काशीनाथ नारायण दीक्षित (जन्म-21 अक्टूबर, 1889 ई. )

October 21, 2017

काशीनाथ नारायण दीक्षित (अंग्रेज़ी: kashinath narayan dikshit) हमारे देश के भारतीय पुरातत्व के विद्वान का जन्म-21 अक्टूबर, 1889 ई. को पंढरपुर, महाराष्ट्र में हुआ था।


शिक्षा एवं पद
पुरातत्व विषय में विशेष योग्यता प्राप्त करने बाद आपने सर्वप्रथम मुंबई और लखनऊ के संग्रहालयों के ‘क्यूरेटर’ के रुप में कार्य किया।
1920 में काशीनाथ नारायण दीक्षित ‘आर्कियालाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया’ के अधीक्षक नियुक्त हो गये।
योग्यता के बल पर इनकी नियुक्ति 1937 मे डायरेक्टर जनरल ओफ आर्कियालाजी के पद पर हो गई।
काशीनाथ नारायण दीक्षित मोहन जोदड़ो पहाड़पुर के उत्खनन कार्य का निर्देशन किया।
गुजरात में प्रागऐतिहासिक युग संबंधी उत्खनन को भी आरम्भ कराया था।
श्री दीक्षित लिपि अभिलेख और मुद्राशास्त्र, पुरातत्व की इन शाखाओं के विशेषज्ञ थे|
काशीनाथ नारायण दीक्षित पश्चिम के देशों के ऐतिहासिक संग्रहालयों की यात्रा का अखिल भारतीय संघ स्थापित कराया।
1943 की अलीगढ़ इतिहास कांग्रेस के भी अध्यक्ष काशीनाथ नारायण दीक्षित थे। जिनका देहांत1946 में हो गया।


Rao Bahadur Kashinath Narayan Dikshit (21 October 1889 – 6 October 1944) was an Indian archaeologist who served as Director-general of the Archaeological Survey of India (ASI) from 1937 to 1944.


Dikshit was born on 21 October 1889 in a Brahmin family of Pandharpur in the then Bombay Presidency (now Maharashtra, India).


Dikshit worked as Superintendent of Archaeology in the Indian Museum before joining the Archaeological Survey. In the ASI, he served as Government Epigraphist and as Deputy Director-General. He was a part of John Marshall's team which excavated Mohenjodaro. In 1937, Dikshit was appointed Director General of the ASI.


Dikshit assumed office on 21 March 1937 and continued till 1944. As Director General, Dikshit gave license to the University of Calcutta to excavate the site of Bangarh in South Dinajpur. Between 1940-44,. the ASI conducted large-scale excavations at Ahicchatra near Bareilly. Dikshit retired in 1944 and was succeeded by Sir Mortimer Wheeler.