रजनीकांत (जन्म- 12 दिसम्बर, 1950)

December 12, 2017

शिवाजी राव गायकवाड़ उर्फ रजनीकांत (जन्म- 12 दिसम्बर, 1950, बैंगलोर, कर्नाटक) की लोकप्रियता को शब्दों में नहीं आंका जा सकता। तमिल सुपर स्टार रजनीकांत की जिन्हें लोग भगवान की तरह पूजते हैं।[1]अपने बेमिसाल और अनोखे अंदाज की वजह से वह तमिल क्षेत्र का यह सुपरस्टार पूरे भारतवर्ष में प्रसिद्ध हो गया। इसके बाद उन्होंने एक-एक करके तमिल और हिन्दी सिनेमा मे ऐसी यादगार फ़िल्में दीं जिसने दर्शकों के मस्तिष्क पर गहरी छाप छोड़ी।


परिचय
रजनीकांत का असली नाम शिवाजी राव गायकवाड़ (Shivaji Rao Gaekwad) है। उनका जन्म 12 दिसंबर, 1950 को कर्नाटक के बैंगलोर में एक मराठा परिवार में हुआ था। छोटी सी उम्र में ही उनकी माँ का देहांत हो गया, जिससे उनको बहुत तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। शुरुआत में उन्होंने अपनी पढ़ाई आचार्य पाठशाला से शुरू की। बाद में उन्होंने उच्च शिक्षा बैंगलोर के रामकृष्ण मिशन से पूरा किया। 1981 में लाथा रंगराजन उनकी जीवनसंगिनी बनीं। उनकी दो बेटियां ऐश्वर्या और सौन्दर्या हैं।


रजनीकांत के दो छोटे भाई और एक बहन है। जब वह पांच साल के थे, उनकी माँ जीजाबाई का देहांत हो गया। उसके बाद उनके ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। माँ की मौत के बाद अपनी बदली जीवनशैली में उन्हें अपने समुदाय में कुली का काम करना पड़ा। कुलीगिरी करते हुए शुरुआती शिक्षा उन्होंने आचार्य पाठशाला में पाई और उच्च शिक्षा रामकिशन मिशन में हासिल की। 1966 से 1973 के बीच उन्होंने चेन्नै से लेकर बेंगलुरु तक कई नौकरियां कीं। इसके बाद उन्हें बेंगलुरु ट्रांसपोर्ट सर्विस में बस कंडक्टर की नौकरी मिल गई। फिर शुरू हुई थियेटर की ज़िंदगी। उन्हें थियेटर में पहला मौका मशहूर नाट्य लेखक और निदेशक टोपी मुनिअप्पा ने दिया। महाभारत की कथा पर आधारित एक नाटक में उन्होंने उन्हें दुर्योधन का रोल दिया। उनका अभिनय सराहा गया। इस दौरान उनके सहकर्मी राज बहादुर ने उन्हें मद्रास फ़िल्म इंस्टिट्यूट जॉइन करने की सलाह दी। पढ़ाई का सारा खर्चा उन्होंने उठाया। नाटकों में अभिनय के दौरान मशहूर फ़िल्म निदेशक के. बालचंदर की नजर उन पर गई। बालचंदर ने उन्हें तमिल सीखने और बोलने की सलाह दी। रजनीकांत ने उनकी सलाह मान ली और बाद में तमिल उनके करियर में सहायक हुई। फ़िल्म इंस्टिट्यूट की ट्रेनिंग के बाद उनकी फ़िल्मी गाड़ी चल निकली।


