazhai, Ninaivil Nindraval, Bommalaatam, Delhi Mappilai, Adimai Penn, Dharsinam, Neelagiri Express, Annaiyum Pithavum, Aayiram Poi, Deiva Sankalpam, Malligai Poo, Manam Oru Kurangu, Antharangam, Nirai Kudam, Therottam, Kashi Yaatirai, Thangapadhakkam, En Annan, Engal Thangam, Oli Vilaku, Kanavan, Kumarikkottam, Maattukara Velan, Engal Thangam, Pugundha Veedu, Ulagam Ivvalavudhaana, Velum Mayilum Thunai and Neerum Neruppum. He was both the screenplay and story writer of films such as Thenmazhai, Ninaivil Nindraval, Bommalattam, Aayiram Poi and Panam Paththum Seyyum, all of which proved to be box office hits.


In the 1980s, the then actress Jayalalithaa wrote a column named Ennangal Silla for his magazine Tuglaq. He quoted in an interview, on Jayalalitha: "I always admired Jayalalithaa. We know each other since 1964. I worked with her in drama of YG Parthasarthy named Undersecretary opposite her. She had acted in Tea House of August Moon and Epistle before. I was against her only for a brief period when I believed she was misusing her power and was not acting in interests of people in the period 1991-1996. She was a voracious reader and a great speaker way back when she did shootings. As an actor I have worked with her in Bommalattam, Galatta Kalyanam, Kanavan, Maattukaran Velan, Thedi Vantha Mappillai, En Annan, Engal Thangam, Adimai Penn, Suryagandhi, Vandhale Maharasi, Neerum Neruppum and Anbai Thedi. She was a great dancer and deserved the tag of number on heroine in the time 1965 to 1977. She could effortlessly shift into roles and deliver hits. Her name guaranteed success financially and she used to get into skin of the character while performing. I directed her in Yarukkum Vetkam Illai. My admiration for her has only increased with time. She proved her worth by doing good for the state during her tenure as the chief minister and came clear like Sita when false charges were foisted against her."
He was nominated to the Rajya Sabha by the President of India, K. R. Narayanan. In the Rajya Sabha 12 MPs are nominated by the President of India from amongst persons who have special knowledge or practical experience in the fields of literature, science, art or social service. He served as a Rajya Sabha MP from November 1999 to November 2005.Cho was a fearless voice who was respected and admired, says PM Modi.



He was the founder and editor of the Tamil magazine Thuglak.[6] His popularity in the Tamil Nadu literary circles was mainly due to his impartial[citation needed] assessment of political issues, and the audacity and fearlessness with which he published his viewpoints. Politicians such as J. B. Kripalani, Indira Gandhi, Karunanidhi, Chandra Shekhar, G. K. Moopanar, M. G. Ramachandran, Jayalalithaa, Ramakrishna Hegde, N. T. Rama Rao, Atal Bihari Vajpayee, and L. K. Advani, Sonia Gandhi, Manmohan Singh and P. Chidambaram were some of the targets of his editorial attacks. He was widely considered to be an unbiased political analyst who would criticize the negatives of both the left wing and right wing political parties. In his last years, he predicted that Narendra Modi would do diligent work towards the development of India, and also praised Jayalalithaa for her work in Tamil Nadu. The anniversary celebration of his popular magazine Thuglak is being organised on 14 January every year coinciding with the local festival of '"Pongal" and is attended by thousands of his admirers as well as adversaries. Several VIPs also participate in the function. The main attraction during the celebrations is the questions posed by members of the audience and quick answers given by Cho.


On 25 January 2017, the Government of India announced the "Padma Bhushan" award for his contribution towards Literature & Education – Journalism.



Filmography
Plays
Wait and See
Why Not
What For
Muhammad bin Tughluq
Yaarukkum Vetkamillai
Saathiram Sonnadhillai
Nermai Urangum Neram
Iraivan Irandhuvittana?
Enru Thaniyum Inda Sudandira Thaagam?
Judgement Reserved
Quo Vadis
Unmayae Unn Villai Ennae?
Saraswathiyin Selvan
Unmai Urangum Neram
Madras by Night



