देशबंधु गुप्त (जन्म- 14 जुलाई, 1900)

July 14, 2017

देशबंधु गुप्त (जन्म- 14 जुलाई, 1900, पानीपत, हरियाणा; मृत्यु- 1951) प्रसिद्ध राष्ट्र भक्त, स्वतंत्रता सेनानी और पत्रकार थे। अपने विद्यार्थी जीवन में ही देशबंधु गुप्त राष्ट्रीय आन्दोलन में कूद पड़े थे। उनसे प्रभावित होकर ही लाला लाजपत राय ने उन्हें अपने साथ ले लिया था। गुप्त जी में संगठन करने की बड़ी क्षमता थी। वर्ष 1942 में 'भारत छोड़ो आन्दोलन' के दौरान इन्हें गिरफ़्तार किया गया और फिर 1945 में ही ये जेल से बाहर आ सके। एक पत्रकार के रूप में भी देशबंधु गुप्त जाने जाते थे। स्वामी श्रद्धानन्द ने इन्हें राष्ट्रीय पत्र 'तेज' का सम्पादक नियुक्त किया था। 1948 में 'अखिल भारतीय समाचार पत्र सम्पादक सम्मेलन' के अध्यक्ष भी आप चुने गए थे। गुप्त जी हमेशा 'जाति प्रथा' का विरोध करते रहे।


देशबंधु गुप्त जी का जन्म 14 जुलाई, 1900 ई. को पानीपत, हरियाणा के एक व्यवसायी परिवार में हुआ था। उनके पिता लाला शादीलाल पक्के आर्य समाजी थे। इनके घर में वैदिक रीति-रिवाजों का पूरी तरह से पालन होता था। इसका पूरा प्रभाव देशबंधु गुप्त के जीवन पर पड़ा। देशबंधु गुप्त की आरम्भिक शिक्षा उन दिनों व्यवसायी लिखा-पढ़ी में प्रचलित महाजनी लिपि में हुई। फिर वे नगरपालिका के स्कूल और अंबाला के 'आर्य वैदिक हाईस्कूल' में भर्ती हुए। देशबंधु गुप्त ने उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली के 'हिन्दू कॉलेज' में प्रवेश लिया। यह उनके जीवन में एक निर्णायक मोड़ था।


जब गुप्त जी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे थे, तब उसी अवधि में कई इतिहास प्रसिद्ध घटनाएं घटीं। महात्मा गाँधी के नेतृत्व में रॉलेट एक्ट के विरोध में पहला व्यापक आन्दोलन चला। जलियाँवाला बाग़ में भीषण हत्याकांड हुआ और भारत की प्रबुद्ध जनता ने एक स्वर से ब्रिटिश राजकुमार की भारत-यात्रा का विरोध किया। विद्यार्थी जीवन में ही देशबंधु गुप्त राष्ट्रीय आन्दोलन में कूद पड़े और गिरफ़्तार कर लिये गए। लाला लाजपत राय गुप्त जी की प्रतिभा से काफ़ी प्रभावित हुए। ये उनकी प्रतिभा ही थी, जिससे प्रभावित होकर लाला जी ने उन्हें अपने साथ ले लिया। देशबंधु गुप्त को आर्य समाज के प्रसिद्ध नेता तथा देशभक्त स्वामी श्रद्धानन्द के साथ जेल में रहने का भी अवसर मिला। महात्मा गाँधी के प्रेरक व्यक्तित्व से भी वे प्रभावित हुए। इस प्रकार उनके विचारों में प्राचीनता और आधुनिकता के संयुक्त दर्शन होते थे।


देशबंधु गुप्त में संगठन की बड़ी क्षमता थी। ब्रिटेन के राजकुमार की भारत यात्रा के समय सरकारी अधिकारियों ने उनके स्वागत के लिए दिल्ली में दलितों की एक सभा का आयोजन किया था। अपनी चतुरता से देशबंधु ने मंच पर कब्ज़ा करके सभा को भंग कर दिया। तभी से उनकी गणना दिल्ली के प्रमुख कांग्रेस जनों में होने लगी। इसके बाद जितने भी राष्ट्रीय आन्दोलन हुए, उन सब में उन्होंने सक्रिय भाग लिया और जेल की सज़ाएं भोगीं। 1942 के 'भारत छोड़ो आन्दोलन' के दौरान भी वे गिरफ़्तार हुए और फिर 1945 में ही जेल से बाहर आ सके।