संघर्ष के दिनों में रजनीकांत ने बेंगलुरू में मैसूर मशीनरी में भी कुछ दिन काम किया और चावल के बोरे ट्रकों में लादने का भी काम किया जिसके लिए उन्हें 10 पैसे प्रति बोरा मिलता था। उसके बाद उन्होंने एक परीक्षा दी और बेंगलूर परिवहन सेवा से बस कंडक्टर का लाइसेंस हासिल किया। रजनीकांत 19 मार्च, 1970 को बस चालक राजा बहादुर के साथ नौकरी पर लग गए। रजनीकांत ने फ़िल्मों की दुनियां में 1975 में प्रवेश किया तब वह महज 25 वर्ष के थे और उनकी पहली फ़िल्म ‘रागंगल’ थी। उनके अभिनय की वजह से इस फ़िल्म ने काफ़ी नाम कमाया और धीरे-धीरे इस कंडक्टर ने अपने सिगरेट पीने और चश्में पहनने की स्टाइल की वजह से तमिल फ़िल्मों में तूफान खड़ा कर दिया। तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा उस समय रजनीकांत को गिने-चुने खलनायकों के रुप जाना जाता था।


रजनीकांत ने बतौर एक्टर अपने कैरियर की शुरुआत की तमिल फ़िल्म अपूर्व रागंगा से। जिसमें कमल हासन ने भी एक्टिंग की थी। इस फ़िल्म का निर्देशन किया था के बालचंदर ने। इस फ़िल्म में रजनी को बहुत ही छोटा सा किरदार निभाने को दिया गया था। इस फ़िल्म को बेस्ट तमिल फ़िल्म के लिए नॉमिनेट किया गया था और फ़िल्म ने उस अवॉर्ड को जीता भी। रजनीकांत निर्देशक बालचंदर को हमेशा अपना मेंटर मानते रहे। बॉलीवुड में रजनीकांत ने अंधा कानून फ़िल्म से एंट्री की थी। इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन मेन लीड हीरो थे और उनके साथ थीं हेमा मालिनी। ये फ़िल्म उस साल की सबसे बड़ी हिट थी और इसने बॉक्स ऑफिस पर काफ़ी कमाई की थी। उसके बाद रजनी ने हम, फ़िल्म की जो की काफ़ी हिट रही। मार्च 2011 में रजनीकांत को हेल्थ से जुड़ी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। रजनी की तबियत कुछ समय तक काफ़ी खराब रही और उस वक्त टीवी चैनल्स के द्वारा रिसर्च में पता चला कि रजनीकांत डेड गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला टर्म और ट्विटर का सबसे टॉप का ट्रेंड था। तबियत खराब होने के बावजूद रजनीकांत 2011 में ही रिलीज हुई शाहरुख खान की फ़िल्म रा.वन में नज़र आए 2010 में रजनीकांत और ऐश्वर्या राय की फ़िल्म रोबोट रिलीज हुई थी जो की रजनी की तमिल फिक्शन फ़िल्म एंथिरन का हिन्दी वर्जन थी।


फ़िल्म समीक्षक नमन रामचंद्रन ने रजनीकांत की जीवनी को किताब की शक्ल दी है जिसमें 1975 में उनकी पहली फ़िल्म ‘अपूर्व रगंगल’ से लेकर हिंदी फ़िल्मों ‘अंधा कानून’ और ‘हम’ तक के उनके सफर और ‘बिल्ला’, ‘थलपति’ और ‘अन्नामलाई’ जैसी उनके अंदाज वाली फ़िल्मों से ‘बाशा’, ‘मुथू’, ‘शिवाजी’ और ‘एंथिरन’ तक की यात्रा का वृतांत लिखा है। ‘रजनीकांत : द डेफिनिटिव बायोग्राफी’ में रजनी के बचपन के दिनों से लेकर उनके जीवन के संघर्ष के दिनों को भी बयां किया गया है जब शिवाजी राव गायकवाड़ नाम का यह शख्स बस कंडक्टर के कैरियर के बाद फ़िल्मों का सुपरस्टार बना और लोगों के बीच रजनीकांत नाम से मशहूर हो गया। पेंगुइन द्वारा प्रकाशित इस किताब के अनुसार बस यात्रियों को टिकट देने में रजनीकांत से तेज कोई नहीं था। वह अपने अंदाज में मुसाफिरों को टिकट देते थे और खुले पैसे देते थे। उनके मशहूर अंदाज के चलते ही लोग उनकी बस का इंतज़ार करते थे और सामने से अनेक बसें ख़ाली जाने देते थे। रजनी का यही अंदाज बाद में फ़िल्मों में भी उनकी लोकप्रियता का कारक बना जहां उनके संवाद भी मशहूर हुए।


