सूरज भान (मृत्यु- 6 अगस्त 2006)

August 06, 2017

सूरज भान (जन्म- 1 अक्टूबर, 1928, महलांवली, ज़िला अम्बाला,पंजाब; मृत्यु- 6 अगस्त 2006) भारतीय राजनीतिज्ञ एवं दलित नेता थे। ये उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और बिहार के राज्यपाल रहे।


परिचय एवं शिक्षा
सूरज भान का जन्म एक दलित परिवार में गांव-महलांवली, ज़िला अम्बाला में 1 अक्टूबर, 1928 को हुआ। इन्होंने अपनी शिक्षा अम्बाला में प्राप्त की और पंजाब व कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय से एम.ए., एल.एल.बी. पास किया। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती चमेली देवी सामाजिक कल्याण कार्यो में रूचि रखती थीं। पारिवारिक स्तर पर इनका सुशिक्षित, सुखी व सम्पन्न परिवार था।
श्रीसूरजभान ने भारत सरकार के डाक तार विभाग से देशसेवा का कार्य प्रारम्भ किया। ये प्रारम्भ से ही दलित, पिछड़े वर्गोें तथा मजदूरों के हितों के प्रबल समर्थक रहें। सेवाकाल के दौरान 1952 से 1967 तक वे केवल डाक तार विभाग की यूनियन के ही कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि अन्य विभाग व कामगारों की भलाई के लिये उनके संगठन में भी लगातार अपना समय, सुझाव व सहयोग सक्रिय रूप से देते रहे। जहां पर भी इन वर्गों पर अन्याय हुआ, इन्होंने उसका डटकर मुकाबला किया। इन्होंने किसान आन्दोलन व केन्द्रीय सरकार कर्मचारी हड़ताल के दौरान गिरफ़्तारियां भी दीं तथा तीन माह तक जेल में रहे। आपात काल में तत्कालीन सरकार के तानाशाही रवैये का विरोध करने के कारण मीसा के अन्तर्गत उन्नीस माह तक नजरबन्द रहना पड़ा।


राजनीतिक गतिविधियाँ
सूरजभान का राजनैतिक जीवन परिचय भारतीय जनसंघ से आरम्भ हुआ। वे भारतीय जनसंघ की 1970-1973 तक अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य, 1973-1976 तक भारतीय जनसंघ के अनुसूचित जाति/जनजाति प्रकोष्ठ के इन्चार्ज व हरियाणा प्रदेश के सेक्रेटरी रहे। इन्होंने हरियाणा में दलितों के हितों के लिये संगठित हरिजन संघर्ष समिति के संगठन सचिव का महत्त्वपूर्ण पद संभाला तथा उसका विस्तार पूरे प्रदेश में किया, श्री सूरजभान जी अखिल भारतीय डिप्रेरड क्लासेज लीग के महासचिव भी रहे। ये 1967 में अम्बाला से लोकसभा संसदीय चुनाव जीते। 1968 से 1970 तक व 1977 से 1979 की अवधि में संसद की अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण समिति के सदस्य भी रहे। इसके अतिरिक्त अनुसूचित जाति/जनजाति के सूची संशोधन समिति के अध्यक्ष, 1978 व 1979 में अनुसूचित जाति/जनजाति के संसदीय समिति के महासचिव तथा संसद की (पटीशन कमेटी) के सदस्य भी रहे। इन्होंने संसदीय प्रतिनिधि मंडल के सदस्य के रूप में मिस्र, सूडान, व अल्जीरिया की विदेश यात्रा की।


हरियाणा सरकार में 1987 से 1990 तक राजस्व मंत्री रहे तथा 1996 में प्रधानमंत्री माननीय श्रीअटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कृषि मंत्री भी रहे। सूरजभान जी का बहुमूल्य समय दलितों व पिछड़ों के कल्याण के लिये समर्पित रहा है। 1948 में इन्होंने पंजाब अनुसूचित जाति/जनजाति विद्यार्थी परिषद संघ की स्थापना की तथा 1952 में पंजाब अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण संघ का संगठन किया। सदियों से दलित समुदाय पर हो रहे अत्याचार व अन्याय को इन्होंने कभी सहन नहीं किया। और उसके लिये बराबर संघर्ष करते रहे हैं। माननीय सूरजभान जी एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति हैं। इन्होंने 1969-1970 तक अंग्रेजी पत्रिका ‘‘अपराइट’’ का सम्पादन किया। इनको बागवानी करने का बहुत ही शौक था। ये डिप्टी स्पीकर जैसे व्यस्त पदों पर विराजमान रहकर भी अपना बहुमूल्य समय ज्ञानवर्द्धन के लिये संसद के पुस्तकालय में लगाते रहे हैं। ताकि लोकसभा में रखे जाने वाले विषयों पर बहस के दौरान माननीय सांसदों का उचित मार्ग-दर्शन कर सकें।


ये राज्यपाल के रूप में उत्तर प्रदेश (20 अप्रैल 1998-23 नवम्बर 2000), हिमाचल प्रदेश (नवम्बर 2000- मई 2003) तथा बिहार (1999) में कार्यरत रहे।


Suraj Bhan (1 October 1928 – 6 August 2006) was a scheduled caste leader and an Indian politician from the Bharatiya Janata Party, who was elected to the Lok Sabha on four occasions, and also served as the Deputy Speaker of Lok Sabha, governor of the states of Uttar Pradesh, Himachal Pradesh, and Bihar.


He was born on 1 October 1928 in the village of Mehlanwali in the Yamuna Nagar district of Haryana, and studied MA and LLB at Panjab University and Kurukshetra University .


Suraj Bhan Banswal, started his public life as a volunteer of the Rashtriya Swayamsevak Sangh.[1] . He started his political career with the Bharatiya Jana Sangh which eventually became the Bharatiya Janata Party and dropped his last name "Banswal" after joining active politics. He represented Ambala parliamentary constituency of Haryana in the 4th (1967–1970), 6th (1977–1979), 7th (1979–1984) and the 11th Lok Sabhas (1996–1997). In 1987, he was elected to Haryana assembly and served as Revenue Minister in Devi Lal's government between 1987 and 1989. After the BJP broke alliance with Devi Lal's party, he served as Leader of Opposition in the Haryana assembly (1989–1990).


In 1996, he was named Agriculture minister in First Vajpayee Ministry after which he served as deputy speaker of the 11th Lok Sabha, during the United Front government (Jul 1996 to Feb 1997). He contested 1998 Lok Sabha elections, but lost to Aman Kumar Nagra of the BSP. Afterwards, he took over as Governor of Uttar Pradesh (Apr 1998 - Nov 2000), Himachal Pradesh (Nov 2000 - May 2003), and officiated as Governor of Bihar (1999).


In 2002 Dr Suraj Bhan also joined the race for the post of Vice-President of the country following re-thinking in the BJP over the candidature of former Rajasthan Chief Minister, Bhairon Singh Shekhawat. Certain senior Dalit leaders of the Congress unofficially conveyed that Mrs Sonia Gandhi had no objection to Dr Suraj Bhan’s candidature.


In February 2004, he was appointed as Chairman of Scheduled Castes and Scheduled Tribes(SC/ST) Commission. He died of cardiac arrest following multiple organ failure on 6 August 2006 in New Delhi, while still continuing in the post of the Chairman of SC/ST Commission. He was aged 78.