रासीपुरम कृष्णस्वामी लक्ष्मण (जन्म- 24 अक्टूबर, 1921)

October 24, 2017

रासीपुरम कृष्णस्वामी लक्ष्मण  जन्म- 24 अक्टूबर, 1921 - मृत्यु: 26 जनवरी, 2015) को भारत के एक प्रमुख व्यंग-चित्रकार के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त है। अपने कार्टूनों के ज़रिए आर. के. लक्ष्मण ने एक आम आदमी को एक व्यापक स्थान दिया और उसके जीवन की मायूसी, अँधेरे, उजाले, ख़ुशी और ग़म को शब्दों और रेखाओं की मदद से समाज के सामने रखा। असाधारण व्यक्तित्व के धनी आर. के. लक्ष्मण ने वक़्त की नब्ज को पहचान कर देश, समाज और स्थितियों की अक्कासी की। लक्ष्मण के कार्टूनों की दुनिया व्यापक है और इसमें समाज का चेहरा तो दिखता ही है, साथ ही भारतीय राजनीति में होने वाले बदलाव भी दिखाई देते हैं।


आर. के. लक्ष्मण का जन्म 24 अक्टूबर, 1921 को मैसूर, कर्नाटक में हुआ था। उनके पिता स्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर नियुक्त थे। पिता की छ: संतान थीं, जिनमें लक्ष्मण सबसे कम उम्र के थे। उनके एक बड़े भाई प्रसिद्ध साहित्यकार आर. के. नारायण का इन्हें पूरा सहयोग प्राप्त था। आर. के. लक्ष्मण ने हाईस्कूल पास करने के बाद ही यह तय कर लिया था कि वह कार्टूनिस्ट के रूप में अपना कैरियर बनाएँगे। बी.ए. के बाद उन्होंने 'मैसूर विश्वविद्यालय' में पढ़ते हुए फ्रीलांस कलाकार के रूप में 'स्वराज अख़बार' के लिए कार्टून बनाने शुरू किए, जिससे उन्हें बहुत ख्याति मिली। साथ ही एनिमेटेड फ़िल्मों में भी लक्ष्मण ने मिथकीय पात्र 'नारद' का चित्रांकन किया।


लक्ष्मण के बड़े भाई आर. के. नारायण एक कथाकार तथा उपन्यासकार थे, जिनकी रचनाएँ 'गाइड' तथा 'मालगुडी डेज़' ने प्रसिद्धि की ऊँचाइयों को छुआ था। आर. के. लक्ष्मण ने उनके लिए भी चित्र बनाए, जो 'हिंदू' समाचार पत्र में छपे। उसके बाद लक्ष्मण राजनीतिक स्थितियों पर कार्टून बनाते हुए निर्भीक तथा बेबाक पत्रकार माने जाने लगे। 'टाइम्स ऑफ़ इण्डिया' में 'यू सेड इट' आज भी लक्ष्मण के कार्टून सम्मानपूर्वक प्रकाशित करता है।


एक कार्टूनिस्ट के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त करने के साथ ही लक्ष्मण ने महत्त्वपूर्ण लेखन भी किया। उनकी आत्मकथा 'टनल टु टाइम' उनकी लेखन क्षमता का प्रमाण सामने लाती है। आर. के. लक्ष्मण के कार्टूनों में एक आम आदमी को प्रस्तुत करती एक छवि जितनी सादगी भरी है, उतनी ही पैनी भी होती है। लक्ष्मण ने जिस आम आदमी को केंद्र में रख कर सृजन किया, उस आदमी की पीड़ा को उन्होंने न सिर्फ़ महसूस किया, बल्कि उसे रेखाओं की मदद से व्यापक सरोकारों से जोड़ा। अपने समय और समाज से मुठभेड़ करते हुए लक्ष्मण ने हमेशा ही बहुत ही सलीक़े से अपनी बात हमारे सामने रखी। लक्ष्मण के कार्टूनों की एक बड़ी ख़ूबी यह भी है कि उन्होंने हर उस व्यक्ति को अपने सृजन का विषय बनाया, जो उन्हें मुनासिब लगा। व्यक्ति के पद और प्रभाव की वजह से उन्होंने कभी भी किसी तरह का समझौता नहीं किया। दरअसल यह उस आम आदमी का ही जीवट है, जो वक़्त पड़ने पर बड़े से बड़े आदमी की आँखों में आँखें डालकर तन कर बात करता है। लक्ष्मण का यह आदमी जीवन के सुख-दुख को एक-दूसरे से बाँटता हुआ जीवन में नए रंग भी भरता है और जीने का अंदाज़ भी सिखाता है।


प्रमुख पुस्तकें
टनल टु टाइम (आत्मकथा)
द बेस्ट ऑफ़ लक्षमण सीरीज
दि एलोक्वोयेन्ट ब्रश
द मेसेंजर
होटल रिवीयेरा
सर्वेन्ट्स ऑफ़ इंडिया
'कॉमन मैन' कार्टून के निर्माता


