तपन राय चौधरी (मृत्यु: 26 नवंबर, 2014)

November 26, 2017

तपन राय चौधरी (जन्म: 8 मई, 1926 - मृत्यु: 26 नवंबर, 2014) एक भारतीय इतिहासकार थे। तपन राय चौधरी ब्रिटिश भारतीय इतिहास, भारतीय आर्थिक इतिहास और बंगाल के इतिहास के विशेषज्ञ थे। वह वर्ष 1993 में ऑक्सफोर्ड से सेवानिवृत्त हुए। तपन राय चौधरी को सन 2007 में भारत सरकार द्वारा साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।


जीवन परिचय
तपन राय चौधरी का जन्म वर्तमान में दक्षिणी बांग्लादेश में स्थित बंगाल की खाड़ी के उत्तरी किनारे के बरिसाल में 8 मई 1926 (ब्रिटिश भारत) को हुआ था। तपन राय ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से 25 वर्ष की उम्र में डी. फिल प्राप्त की। तपन राय ने नीदरलैंड के हेग में स्थित डच ईस्ट इंडिया कंपनी के अभिलेखागार और ऑक्सफोर्ड के बल्लीओल कॉलेज में वर्ष 1953-1957 के बीच दूसरी डी. फिल पर कार्य किया। प्रोफ़ेसर राय चौधरी वर्ष 1973 से वर्ष 1993 के बीच सेंट एंटनी कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में आधुनिक दक्षिण एशियाई इतिहास के रीडर थे। एंटनी कॉलेज में प्रोफ़ेसर राय चौधरी को इंडियन हिस्ट्री और सिविलाइजेशन का एड होमिनेन पद प्रदान किया गया।[


मुख्य पुस्तकें


बंगाल अंडर अकबर एंड जहाँगीर
जेन कंपनी इन कोरोमंडल
यूरोप रिकंसीडर्ड: परसेप्सन ऑफ द वेस्ट इन नाइंटिथ सेंचुरी ऑफ़ बंगाल
द कैम्ब्रिज इकोनामिक हिस्ट्री ऑफ इंडिया (इरफ़ान हबीब के साथ सह-संपादित)
बंगालनामा (2007)
द वर्ल्ड इन अवर टाइम

अमेरिकन हिस्टोरिकल एसोसिएशन द्वारा वर्ष 1982 में वातुमुल्ल पुरस्कार
डॉक्टर ऑफ़ लेटर्स, वर्ष 1993, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय
डॉक्टर ऑफ़ लेटर्स, कलकत्ता विश्वविद्यालय द्वारा मानद उपाधि
डॉक्टर ऑफ़ लेटर्स, बर्दवान विश्वविद्यालय द्वारा मानद उपाधि
वर्ष 2007 में पद्म भूषण
वर्ष 2010 में राष्ट्रीय अनुसंधान प्रोफ़ेसर

भारतीय मूल के मशहूर इतिहासकार तपन राय चौधरी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे। वह अपने पीछे पत्नी प्रतिमा और बेटी सुकन्या को छोड़ गए। इनका निधन बुधवार 26 नवंबर, 2014 को ऑक्सफोर्ड (इंग्लैंड) में हुआ। एक साल पहले उन्हें दौरा पड़ा था। इसके बाद वह इससे उबर नहीं पाए।


Tapan Raychaudhuri (8 May 1926 – 26 November 2014) was an Indian historian specialising in British Indian history, Indian economic history and the History of Bengal.


He was the son of Amiya Kumar Raychaudhuri, the last zamindar of Kirtipasha in Barisal district of eastern Bengal. He was a nephew of Hem Chandra Raychaudhuri through the latter's wife, who was from the Kirtipasha family.


He was a student of Ballygunge Government High School, Calcutta and Barisal Zilla School,Scottish Church College, Calcutta, where he completed his I.A. and finally Presidency College, Calcutta, where he completed his B.A. (Hons.) in history with a high first class.He completed his first D.Phil. in history at Calcutta University under the supervision of Sir Jadunath Sarkar and his second D.Phil. at Balliol College, Oxford under the supervision of Dr. C.C. Davies.


He started his career as a lecturer at the Department of Islamic History and Culture, Calcutta University. After his return from Britain he became a deputy director of the National Archives of India. He was a reader and then professor of history and director of the Delhi School of Economics and also of the department of history of Delhi University.


He was first a reader in Modern South Asian History and then professor of Indian History and Civilization and fellow of St. Antony's College, Oxford from 1973-93. He was an emeritus fellow of St. Antony's College, Oxford after retirement.


He became a national research professor in India in 2010


Awards
Watumull Prize awarded by the American Historical Association, 1982. (jointly with Irfan Habib) for the Cambridge Economic History of India.
Doctor of Letters 1993, University of Oxford
Doctor of Letters honoris causa by the University of Calcutta
Doctor of Letters honoris causa by the University of Burdwan
Padma Bhushan in 2007 in recognition to his contributions to history.
He died at home in Oxford (England) on 26 November 2014, after suffering a stroke.