योगेश्वर दत्त (जन्म- 2 नवंबर, 1982)

November 02, 2017

योगेश्वर दत्त (जन्म- 2 नवंबर, 1982, सोनीपत, हरियाणा) भारत के प्रसिद्ध पहलवान तथा कुश्ती के खिलाड़ी हैं। उन्होंने वर्ष 2012 में ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक में कुश्ती की 60 कि.ग्रा. भारवर्ग की फ़्रीस्टाइल प्रतियोगिता में देश के लिए काँस्य पदक जीता था। वर्ष 2014 में योगेश्वर दत्त ने ग्लास्गो, स्कॉटलैण्ड में आयोजित कॉमनवेल्थ खेलों में 65 कि.ग्रा. भारवर्ग की फ़्रीस्टाइल कुश्ती में कनाडा के पहलवान को परास्त करके भारत को स्वर्ण दिलाया था। उनकी खेल उपलब्धियों पर भारत सरकार ने उन्हें 'राजीव गाँधी खेल रत्न' से सम्मानित किया था। योगेश्वर दत्त को 'योगी' तथा 'पहलवान जी' के उपनाम से भी जाना जाता है।


योगेश्वर दत्त भारत की ओर से कुश्ती में मेडल जीतने वाले तीसरे पहलवान हैं। सबसे पहले 1952 के ओलम्पिक खेलों में भारत के खाशाबा जाधव ने काँस्य पदक जीता था। फिर 2008 के बीजिंग ओलम्पिक में पहलवान सुशील कुमार काँस्य जीतने में कामयाब रहे थे। लंदन ओलम्पिक में एक समय ऐसा लग रहा था कि योगश्वर दत्त मेडल नहीं जीत पाएंगे और 60 कि.ग्रा. भार वर्ग में अंतिम 8 के मुकाबले में रूस के पहलवान से हार गए थे, लेकिन वह भाग्यशाली रहे कि उन्हें कुश्ती के एक नियम का फायदा मिला। उन्हें हराने वाला रूसी पहलवान फ़ाइनल में पहुंच गया और योगेश्वर को रेपचेज राउंड में मौका मिल गया। इसमें उन्हें दो मैच खेलने पड़े। सबसे पहले उन्होंने प्यूर्टोरिको के पहलवान को हराया, फिर दूसरे मुकाबले में ईरान के पहलवान को हराकर काँस्य पर कब्जा कर लिया।


योगेश्वर दत्त ने एशियन क्वालिफाइंग टूर्नामेंट में 65 कि.ग्रा. फ्रीस्टाइल में ओलम्पिक का कोटा हासिल किया था। उन्होंने पहले दौर में कोरिया के जु सोंग किम को 8-1 से हराया था। इसके बाद वियतनाम के जुआन डिंह न्गुयेन को क्वार्टर फ़ाइनल में तकनीकी वर्चस्व के आधार पर हराया। सेमीफ़ाइनल में योगेश्वर ने कोरिया के सेयुंगचुल ली को 7-2 से मात दी थी। इसी के साथ उन्होंने ओलम्पिक में अपनी जगह पक्की कर ली। गौरतलब है कि हर श्रेणी में से शीर्ष दो खिलाड़ियों को ओलम्पिक में जाने का मौका मिलना था, इसी नियम के तहत योगेश्वर को इसका टिकट मिला था।


योगेश्वर दत्त को कुश्ती के गुर स्वर्गीय मास्टर सतबीर भैंसवालिया ने सिखाए थे। सतबीर पेशे से पीटीआई थे और रिटायर होने के बाद वह अखाड़ा चलाने लगे थे। योगेश्वर दत्त को अपने कॅरियर के दौरान कई बार चोट लगी है। वास्तव में वह बचपन से ही चोट का शिकार रहे हैं, लेकिन उन्होंने कुश्ती के प्रति अपने लगाव को कम नहीं होने दिया। उन्होंने 8 साल की उम्र से ही कुश्ती से नाता जोड़ लिया था और अब उनकी सफलता से तो हर कोई परिचित ही है। सोनीपत, हरियाणा के योगेश्वर ने अपनी तैयारी किसी और के साथ नहीं बल्कि वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियन गेम्स में मेडल विजेता रहे बजरंग के साथ की है।


सबसे पहले 2008 के बीजिंग ओलम्पिक में योगेश्वर दत्त भाग लिया था, लेकिन वह क्वार्टरफ़ाइनल में हारकर बाहर हो गए थे। इसकी भरपाई उन्होंने लंदन ओलम्पिक, 2012 में की और 60 कि.ग्रा. भार वर्ग में काँस्य पदक जीता था।
योगेश्वर दत्त के नाम एशियाई खेलों में कई मेडल हैं। उन्होंने इंचियोन, 2014 में 65 कि.ग्रा. भार वर्ग में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। इससे पहले वह दोहा एशियाई खेल, 2006 में 60 किलो भार वर्ग में काँस्य जीत चुके थे।
कॉमनवेल्थ खेलों में योगेश्वर के रिकॉर्ड का भारत में कोई सानी नहीं है। उन्होंने दिल्ली कॉमनवेल्थ खेल, 2010 और ग्लास्गो कॉमनवेल्थ खेल, 2014 में स्वर्ण जीता था।
योगेश्वर की उलब्धियों को देखते हुए उन्हें 2012 में 'राजीव गाँधी खेल रत्न' से सम्मानित किया गया था।