रजनी ने अपने बस कंडक्टर के दिनों को याद करते हुए बयां किया है, ‘मैं साधारण इंसान हूं। बस कंडक्टर से पहले मैं दफ्तर में काम करता था, कुली था और बढ़ई का काम कर चुका था।’ बीटीएस पर रजनीकांत की मुलाकात राजा बहादुर से हुई जिसे वह आज अपना सबसे अच्छा दोस्त बताते हैं। किताब के पन्ने पलटते हुए पता चलेगा कि बस सेवा समाप्त होने के बाद रजनी और राजा अपने अपने घर जाकर थोड़ी देर आराम करते थे। इसके बाद रजनीकांत हर शाम हनुमंत नगर में राजा के घर पहुंचते और दोनों नाटकों के अभ्यास के लिए निकल जाते जिनका आयोजन वे समय-समय पर बीटीएस संघ के बैनर तले करते थे। दिवंगत रंगकर्मी और अभिनेता शिवाजी गणेशन को याद करते हुए रजनीकांत कहते हैं, ‘मैंने उन्हें देखा, उनकी नकल उतारी। उनकी वजह से मैं सिनेमा जगत में आया।’ रजनीकांत के जीवन की ऐसी अनेक रोचक कहानियां इस किताब में पढ़ने को मिल जाएंगी।


बस कंडक्टर से शुरू होकर दुनिया के अत्यंत पसंदीदा और पूजनीय अभिनेता बनने का सफर तय करने वाले शिवाजी राव गायकवाड़ उर्फ रजनीकांत की कहानी किसी ब्लॉकबस्टर मूवी के लिए बेहतरीन कहानी साबित हो सकती है।


हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन भी उनकी सादगी के प्रशंसक हैं।
अभिनेता शाहरुख़ खान कहते हैं, "भारतीय सिनेमा में उनके जैसा कलाकार आज तक कोई नहीं हुआ है। इस उम्र में भी उनका उत्साह और उनकी मेहनत देखते ही बनती है। रजनीकांत इतने बड़े स्टार हैं लेकिन उनमें घमंड बिलकुल नहीं है। हम सब को उनसे ये सीखना चाहिए। मुझे गर्व है कि मैं रजनीकांत के दौर में पैदा हुआ हूं।
हिंदी ब्लॉकबस्टर 'गोलमाल' के तमिल संस्करण 'थिल्लु मुल्लु' में रजनीकांत की बहन की भूमिका निभाने वाली विजी चंद्रशेखर का मानना है कि हर किसी से एक समान व्यवहार करने की क्षमता ने रजनीकांत को यह कद दिया है। विजी ने कहा कि रजनीकांत सेट पर सभी के साथ अत्यंत सम्मान के साथ पेश आते हैं और सभी को बराबर महत्व देते हैं। भले ही वह लाइट ब्यॉय हो या सहायक कलाकार, रजनीकांत किसी से भेदभाव नहीं करते। विजी ने कहा कि सुपरस्टार हमेशा सफल रहने वाले को नहीं, बल्कि जो सफलता और विफलता का समान रूप से सामना करे और सामान्य बना रहे उसे माना जाता है। फ़िल्म के सेट पर काम के दौरान उनकी सादगी महसूस की। अभिनेत्री ने कहा कि सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि रजनीकांत सफलता और विफलता को समान रूप से लेना भलिभांति जानते हैं।
तमिल फ़िल्म निर्माता लक्ष्मी रामकृष्णन महसूस करते हैं कि रजनीकांत सुपरस्टार इसलिए हैं, क्योंकि वह यह नहीं मानते कि वह अद्वितीय हैं। रामकृष्णन ने कहा कि रजनीकांत सुपरस्टार कहलाना पसंद नहीं करते, लेकिन वह हैं क्योंकि लोगों ने उन्हें यह बनाया है। सुपरस्टार पैदा नहीं होते, बनते हैं। लेकिन, यदि कोई सुपरस्टार बनने के लिए बुरी तरह हाथ-पांव मारता है तो निश्चित रूप से वह विफल होगा।
सी बी एस ई पाठ्यक्रम में
तमिल फ़िल्मों के सुपर स्टार और भगवान माने जाने वाले अभिनेता रजनीकांत अबसी बी एस ई (CBSE) के कक्षा 6 की किताबों में पढ़े जायेंगे। जिसमें उनकी बस कंडक्टर से लेकर एक महानतम अभिनेता बनने तक का सफर है। जो बच्चों को यह सिखायेगा कि अपनी मेहनत और योग्यता के बल पर आदमी फर्श से अर्श पर पहुंच सकता है बस आदमी को कड़ी मेहनत और दृढंसंकल्पी होना चाहिए। CBSE के कक्षा 6 के बच्चों में रजनीकांत का चैप्टर पढ़ाया जायेगा जिसे लिखा है रजनीकांत के उस फैन और मित्र ने जिनका नाम है राव बहादुर। जो उस बस के ड्राईवर हुआ करते थे जिस बस के कंडक्टर रजनीकांत थे। चैप्टर का नाम है 'From Bus Conductor to Superstar'। इस पाठ को पढ़ाने का यही उद्देश्य है कि बिना किसी गॉडफादर की मदद से कोई भी व्यक्ति आम से ख़ास हो सकता है। बोर्ड को लगता है कि रजनीकांत की कहानी आने वाली पीढ़ी के लिए एक आदर्श बनेंगी। इस पाठ में केवल रजनीकांत के संघर्ष की ही कहानी नहीं है बल्कि उनकी दयालुता, उनके प्रेम और सदाचार का भी वर्णन किया गया है। उनकी देश के प्रति समर्पण और इतनी ऊंची जगह पहुंचकर भी एकदम से सरल होना भी पाठ में बताया गया है।


रजनीकांत को 29 अप्रैल को सांस की परेशानी के कारण इसाबेल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उसी दिन छुट्टी भी दे दी गई। इसके बाद उन्हें चार मई को इसी अस्पताल में दोबारा भर्ती कराया गया। 13 मई को उन्हें सांस और दूसरी परेशानियों के कारण श्री रामचंद्र मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया।


Shivaji Rao Gaekwad (born 12 December 1950), known by his mononymous stage name Rajinikanth, is an Indian film actor, who works primarily in Tamil cinema. He began acting in plays while working in the Bangalore Transport Service as a bus conductor. In 1973, he joined the Madras Film Institute to pursue a diploma in acting. Following his debut in K. Balachander's Tamil drama Apoorva Raagangal (1975), his acting career commenced with a brief phase of portraying antagonistic characters in Tamil films.


After earning ₹26 crore (equivalent to ₹55 crore or US$8.6 million in 2016) for his role in Sivaji (2007), he was the highest paid actor in Asia after Jackie Chan at the time. While working in other regional film industries of India, Rajinikanth has also appeared in the cinemas of other nations, including the American film Bloodstone (1988). As of 2014, Rajinikanth has won six Tamil Nadu State Film Awards, four Best Actor Awards and two Special Awards for Best Actor — and a Filmfare Best Tamil Actor Award. In addition to acting, he has also worked as a producer and screenwriter. Apart from his film career, he is also a philanthropist, spiritualist, and serves as an influence in Dravidian politics.


