गजानन त्र्यंबक माडखोलकर (मृत्यु- 27 नवम्बर, 1976)

November 27, 2017

गजानन त्र्यंबक माडखोलकर (जन्म- 28 दिसम्बर, 1900, मुंबई, महाराष्ट्र; मृत्यु- 27 नवम्बर, 1976) मराठी उपन्यासकार, आलोचक तथा पत्रकार थे। माडखोलकर अपनी काव्यमयी भाषाशैली के लिये बहुत प्रसिद्ध थे। इन्होंने अपना साहित्यिक जीवन ‘रवि किरण मंडल’ नामक कवि समाज के सदस्य के रूप में कविता से आरंभ किया।


परिचय
गजानन त्र्यंबक माडखोलकर का जन्म 28 दिसम्बर, 1900 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था। ये मराठी उपन्यासकार, आलोचक तथा पत्रकार थे। मराठी भाषा में राजनीतिक उपन्यास-लेखन के आरंभकर्ता और अपनी काव्यमयी शैली के लिए प्रसिद्ध हैं। इन्होंने अपना साहित्यिक जीवन ‘रवि किरण मंडल’ नामक कवि समाज के सदस्य के रूप में कविता से आरंभ किया। किंतु बाद में इनकी ख्याति समालोचक और उपन्यासकार के रूप में अधिक हुई।


माडखोलकर के कुछ आलोचकों ने उनकी कथात्मक रचनाओं में स्त्री-पुरुष संबंधों की स्पष्ट व्याख्या को श्लीलता की मर्यादा से परे बताया है। संस्कृत काव्यशास्त्र के ज्ञाता और अभिजात रसवादी होने पर भी वे आधुनिकता को सहानुभूति से देखते थे।


कृतियाँ
गजानन त्र्यंबक माडखोलकर की प्रमुख समालोचनात्मक रचनाएँ हैं- ‘विष्णु कृष्ण चिपलूषकर’ और ‘वाङ्मय विलास’।
उपन्यासों में प्रमुख हैं- ‘मुक्तात्मा’, ‘शाप’, ‘भंग लेते देउल’, ‘दुहेरी जीवन’, ‘प्रभदूरा’, ‘डाक बंगला’, ‘चंदनबाड़ी’ आदि।
‘दुहेजी जीवन’ को 1942 में सरकार ने जब्त कर लिया था। माडखोलकर की कई रचनाओं के हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुके हैं।
प्रवास वर्णन- 'दक्षिणेश्वर', 'माझा अमरिकेचा प्रवास'।
कहानी संग्रह- 'शुक्राचे चांदणी' (शुक्र की चाँदनी) इत्यादि।


Gajanan Tryambak Madkholkar  (December 28, 1900 – November 27, 1976) was a Marathi novelist and a literary critic from Maharashtra, India.


Madkholkar was born on December 28, 1900, in Mumbai. His father, a Karhade Brahmin priest who was financially well-off, brought up Madkholkar in a strict, highly orthodox Hindu environment.


At his age 18, Madkholkar failed in the high school matriculation examination, and abandoned his formal studies. However, he extensively read Marathi, Sanskrit, and English literature. He also carefully studied the history of Italy and Ireland.


At his age 19, Madkholkar wrote a critical article titled Keshavasutancha Sampraday (केशवसुतांचा संप्रदाय). It got published in Navayug (नवयुग) magazine and received much acclaim.


At his age 21, Madkholkar started writing political articles. His first four articles concerned Sinn Féin movement in Ireland; they got published in the reputed Kesari (केसरी) newspaper.


At his age 22, Madkholkar wrote his critical book Adhunik Kawi-Panchak (आधुनिक कविपंचक). This book too received high acclaim.


In 1924, Madkholkar joined the editorial board of the Pune weekly Maharashtra (महाराष्ट्र). In 1944, he became the editor of the Nagpur daily Tarun Bharat (तरुण भारत).


Madkholkar wrote ten critical books, twelve novels, six one-act plays, two collections of his short stories, and a few poems.


He presided over Marathi Sahitya Sammelan in Belgaum in 1946.


List of novels
नवे संसार (Nave Samsār) (1941)
मुक्तात्मा (Muktātmā) (1933)
चंदनवाडी (Chandanavāḍi) (1943)
मुखवटे (Mukhvate)
उद्धार (Uddhār)
कांता (Kāntā)
प्रमद्वरा (Pramadvari)
भंगलेलें देऊळ (Bhangalelen Deuḷ)
दुहेरी जीवन (Duherī Jīvan)
शाप (Śāp) (1936)
नागकन्या (Nāgakanyā)
डाक बंगला (Ḍāk Banglā)