प्रभा खेतान (जन्म: 1 नवंबर 1942)

November 01, 2017

प्रभा खेतान (जन्म: 1 नवंबर 1942 - मृत्यु: 20 सितंबर, 2009) प्रभा खेतान फाउन्डेशन की संस्थापक अध्यक्षा, नारी विषयक कार्यों में सक्रिय रूप से भागीदार, फिगरेट नामक महिला स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापक, 1966 से 1976 तक चमड़े तथा सिले-सिलाए वस्त्रों की निर्यातक, अपनी कंपनी 'न्यू होराईजन लिमिटेड' की प्रबंध निदेशिका, हिन्दी भाषा की लब्ध प्रतिष्ठित उपन्यासकार, कवयित्री तथा नारीवादी चिंतक तथा समाज सेविका थीं। उन्हें कलकत्ता चैंबर ऑफ़ कॉमर्स की एकमात्र महिला अध्यक्ष होने का गौरव प्राप्त था। वे केन्द्रीय हिन्दी संस्थान की सदस्या थीं।


कोलकाता विश्वविद्यालय से दर्शन शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि लेने वाली प्रभा ने "ज्यां पॉल सार्त्र के अस्तित्त्ववाद" पर पी.एचडी की थी। उन्होंने 12 वर्ष की उम्र से ही अपनी साहित्य यात्रा की शुरुवात कर दी थी और उनकी पहली रचना (कविता) सुप्रभात में छपी थी, तब वे सातवीं कक्षा की छात्रा थी। 1980-1981 से वे पूर्ण कालिन साहित्यिक सेवा में लग गईं। सीने में तकलीफ के बाद कोलकाता के आमरी अस्पताल में उनका उपचार चला तथा हुई बाईपास सर्जरी के दौरान प्रभा खेतान को असामयिक निधन 20 सितम्बर, 2009 को हुआ।


फ्रांसीसी रचनाकार सिमोन द बोउवा की पुस्तक ‘दि सेकेंड सेक्स’ के अनुवाद ‘स्त्री उपेक्षिता’ ने उन्हें काफ़ी चर्चित किया। इसके अतिरिक्त उनकी कई पुस्तकें जैसे बाज़ार बीच बाज़ार के ख़िलाफ़ और उपनिवेश में स्त्री जैसी रचनाओं ने उनकी नारीवादी छवि को स्थापित किया। अपने जीवन के अनछुए पहलुओं को उजागर करने वाली आत्मकथा ‘अन्या से अनन्या’ लिखकर सौम्य और शालीन प्रभा खेतान ने साहित्य जगत को चौंका दिया। डॉ. प्रभा खेतान के साहित्य में स्त्री यंत्रणा को आसानी से देखा जा सकता है। बंगाली स्त्रियों के बहाने इन्होंने स्त्री जीवन में काफ़ी बारीकी से झांकने का बखूबी प्रयास किया। आपने कई निबन्ध भी लिखे। डॉ. प्रभा खेतान को जहाँ स्त्रीवादी चिन्तक होने का गौरव प्राप्त हुआ वहीं वे स्त्री चेतना के कार्यों में सक्रिय रूप से भी आप हिस्सा लेती रहीं। उन्हें 'प्रतिभाशाली महिला पुरस्कार' और टॉप पर्सनैलिटी अवार्ड' भी प्रदान किया गया। साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिये केन्द्रीय हिन्दी संस्थान का 'महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार' राष्ट्रपति ने उन्हें अपने हाथों से प्रदान किया।


पुस्तकें
अपरिचित उजले (1981)
सीढ़ीयां चढ़ती ही मैं (1982)
एक और आकाश की खोज में (1985)
कृ्ष्णधर्मा मैं (1986)
हुस्नोबानो और अन्य कविताएं (1987)
अहिल्या (1988)
लघु उपन्यास
शब्दों का मसीहा सा‌र्त्र
बाज़ार के बीच: बाज़ार के खिलाफ
उपन्यास
आओ पेपे घर चले
तालाबंदी (1991)
अग्निसंभवा (1992)
एडस
छिन्नमस्ता (1993)
अपने -अपने चहरे (1994)
पीली आंधी (1996)
स्त्री पक्ष (1999)
आत्मकथा
‘अन्या से अनन्या’
संपादन
एक और पहचान : कविता संग्रह, 1986
हंस, मासिक, अंक मार्च-2001 (महिला विशेषांक)
पितृसत्ता के नये रूप (स्त्री विमर्श पर लेख) : 2003
सह संपादन, राजेन्द्र यादव, अभय कुमार दुबे के साथ
अनुवाद
‘दि सेकेंड सेक्स’
‘स्त्री उपेक्षिता’


पुरस्कार और सम्मान
प्रभा खेतान ने व्यवसाय से साहित्य, घर से सामाजिक कार्यों तथा देश से विदेशों तक के सफर में अनेक मंजिलें तय कीं। धरातल से शुरू किए अपने जीवन को खुले आकाश की ऊंचाईयों तक पहुंचाने के प्रभा के साहस और क्षमता को कई पुरस्कार-सम्मानों से भी नवाजा गया।


इंटरनेशनल पुरस्कार-सम्मान
रत्न शिरोमणि, इंडिया इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर यूनिटी द्वारा
इंदिरा गांधी सॉलिडियरिटी एवार्ड, इंडियन सॉलिडियरिटी काउसिंल द्वारा
टॉप पर्सनाल्टी एवार्ड (उद्योग), लायन्स क्लब द्वारा
उद्योग विशारद, उद्योग टेक्नोलॉजी फाउण्डेशन द्वारा
भारतीय पुरस्कार-सम्मान
प्रतिभाशाली महिला पुरस्कार, भारत निर्माण संस्था द्वारा
महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन पुरस्कार, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान द्वारा
बिहारी पुरस्कार, के.के. बिड़ला फाउण्डेशन द्वारा
भारतीय भाषा परिषद व डॉ. प्रतिभा अग्रवाल नाट्य शोध संस्थान द्वारा सम्मान।


Prabha Khaitan (1 November 1942 – 20 September 2008) was an Indian novelist, poet, entrepreneur and feminist. She the founding president of the Prabha Khaitan Foundation and was actively involved in women's affairs. Prabha Khaitan founded Figurette, a women's health care company, in 1966. In 1976 she started a leather export company. She was the only female president of the Calcutta Chamber of Commerce.


She won the "talented woman" award and Top Personality award for her contribution to the literature of the Kendriya Hindi Sansthan scholar Rahul Sankrityayan. Her autobiography is titled Anya se Ananya (A life apart).