The Government of India has honoured him with the Padma Bhushan in 2000 and the Padma Vibhushan in 2016 for his contributions to the arts. At the 45th International Film Festival of India (2014), he was conferred with the "Centenary Award for Indian Film Personality of the Year".



Rajinikanth was born on 12 December 1950, in a Maratha family in Bangalore, Mysore State (present day Karnataka). His mother was a housewife,[a] and his father Ramoji Rao Gaekwad, a police constable, He was named Shivaji Rao Gaekwad after Chhatrapati Shivaji, a Maratha warrior King, and was brought up speaking Marathi at home and Kannada outside. Rajinikanth's ancestors hailed from Mavadi Kadepathar, Maharashtra and Nachikuppam, Tamil Nadu.He is the youngest of four siblings in a family consisting of two elder brothers (Satyanarayana Rao and Nageshwara Rao) and a sister (Aswath Balubhai). After his father's retirement from work in 1956, the family moved to the suburb of Hanumantha nagar in Bangalore and built a house there.When he was nine years old, he lost his mother.


At the age of six, Rajinikanth was enrolled at the "Gavipuram Government Kannada Model Primary School" where he had his primary education. As a child, he was studious and "mischievous" with a great interest in cricket, football and basketball. It was during this time that his brother enrolled him at the Ramakrishna Math, a Hindu monastery (math) set up by Ramakrishna Mission. In the math, he was taught Vedas, tradition and history, which eventually instilled a sense of spirituality in him.[ In addition to spiritual lessons, he also began acting in plays at the math. His aspiration towards theatre grew at the math and was once given an opportunity to enact the role of Ekalavya's friend from the Hindu epic Mahabharata. His performance in the play received praise from the audience and Kannada poet D. R. Bendre in particular. After sixth grade, Rajinikanth was enrolled at the Acharya Pathasala Public School and studied there till completion of his pre-university course. During his schooling at the Acharya Pathasala, he spent a lot of time acting in plays. In one such occasion, he performed the villainous role of Duryodhana in the play Kurukshetra (Anand iya Vaalka).


Upon completion of his school education, Rajinikanth continued to perform various jobs in the cities of Bangalore and Madras, including that of a coolie and carpenter,and finally ended up being recruited in the Bangalore Transport Service (BTS) as a bus conductor. He began to take part in stage plays after Kannada playwright Topi Muniappa offered him a chance to act in one of his mythological plays. During the time, he came across an advertisement issued by the newly formed Madras Film Institute which offered acting courses. Though his family was not fully supportive of his decision to join the institute, his friend and co-worker Raj Bahadur motivated him to join the institute and financially supported him during this phase.During his stay at the institute, he was performing in a stage play and got noticed by Tamil film director K. Balachander. The director advised him to learn to speak Tamil, a recommendation that Rajinikanth quickly followed.



Rajinikanth began his film career through the Tamil film Apoorva Raagangal (1975). Balachander gave Rajinikanth a relatively small role as the abusive husband of Srividya.The film was controversial upon release, as it explored relationships between people with wide age differences. It received wide critical acclaim as it went on to win three National Film Awards including the award for the Best Tamil Feature at the following year ceremony. A review from The Hindu noted that: "Newcomer Rajinikanth is dignified and impressive". He followed that with Katha Sangama (January 1975), an experimental film made by Puttanna Kanagal in the new wave style. The film was a portmanteau of three short stories which had Rajinikanth playing a small character in the last segment where he appears as a village ruffian who rapes a blind woman in the absence of her husband.[28] His next release was Anthuleni Katha, a Telugu film directed by Balachander.[28] In a remake of his own Tamil film Aval Oru Thodar Kathai (1974), Balachander had Rajinikanth playing a pivotal role for the first time in his career.In subsequent films, he continued to perform a series of negative roles mostly as a womaniser. In Moondru Mudichu — the first film to feature him in a prominent role — he plays a character that "blithely row[s] away" when his friend drowns accidentally in the lake only to fulfill his desire to marry the former's girlfriend. His style of flipping the cigarette made him popular among the audience.


