हेलन (जन्म 21 अक्टूबर, 1939, म्यांमार)

October 21, 2017

हेलन (जन्म 21 अक्टूबर, 1939, म्यांमार) हिंदी फ़िल्म जगत में 70 और 80 के दशक की ऐसी अभिनेत्री हैं, जिन्होंने अपने नृत्य से सिने दर्शकों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान बनायी, जिसके लिए आज भी लोग उन्हें भूल नहीं पाए है।


जीवन परिचय
हेलन का वास्तविक नाम हेलन रिचर्डसन खान है। हेलन का जन्म बर्मा (वर्तमान म्यांमार) में 21 अक्तूबर 1939 को हुआ था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हेलन और उनका परिवार मुंबई आ गये। हेलन के पिता एंग्लो-इंडियन था, दूसरे विश्व युद्ध में पिता की मृत्यु हो गई और हेलन की माता का नाम बर्मीज था और वह बतौर नर्स कार्य करती थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति ख़राब होने के कारण से हेलन ने स्कूल की पढ़ाई छोड़ दी और परिवार के काम में हाथ बंटाने लगी। उन्होंने मणिपुरी, भरतनाट्यम, कथक आदि शास्त्रीय नृत्यों में भी शिक्षा हासिल की।


हेलन सबसे पहले कोरस डांसर के रूप में 1951 में फ़िल्म "शबिस्तां" और "आवारा" में नजर आई थीं। बॉलीवुड की पहली आइटम गर्ल के तौर पर पहचानी जाने वाली अभिनेत्री हेलन ने बॉलीवुड का उस वक्त आइटम नंबर से परिचय कराया जब वो अपने शुरुआती दौर में था। उनको फ़िल्मों में लाने का श्रेय कुक्कू को जाता है, जो स्वयं उन दिनों फ़िल्मों में नर्तकी के रूप में नजर आती थीं। वर्ष 1958 में प्रदर्शित फ़िल्म 'हावडा ब्रिज' हेलन के करियर की अहम फ़िल्म साबित हुई। इस फ़िल्म में उनपर फ़िल्माया यह गीत ‘मेरा नाम चिन-चिन चू’ उन दिनों दर्शकों के बीच काफ़ी मशहूर हुआ।


साठ के दशक में हेलन बतौर अभिनेत्री अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करने लगी। इस दौरान उन्हें अभिनेता संजीव कुमार के साथ फ़िल्म ‘निशान’ में काम करने का मौक़ा मिला, लेकिन दुर्भाग्य से यह फ़िल्म सिनेमा घर में चल नहीं पाई। साठ और सत्तर के दशक मे आशा भोंसले हिन्दी फ़िल्मों की प्रख्यात नर्तक अभिनेत्री हेलन की आवाज़ मानी जाती थी। आशा भोंसले ने हेलन के लिये तीसरी मंज़िल में ‘ओ हसीना जुल्फों वाली’ फ़िल्म कारवां में ‘पिया तू अब तो आजा’ मेरे जीवन साथी में ‘आओ ना गले लगा लो ना’ और डॉन में ‘ये मेरा दिल यार का दीवाना’ गीत गाये।


हेलन ने अपने पाँच दशक लंबे सिने करियर में लगभग 500 फ़िल्मों में अभिनय किया। इतने सालों के बाद भी उनके नृत्य का अंदाज़ भुलाए नहीं भूलता है। वर्ष 1975 में प्रदर्शित फ़िल्म ‘शोले’ में आर. डी. बर्मन के संगीत निर्देशन में हेलन के ऊपर फ़िल्माया गीत ‘महबूबा महबूबा’ आज भी सिनेप्रेमियों को झूमने पर मजबूर कर देता है। हालांकि सत्तर के दशक में नायिकाओं द्वारा ही खलनायिका का किरदार निभाने और डांस करने के कारण हेलन को फ़िल्मों में काम मिलना काफ़ी हद तक कम हो गया।


वर्ष 1976 में महेश भट्ट के निर्देशन में बनी फ़िल्म ‘लहू के दो रंग’ में अपने दमदार अभिनय के लिए हेलन को सवश्रेष्ठ सहनायिका के फ़िल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ‘हेलन की नृत्य शैली’ से प्रभावित बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री साधना ने एक बार कहा था, "हेलन जैसी नृत्यांगना न तो पहले पैदा हुई है और ना ही बाद में पैदा होगी।"


