नेली सेनगुप्त (मृत्यु- 23 अक्टूबर, 1973)

October 23, 2017

नेली सेनगुप्त (जन्म- 12 जनवरी, 1886, केम्ब्रिज (इंग्लैंड); मृत्यु- 23 अक्टूबर, 1973, कोलकाता) को 'भारतीय स्वतंत्रता संग्राम' में योगदान देने और क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए जाना जाता है। वे महात्मा गाँधी के 'असहयोग आन्दोलन' में भाग लेने वाले यतीन्द्र मोहन सेनगुप्त की पत्नी थीं। नेली सेनगुप्त ने वर्ष 1933 की कोलकाता कांग्रेस की अध्यक्षता भी की। उन्हें 1940 और 1946 में निर्विरोध 'बंगाल असेम्बली' की सदस्य भी चुना गया था।


जन्म तथा शिक्षा
नेली सेनगुप्त का जन्म सन 1886 ई. में केम्ब्रिज, इंग्लैंड में हुआ था। उनके पिता का नाम फ़्रेडरिक विलियम ग्रे और माता ऐडिथ हेनेरिअता ग्रे थीं। उन्होंने इंग्लैंड से ही अपनी शिक्षा प्राप्त की थी। जब चटगांव (बंगाल) के निवासी यतीन्द्र मोहन सेनगुप्त अध्ययन के लिए इंग्लैंड गए तो वहीं पर वर्ष 1909 में नेली से उनका विवाह हुआ। इसके बाद जब जतीन्द्र जी अपनी शिक्षा पूर्ण करके भारत वापस आये तो नेली भी उनके साथ यहीं आ गईं। भारत की आज़ादी में योगदान देने वाली नेली सेनगुप्त जब बहुत बीमार हुईं तो वर्ष 23 अक्टूबर, 1973 में इलाज के लिए कोलकाता आयीं, तभी उनका देहान्त हुआ।


वर्ष 1921 के 'असहयोग आन्दोलन' में जब उनके पति जतीन्द्र मोहन सेनगुप्त कूद पड़े तो नेली ने भी सुख-सुविधा का जीवन त्याग कर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने का निश्चय कर लिया। असम-बंगाल की रेल हड़ताल के सिलसिले में जब जतीन्द्र मोहन गिरफ्तार हुए तो उनके बाद नेली ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने खद्दर बेचने पर लगा प्रतिबंध तोड़ा, जिस कारण अंग्रेज़ पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और जेल में डाल दिया।


नेली सेनगुप्त का सबसे साहसपूर्ण कार्य था, सन 1933 की कोलकाता कांग्रेस की अध्यक्षता। इस अधिवेशन के लिए निर्वाचित अध्यक्ष महामना मदन मोहन मालवीय पहले ही गिरफ्तार कर लिए गए थे। इस पर चुपचाप नेली को अध्यक्ष चुन लिया गया। पर ब्रिटिश सरकार अधिवेशन रोकने के लिए हर उपाय कर रही थी। जो स्वागताध्यक्ष बनाया जाता उसे गिरफ्तार कर लिया जाता, जो स्थान निर्धारित होता, उस पर पुलिस कब्ज़ा कर लेती। इस पर लोगों ने बिना विचार किये 'इसप्लेनेड' नामक स्थान में अधिवेशन आयोजित किया और अध्यक्ष पद से नेली ने भाषण दिया। उन्हें तुरन्त गिरफ्तार कर लिया गया। उनके पति पहले से ही जेल में बन्द थे।


नेली सेनगुप्त वर्ष 1940 और 1946 में निर्विरोध 'बंगाल असेम्बली' की सदस्य चुनी गई थीं। 1947 के बाद वे पूर्वी बंगाल में ही रहीं और 1954 में निर्विरोध पूर्वी पाकिस्तान असेम्बली की सदस्य बनीं।


Nellie Sengupta (1886–1973) was an Englishwoman who fought for Indian Independence. She was elected president of the Indian National Congress at its 47th annual session at Calcutta in 1933.


Born Edith Ellen Gray, she was the daughter of Frederick and Edith Henrietta Gray. She was born and brought up in Cambridge, where her father worked at a club. As a young girl, she fell in love with Jatindra Mohan Sengupta, a young Bengali student at Downing College who lodged at her parental home. Despite parental opposition, she married Jatindra Mohan and returned to Calcutta with him. Nellie as she was known and Jatin had two sons Sishir and Anil.


On returning to India, Nellie's husband Jatindra Mohan started a very successful career as a lawyer in Calcutta. However, in 1921 he joined the Indian freedom struggle and was Mahatma Gandhi's right-hand man in Bengal apart from being the Mayor of Calcutta for three terms and the head of the Legislative Assembly. Nellie joined her husband in participating in the Non-Cooperation Movement of 1921. After his imprisonment during the Assam-Bengal Railwaymen's strike, she forcefully protested against the District authorities imposition of a ban on assembly, addressed mass meetings and courted arrest. She defied the law by selling Khadi (hand-spun cloth) door to door. In 1931 she suffered four months' imprisonment at Delhi for addressing an unlawful assembly. Jatin was imprisoned in Ranchi and died in 1933.


During the turmoil of the Salt Satyagraha many senior Congress leaders were imprisoned. Pandit Madan Mohan Malviya the President elect of the Congress was arrested before the Calcutta Session of 1933. Nellie Sengupta was elected in his place, thus becoming the third woman, and the second European-born woman to be elected.


She was also elected as an Alderman to the Calcutta Corporation in 1933 and 1936. She was also elected on a Congress ticket to the Bengal Legislative Assembly in 1940 and 1946. During the Second World War she drew attention to the misbehaviour of foreign troops.



Awards
Padma Vibhushan, 1973