अपने कार्टूनों के जरिए आर.के. लक्ष्मण ने एक आम आदमी को एक ख़ास जगह दी। हाशिये पर पड़े आम आदमी के जीवन की मायूसी, अंधेरे, उजाले, खुशी और गम को शब्द चित्रों के सहारे दुनिया के सामने रखा। लक्ष्मण के कार्टूनों की दुनिया काफ़ी व्यापक है और इसमें समाज का चेहरा तो दिखता ही है, साथ ही भारतीय राजनीति में होने वाले बदलाव भी दिखाई देते हैं। भ्रष्टाचार, अपराध, अशिक्षा, राजनीतिक पार्टियों के छलावों से जो तस्वीर निकल कर आती है वो है आर. के लक्ष्मण का आम आदमी की। आम आदमी सिर्फ जिंदगी की मुश्किलों से लड़ता है, उसे चुपचाप झेलता है, सुनता है, देखता है, पर बोलता नहीं, यही वजह है कि आर. के. लक्ष्मण का आम आदमी ताउम्र खामोश रहा। आर. के. लक्ष्मण का आम आदमी शुरू-शुरू में बंगाली, तमिल, पंजाबी या फिर किसी और प्रांत का हुआ करता था लेकिन काफ़ी कम समय में आम आदमी की पहचान बन गया ये कार्टून टेढा चश्मा, मुड़ी-चुड़ी धोती, चारखाना कोट, सिर पर बचे चंद बाल। लक्ष्मण का आम आदमी पूरी दुनिया में ख़ास बन गया था। 1985 में लक्ष्मण ऐसे पहले भारतीय कार्टूनिस्ट बन गए जिनके कार्टून की लंदन में एकल प्रदर्शनी लगाई गई। लंदन की उसी यात्रा के दौरान वो दुनिया के जाने-माने कार्टूनिस्ट डेविड लो और इलिंगवॉर्थ से मिले- ये वो शख्स थे जिनके कार्टून को देखकर लक्ष्मण को कार्टूनिस्ट बनने की प्रेरणा मिली थी। लक्ष्मण की काबीलीयत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि लंदन का अखबार 'दि इवनिंग स्टैंडर्ड' ने उन्हें एक समय डेविड लो की कुर्सी संभालने का ऑफर दिया था। लक्ष्मण के कार्टून फिल्मों में भी इस्तेमाल हुए। फ़िल्म 'मिस्टर एंड मिसेज' और तमिल फ़िल्म 'कामराज' के लिए लक्ष्मण ने कार्टून बनाए। लक्ष्मण के बड़े भाई आर. के. नारायण की कृति "मालगुडी डेज" को जब टेलीविज़न पर दिखाया गया तो उसके लिए भी लक्ष्मण ने स्केच तैयार किये। लक्ष्मण का आम आदमी उस वक़्त फिर ख़ास हो उठा जब डेक्कन एयरलाइंस की सस्ती विमान सेवा शुरू हुई। एयरलाइंस के संस्थापक कैप्टन गोपीनाथ अपने सस्ते विमान के लिए प्रतीक चिह्न की तलाश में थे, और इसके लिए उन्हें लक्ष्मण के आम आदमी से बेहतर कुछ और नही मिल सकता था।


र. के. लक्ष्मण के स्मृति में उनकी जन्म तिथि (24 अक्टूबर) पर जारी गूगल का डूडल
आर. के. लक्ष्मण को उनके महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए कई सम्मान व पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं-


पद्म भूषण
पद्म विभूषण
रेमन मेग्सेसे पुरस्कार (1984)
बी. डी. गोयनका पुरस्कार
दुर्गा रतन स्वर्ण पदक



Rasipuram Krishnaswami Iyer Laxman (24 October 1921 – 26 January 2015) was an Indian cartoonist, illustrator, and humorist.He was best known for his creation The Common Man and for his daily cartoon strip, "You Said It" in The Times of India, which started in 1951.


Laxman started his career as a part-time cartoonist, working mostly for local newspapers and magazines. While as a college student, he illustrated his older brother R. K. Narayan's stories in The Hindu. His first full-time job was as a political cartoonist for The Free Press Journal in Mumbai. Later, he joined The Times of India, and became famous for The Common Man character.


R. K. Laxman was born in Mysore in 1921 in Tamil speaking Iyer family.His father was a headmaster and Laxman was the youngest of eight children: namely, six sons and two daughters. His elder brother is novelist R. K. Narayan. Laxman was known as "Pied Piper of Delhi".


Laxman was engrossed by the illustrations in magazines such as The Strand, Punch, Bystander, Wide World and Tit-Bits, before he had even begun to read. Soon he was drawing on his own, on the floors, walls and doors of his house and doodling caricatures of his teachers at school; praised by a teacher for his drawing of a peepal leaf, he began to think of himself as an artist in the making.[10] Another early influence on Laxman was the work of the world-renowned British cartoonist, Sir David Low (whose signature he misread as "cow" for a long time) that appeared now and then in The Hindu. Laxman notes in his autobiography, The Tunnel of Time:


I drew objects that caught my eye outside the window of my room – the dry twigs, leaves and lizard-like creatures crawling about, the servant chopping firewood and, of course, and number of crows in various postures on the rooftops of the buildings opposite.