नन्दा, वहीदा रहमान, हेलन और साधना (बाएँ से दाएँ)
"मेरा नाम चिन चिन चू, रात चांदनी मैं और तू हल्लो मिस्टर हाऊ डू यू डू. . . "- हावडा ब्रिज (1958)
'पिया तू अब तो आजा...'- कारवां (1971)
‘ये मेरा दिल यार का दीवाना’ गीत गाये'- डॉन (1978)
"मूंगडा मूंगडा मैं गुड की ढली, मंगता है तो आजा रसिया नहीं तो मैं ये चली"- इंकार (1978)
"महबूबा महबूबा"-शोले (1975)
उल्लेखनीय फ़िल्में
हेलन के कार्यकाल की कुछ लोकप्रिय फ़िल्में आवारा, मिस कोको कोला, यहूदी, हम हिंदुस्तानी, दिल अपना और प्रीत पराई, गंगा जमुना, वो कौन थी, गुमनाम, ख़ानदान, जाल, ज्वैलथीफ, प्रिस, इंतक़ाम, द ट्रेन, हलचल, हंगामा, उपासना, अपराध, अनामिका, जख्मी, बैराग, ख़ून पसीना, अमर अकबर ऐंथोनी., द ग्रेट गैम्बलर, राम बलराम, शान, कुर्बानी, अकेला, खामोशी, हम दिल दे चुके सनम, मोहब्बते, मैरी गोल्ड आदि हैं।


"लहू के दो रंग" (1979)- सर्वश्रेष्ठ सहअभिनेत्री का फ़िल्मफेयर पुरस्कार।
2006 में जैरी पिंटो ने हेलन के ऊपर एक किताब लिखी थी, जिसका शीर्षक था "द लाइफ एण्ड टाइम्स ऑफ इन एच-बोम्बे", जिसने 2007 का सिनेमा की बेहतरीन पुस्तक का राष्ट्रीय फ़िल्म अवार्ड जीता।
2009 में हेलन को पद्मश्री सम्‍मान से भी नवाजा गया है।


Helen Richardson Khan (born Helen Ann Richardson on 21 November 1938), popularly known as only Helen (Hindustani pronunciation: ), is a Burma-born Indian film actress and dancer, working in Hindi films. She has received two Filmfare awards and has appeared in over 700 films, and is often cited as the most popular nautch dancer of her time. She was the inspiration for four films and a book. She is the second wife of veteran writer-producer Salim Khan.


Helen Ann Richardson was born on 21 November 1938 in Rangoon, Burma to an Anglo Indian father and Burmese mother. Her father's name was George Desmier. She has a brother named Roger and a sister name Jennifer. Their father died during World War II. The family then trekked to Mumbai in 1943 in order to escape from the Japanese occupation of Burma. Helen told Filmfare during an interview in 1964:


...we trekked alternately through wilderness and hundreds of villages, surviving on the generosity of people, for we were penniless, with no food and few clothes. Occasionally, we met British soldiers who provided us with transport, found us refuge and treated our blistered feet and bruised bodies and fed us. By the time we reached Dibrugarh in Assam, our group had been reduced to half. Some had fallen ill and been left behind, some had died of starvation and disease. My mother miscarried along the way. The survivors were admitted to the Dibrugarh hospital for treatment. Mother and I had been virtually reduced to skeletons and my brother's condition was critical. We spent two months in hospital. When we recovered, we moved to Calcutta, and sadly my brother died there due to small pox".


She quit her schooling to support her family because her mother's salary as a nurse was not enough to feed a family of four. In a documentary called Queen of the Nautch girls, Helen said she was 19 years old in 1957 when she got her first big break in Howrah Bridge.
In 1981, Helen married Salim Khan, a prominent Bollywood screenplay writer. Khan was already married and the father of four children; Helen joined the Khan family and had a large role (along with Khan and his first wife Salma) in keeping the family united. All of Helen's step-children have bonded closely with her, and Helen is almost invariably accompanied in public appearances by Salma Khan, Salim's first wife.


In the late 1980s, Helen and Khan adopted a baby girl, Arpita. Arpita Khan was the daughter of a homeless woman who happened to die on the Mumbai footpath owing to some accident. Khan came across this baby, saw her weeping, and brought her home to take care of her.Arpita grew up with her three parents, three older brothers and elder sister in the Khan household. She did her schooling in Mumbai, then studied at the London School of Fashion, and came back to Mumbai to work in an interior design firm. On 18 November 2014, Arpita married Aayush Sharma, a Delhi-based businessman who is the son of Anil Sharma, a minister in the government of Himachal Pradesh and the grandson of Sukh Ram, a former union cabinet minister; both the politicians belong to the Indian National Congress party. The date was chosen to coincide with the 50th anniversary of the wedding of Salim Khan and his first wife, Salma.The wedding was held on a grand scale at the Falaknuma Palace hotel in Hyderabad. On 30 March 2016, Arpita and Aayush Sharma were blessed with a baby boy, who they named Ahil Sharma; he is Helen's sixth grandchild.


Awards and honors
Padma Shri, a civilian honour from the Indian government (2009)
Nominated – Filmfare Award for Best Supporting Actress – Gumnaam (1966)
Nominated – Filmfare Award for Best Supporting Actress – Shikaar (1969)
Nominated – Filmfare Award for Best Supporting Actress – Elaan (1972)
Won – Filmfare Award for Best Supporting Actress – Lahu Ke Do Rang (1980)
Nominated – Filmfare Award for Best Supporting Actress – Khamoshi: The Musical (1997)
1999 – Filmfare Lifetime Achievement Award