as Actor
Guru Sishyan (1988)
Adhisaiya Piraivi (1990)
Aarilirunthu Arubathu Varai (1979)
Adutha Varisu (1983)
Manithan (1987)
Kadhala Kadhala (1998)
Thenmazhai (1966)
Marakka Mudiyumaa? (1966)
Nirai Kudam (1969)
Galatta Kalyanam (1968)
Muhammad bin Tughluq (1971)
En Annan (1970)
Maattukara Velan (1970)
Bommalattam (1968)
Engal Thangam (1970)
Aayiram Poi (1969)
Neelagiri Express (1968)
Ninaivil Nindraval (1967)
Paar Magale Paar (1963)(Debut)
Thanga Pathakkam (1974)
Mr.Sampath (1972)
Unmaye Un Vilai Enna (1976)
Thanikudithanam (1977)
Vandhale Magarasi (1973)
Suryakanthi (1973)
Gauravam (1973)
Manam Oru Kurangu (1967)
Therottam (1971)
Anand (1987)
Kuzhanthaikkaaga (1968)
Sonthankal Vaazhga (1975)
Pon Vanndu (1973)
Mayor Meenakshi (1976)
Kadavulin Theerppu (1981)
Balappareetchai (1977)
Vaakkuruthi (1973)
Orey Saatchi (1974)
Thaaikku Oru Pillai (1972)
Sankey Muzhanku (1972)
Penn Endraal Penn (1967)
Anbai Thedi (1974)
Andharangam (1975)
Cinema Paithiyam (1975)
Roshakkaari (1974)
Delhi Maappillai (1968)
Ulagam Ivvalavuthaan (1969)
Ganga Gowri (1973)
Manitharil Maanikkam (1973)
Unga Veettu Kalyaanam (1975)
Rojavin Raja (1976)
Thedi Vandha Mappillai (1970)
Lakshmi Kalyanam (1968)
Adimai Penn (1969)
Neerum Neruppum (1971)
Rickshawkaran (1971)
Oru Thai Makkal (1971)
Kumari Kottam (1971)
Arunodhayam (1971)
Soodhattam (1971)
Thava Pudhalvan (1972)
Unakkum Enakkum (1972)
Kasi Yathirai (1973)
Ponnunjal (1973)
Shanmugapriya (1973)
Vayadi (1973)
Veettukku Vandha Marumagal (1973)
Devi Sri Karmariamman (1974)
Kalyanamam Kalyanam (1974)
Onne Onnu Kanne Kannu (1974)
Pillai Selvam (1974)
Thai Pasam (1974)
Avanthan Manithan (1975)
Thai Veettu Seethanam (1975)
Uravu Solla Oruvan (1975)
Yarukkum Vetkamillai (1975)
Avan Oru Charithiram (1976)
Sakka Podupodu Raja (1978)
Nadagame Ulagam (1979)
Kannan En Kadhalan (1968)
Oli Vilakku (1968)
Dharisanam (1970)
Nadu Iravil (1970)
Pinchu Manam (1975)
Vilayattu Pillai (1970)
Malligai Poo (1973)
Puguntha Veedu (1974)
Deiva Sankalpam (1972)
Aindhu Latcham (1969)
Yanai Valartha Vanambadi Magan (1971)
Naan Yaar Theriyuma (1967)
Navgraha Nayagi (1985)
Puthiya Theerpu (1985)
Naan Mahan Alla (1984)
Sattai Illatha Pambaram (1984)
Direction
Mohammed Bin Thuglak
Unmaiye Un Vilai Enna
Mr Sampath
Yarukkum Vetkam Illai
Sambo Siva Samboo
Screenplay
Neelagiri Express
Aayiram Poi
Pottaa Poti
Bommalattam (1968 film)
Ninaivil Nindraval (1967 film)
Religious works
Hindu Maha Samudram Vol – I, II, III, IV, V, and VI (Latest)
Mahabaratham Pesugirathu
Valmiki Ramayanam
Verukathagada Bramaniyam
Nane Raja
Television
Engey Brahmanan?
Verukatthakkatha Brahmaneeyam?
Sambavami Yuge Yuge
Vande Mataram
Ivargalai Therindhu Kollungal
Washington Il Nallathambi
Sarakar Pugunda Veedu
Koovam Nadikaraiyinile
Adhigaprasangam
Yaro Ivar Yaro?
Saadhal Ellaiyel Kaadhal
Mydear BrahmaDeva
India Enge Pogiradhu?
Kamarajarai Sandhitthen
Puratchi Geethai
Sattam Thalai Guniyattum
Enge Pogirai?
Embak Kana Onru Kandaen
Saraswathiyin Selvan
Manam Oru Kurangu
En Koodathu?
Eravil Chennai
Uravugal Ellaiyadi Pappa
Edarkaga?
Thiraiyulagathai Thirumbi Parkiraen
Unmayae Unn Villai Ennae?
Janatha Nagar Colony



Cho was hospitalized in January 2015 and was in and out of hospital due to illness. Indian Prime Minister Narendra Modi and Tamil Nadu Chief Minister Jayalalitha called on Cho Ramaswamy. Ramaswamy died due to cardiac arrest at 3:58 AM on 7 December 2016 at the age of 82, at Apollo Hospital in Chennai, where he was receiving treatment for respiratory problems. He is survived by his wife Soundara Ramaswamy,  son Rajivakshan alias Sriram and daughter Sindhu. He died two days after the death of Jayalalithaa, Chief Minister of Tamil Nadu, who was admitted to the same hospital and who also suffered a cardiac arrest. However, both of them could not meet each other due to health reasons during their last days. Both were very great friends since their early days. Cho, while being in hospital on 6 December, watched the funeral of Jayalalitha telecasted in television before he was put on a ventilator.


Rajinikanth disclosed later that Jayalalithaa had always opined that Mr. Ramaswamy should live as long as she lived. He quoted: "As it turns out, he was alive till then and even few hours after that.