योगेश्वर दत्त ब्राजील में आयोजित रियो ओलम्पिक, 2016 के लिए भारत की ओर से कुश्ती में पदक जीतने वाले प्रमुख दावेदार थे, किंतु वे अपना पहला ही मुकाबला हारकर इस प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गए। उन्हें मंगोलियाई पहलवान गैंजोरिंग मंदाकनरन ने 3-0 से शिकस्त देकर पदक की दौड़ से बाहर कर दिया। 65 किलोग्राम वर्ग में योगेश्वर दत्त मंगोलियाई पहलवान के सामने अपनी चुनौती दमदार ढंग से पेश नहीं कर पाए। योगेश्वर दत्त के लिए कांस्य पदक हासिल करने की उम्मीद तभी बन पाती, जब मंदाकनरन फ़ाइनल तक पहुंचते, लेकिन मंदाकनरन क्वार्टर फ़ाइनल से आगे नहीं बढ़ पाए और इस तरह योगेश्वर दत्त के रियो ओलंपिक में पदक हासिल करने का सपना टूट गया।


रियो ओलम्पिक में भारत की मात्र दो महिला खिलाड़ी ही पदक जीत सकीं। साक्षी मलिक महिलाओं की कुश्ती स्पर्धा में भारत की ओर से काँस्य पदक जीतने में सफल रहीं। जबकि बैडमिंटन में पी. वी. सिंधु ने भारत के लिए रजत पदक हासिल किया।


Yogeshwar Dutt (born 2 November 1982) is an Indian freestyle wrestler. At the 2012 Summer Olympics, he won the bronze medal in the 60 kg category. He was awarded the Padma Shri by the Government of India in 2013. He won a gold medal at the 2014 Commonwealth Games.


Yogeshwar had lost his father on 3 August 2006 just nine days before he boarded the flight to Doha for the Asian Games. He also sustained a knee injury, but despite all the emotional and physical trauma he managed to win the bronze in the 60 kilogram category at the 15th Asian Games at Doha.


At the 2010 Delhi Commonwealth Games, Yogeshwar overcame a career-threatening knee injury to win the 60 kg title. Yogeshwar, who went past Australian Farzad Tarash (16–0, 17–0), South African Marius Loots (7–1) and England's Sasha Madyarchyk (4–4, 8–0) on his way to the final, came up with an exceptionally skillful performance to win the gold for India.


On 12 August 2012, Yogeshwar Dutt provided a late boost to India's medals tally in the 2012 London Olympics by claiming a memorable bronze in the Men's freestyle 60 kg, thus becoming the third Indian wrestler to win an Olympic medal after K D Jadhav in 1952 and Sushil Kumar in 2008 and 2012.


He had defeated North Korean Ri Jong-Myong in the bronze medal bout thus winning the fifth medal for Indian contingent at the London Olympics 2012.


Earlier, Yogeshwar qualified for the 2012 Olympics by winning a silver medal at an Asian qualification tournament in Astana, Kazakhstan where he lost to Iranian Masoud Esmaeilpour (2–3, 0–1) in the final.


At the Olympics he lost to the Russian B Kudukhov 1–0, 2–0 and was knocked out from the pre-quarterfinal round. He got a chance to contest in the repechage rounds as Kudukhov reached the finals of the event.


In his first repechage round he went on to beat Franklin Gómez of Puerto Rico with a score of 1–0, 1–0. He got lucky against his opponent, winning the toss on both the occasions to earn a clinch position. Yogeshwar then scored 7–5 to beat Masoud Esmaeilpour with an aggregate of counted points 3–1 in Repechage Round 2. Esmaeilpour had beaten Yogeshwar at the Asian qualifications earlier that year.


He finally beat his North Korean opponent to clinch the bronze medal (0–1, 1–0, 6–0). He was exceptional in the last round, and clinched it in just 1:02 minutes.


Yogeshwar Dutt won the gold medal in the men's 65 kg freestyle category by beating Canada's Jevon Balfour 10–0 in the finals.


Yogeshwar had earlier beaten Alex Gladkov of Scotland 4–0 in the pre-quarters and then easily defeated another Scottish wrestler Gareth Jones in the quarterfinals by employing his trademark Fitele (leg twisting) technique that he had used while winning the bronze medal at the 2012 London Olympics. In the semifinals, Yogeshwar successfully used his favourite technique again to get the better of Sri Lanka's Chamara Perera in just two minutes and three seconds. Yogeshwar won with a 0–5 verdict after taking a 10–0 lead on technical points.


Yogeshwar Dutt won the Gold in the 65 kg freestyle wrestling category by defeating Zalimkhan Yusupov of Tajikistan in the final at the Asian games 2014. Dutt won a closely fought final 1–0. Earlier, he defeated the opponent from China in the semifinal by Fall in another closely fought bout in which Dutt was trailing almost till the end. He defeated Jinhyok Kang of North Korea in the quarterfinal.


In 2015, he was clubbed into the ‘Icon’ category by Haryana Hammers– one of the six teams playing under the first edition of Pro Wrestling League (PWL), which was held from 10 to 27 December in six Indian cities.