Laxman was the captain of his local "Rough and Tough and Jolly" cricket team and his antics inspired the stories "Dodu the Money Maker" and "The Regal Cricket Club" written by his brother, Narayan. Laxman's idyllic childhood was shaken for a while when his father suffered a paralytic stroke and died around a year later, but the elders at home bore most of the increased responsibility, while Laxman continued with his schooling.


After high school, Laxman applied to the J. J. School of Art, Bombay hoping to concentrate on his lifelong interests of drawing and painting, but the dean of the school wrote to him that his drawings lacked "the kind of talent to qualify for enrolment in our institution as a student", and refused admission.He finally graduated with a Bachelor of Arts from the University of Mysore. In the meantime he continued his freelance artistic activities and contributed cartoons to Swarajya and an animated film based on the mythological character Narada.


Laxman's earliest work was for newspapers Rohan and magazines including Swarajya and Blitz. While still at the Maharaja College of Mysore, he began to illustrate his elder brother R. K. Narayan's stories in The Hindu, and he drew political cartoons for the local newspapers and for the Swatantra. Laxman also drew cartoons for the Kannada humour magazine, Koravanji (which was founded in 1942 by Dr M. Shivaram who had a clinic in the Majestic area of Bangalore. He started this monthly magazine, dedicating it to humorous and satirical articles and cartoons. Shivaram himself was an eminent humourist in Kannada. He encouraged Laxman.)


Laxman held a summer job at the Gemini RohanStudios, Madras. His first full-time job was as a political cartoonist for The Free Press Journal in Mumbai, where Bal Thackeray was his cartoonist colleague. In 1951, Laxman joined The Times of India, Mumbai, beginning a career that spanned over fifty years. His "Common Man" character, featured in his pocket cartoons, is portrayed as a witness to the making of democracy. Anthropologist Ritu G. Khanduri notes, "R. K. Laxman structures his cartoon-news through a plot about corruption and a set of characters. This news is visualized and circulates through the recurring figures of the mantri (minister), the Common Man and the trope of modernity symbolized by the airplane (2012: 304)."


Laxman also created a popular mascot for the Asian Paints Ltd group called "Gattu" in 1954. He also wrote a few novels, the first one of which was titled The Hotel Riviera.His cartoons have appeared in Hindi films such as Mr. & Mrs. '55 and a Tamil film Kamaraj. His creations also include the sketches drawn for the television adaptation of Malgudi Days which was written by his elder brother R. K. Narayan, directed by Shankar Nag, and a Konkan coast based Hindi sitcom, Wagle Ki Duniya. Laxman also drew caricatures of David Low, T.S. Eliot, Bertrand Russell, J.B. Priestly and Graham Greene.


Laxman was first married to Bharatanatyam dancer and film actress Kumari Kamala Laxman, who began her film career as a child actress named "Baby Kamala" and graduated into adult roles under the name "Kumari Kamala" ("Miss Kamala"). They had no children and after their divorce Laxman married a woman whose first name was again Kamala. This was the author and children's book writer Kamala Laxman. In a cartoon series named "The star I never met" in film magazine Filmfare he painted a cartoon of Kamala Laxman, with the title "The star I only met!" The couple had a son Srinivas, who worked for a while with The Times of India too.


In September 2003, Laxman was affected by a stroke which left him paralysed on his left side. He partly recovered from its effects.


On the evening of 20 June 2010, Laxman was admitted to Breach Candy Hospital in Mumbai after being transported by an air ambulance from Pune.


In October 2012 Laxman celebrated his 91st birthday in Pune. During a private gathering at his residence, Laxman cut the cake and was presented a DVD of a documentary titled The Brainy Crow by his fan Rajvardhan Patil, depicting the life and survival of the favourite bird of the cartoonist. Shiv Sena chief Bal Thackeray, who had a past association with Laxman as a cartoonist, sent birthday greetings to him, family sources said. Scientist Jayant Narlikar and Symbiosis University chancellor S. B. Mujumdar also came to greet him on the occasion.


Laxman died at the age of 93 at Deenanath Mangeshkar Hospital in Pune on 26 January 2015, which incidentally happened to be India's Republic Day. He was hospitalized on 23 January for urinary tract infection and chest-related problems that ultimately led to multi-organ failure.He had reportedly suffered multiple strokes since 2010.


A cartoon that Laxman had made following the successful landing of Mangalyaan on Mars was posted by the Indian Space Research Organisation on its Facebook and Twitter pages on 27 January.Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis announced that Laxman would be accorded a state funeral and a memorial would be built in his honour. Laxman's body was kept at the Symbiosis Institute's Pune premises near the "Common Man" statue and his body was cremated at the Vaikunth crematorium.