एक पत्रकार के रूप में भी देशबंधु गुप्त प्रसिद्ध थे। उनकी पत्रकारिता का लाला लाजपत राय के साथ आरंभ हुआ। लालाजी 'वंदेमातरम्' नामक पत्र के लिए बोल कर देशबंधु को लेख लिखवाया करते थे। तभी से उनकी भी इस क्षेत्र में रुचि बढ़ी। वर्ष 1923 में स्वामी श्रद्धानन्द ने अपने राष्ट्रीय पत्र 'तेज' का उन्हें संपादक बना दिया था। आगे चलकर पत्रकार जगत में उन्होंने इतनी प्रसिद्धि पाई कि 1948 में 'अखिल भारतीय समाचार पत्र संपादक सम्मेलन' के अध्यक्ष चुन लिए गए।


देशबंधु गुप्त जीवन-भर राष्ट्रीय और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे। वे आर्य समाज के अनुयायी और सांप्रदायिकता की भावना से दूर थे, परंतु हिन्दुओं को दबाकर अन्य धर्मावलंबियों को आगे बढ़ाना उन्हें स्वीकार नहीं था। वे जाति-प्रथा के प्रबल विरोध थे।


दुर्भाग्य से वर्ष 1951 में एक विमान दुर्घटना में देशबंधु गुप्त का देहांत हो गया। यदि यह विमान दुर्घटना न घटी होती तो वही दिल्ली के प्रथम मुख्यमंत्री बने होते।


Desh Bandhu Gupta (8 February 1938 – 26 June 2017) was an Indian billionaire, philanthropist, entrepreneur and the founder of Lupin Limited, a multinational pharmaceutical company.
Gupta was born on 30 November 1938 in Rajgarh, Alwar, Rajasthan, and received a master's degree in chemistry from Bombay University.He was eldest of the five siblings.


Gupta was born on 30 November 1938 in Rajgarh, Alwar, Rajasthan, and received a master's degree in chemistry from Bombay University.He was eldest of the five siblings.


Gupta started his career as an associate professor at the Birla Institute of Technology and Science, Pilani, Rajasthan. He quit teaching and decided to be an entrepreneur as he was "not able to implement ideas into practice". He moved to Bombay (now Mumbai) and worked in a small British pharmaceutical manufacturing company.


He founded Lupin in 1968 with a start-up capital of ₹ 5000 borrowing the money from his wife. The first office of Lupin was rented premises in Central Mumbai used for dispatching medicines. Later, with a loan of ₹ 8 lakh from Central Bank of India, he started a factory whose major order was to provide iron and folic acid tablets to the Government of India programmes related to mother and child healthcare.Under his leadership, Lupin became a global pharmaceutical company by entering markets across the globe including US and Japan.


Gupta set up the Lupin Human Welfare & Research Foundation (LHWRF) in October 1988.[3][6] LHWRF was set up with the objective of creating a reproducible and evolving model for sustainable rural development with a simple goal of uplifting families living below the poverty line in rural India.[3] This vision of rural development focuses on holistic development programs that systematically create opportunities and infrastructure, while empowering people in rural areas, to bring about a socio-economic change and ensure the inclusion of rural communities in the nation’s economic progress. Nationally, the Lupin Foundation impacts the lives of 2.8 million people living in about 3,500 villages spread across 9 states – Rajasthan, Maharashtra, Madhya Pradesh, Goa, Uttarakhand, Gujarat, Jammu, Andhra Pradesh, and Sikkim.


Gupta was the recipient of the Ernst and Young Entrepreneur of the Year 2011 in the healthcare sector [8] and the Frost & Sullivan - Lifetime Achievement Award in 2013. In April 2018, he was posthumously inducted into the Hall of Fame at the CNBC TV18 India Business Leader Awards 2018.


In 2015, Forbes estimated Gupta's net worth at $7.2 billion, making him the 254th richest person in the world.


Gupta was married to Manju and lived in Mumbai. They is survived by his wife and five children; four daughters and one son. Their daughter Vinita D. Gupta is based in United States and is Group President and CEO and son Nilesh Gupta is the Managing Director based in India.


Gupta died on 26 June 2017 at Mumbai, aged 79.