His final release of 1976, Baalu Jenu, yet again saw him performing a role which troubles the female lead.[28] He followed that with similar roles in Avargal,and 16 Vayadhinile.In 1977, he accepted his first-ever lead role in the Telugu film Chilakamma Cheppindi.[33] Though Rajinikanth always refers to K. Balachander as his mentor, it was S. P. Muthuraman who revamped his image. Muthuraman first experimented with him in a positive role in Bhuvana Oru Kelvikkuri (1977), as a failed lover in the first half of the film and a protagonist in the second half. The success of the film brought the duo together for 24 more films till the 1990s.The year saw Rajinikanth playing supporting roles in the majority of the films, with few of them being "villainous". In Gayathri, he was cast as pornographer who secretly films his relationship with his wife without her knowledge, while in Galate Samsara, he played the role of a married man who develops an affair with a cabaret dancer. All in all, he had 15 of his films released during the year, much higher than the previous years.



Critics, such as Cho Ramaswamy, have commented that Rajinikanth has the potential to be successful in Indian politics due to his popularity and fan base alone. In 1995, Rajinikanth began supporting the Indian National Congress after meeting Prime Minister P. V. Narasimha Rao. An opinion poll conducted by the magazine Kumudam predicted that Congress, with Rajinikanth's support, might win up to 130 seats in the Tamil Nadu Assembly. In 1996, when the Congress Party decided to align with All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) for the assembly election in Tamil Nadu, Rajinikanth changed loyalties and supported the Dravida Munnetra Kazhagam (DMK)-Tamil Maanila Congress (TMC) alliance. The TMC used a bicycle as their election symbol and used an image of Rajinikanth riding a bicycle from the film Annamalai in their posters. Rajinikanth said: "Even God cannot save Tamil Nadu if AIADMK returns to power." Rajinikanth wholeheartedly supported the DMK and TMC alliance and asked the people of Tamil Nadu and his fans to vote for that alliance. This alliance had a complete victory in 1996. Rajinikanth also supported the DMK-TMC alliance in the parliamentary election, held the same year. Later in 2004, Rajinikanth said he would personally vote for the Bharatiya Janata Party (BJP) but would not extend his support to any front during the upcoming Indian general election.The party, however, failed to win any seats in Tamil Nadu in the Lok Sabha.


Fans of Rajinikanth in Tamil Nadu have continuously speculated on his entry in politics, particularly to run for Chief Minister of the state. In 2008, a few fans in Coimbatore launched a political party for Rajinikanth, in an attempt to pressure his entry. The party was named the "Desiya Dravadar Makkal Munnetra Kazhagam", with a dedicated party flag and symbol.[142] After learning about this, Rajinikanth submitted an open letter to the media, declaring that he had no connection with these events and requested fans not to indulge in such activities, warning that he would take legal action if they failed to adhere. He also mentioned that he was not interested in politics, and thus was only committed to working in films. He added that nobody can force him to enter politics, just as no one can stop him from entering it.


Rajinikanth announced entry into politics on 31 Dec 2017 and confirmed that his newly formed party will contest in assembly elections in 2021 from all 234 constituencies in Tamilnadu state. His party, he said, would resign if it was unable to fullfill its electoral promises within three years of coming into power.
Rajinikanth married Latha Rangachari, a student of Ethiraj College for Women, who interviewed him for her college magazine. The marriage took place on 26 February 1981, in Tirupati, Andhra Pradesh.The couple has two daughters named Aishwarya Rajinikanth and Soundarya Rajinikanth. Latha runs a school named "The Ashram".


Aishwarya married actor Dhanush on 18 November 2004 and they have two sons, Yathra and Linga.His younger daughter, Soundarya, works in the Tamil film industry as a director, producer and graphic designer. She married industrialist Ashwin Ramkumar on 3 September 2010 and have a son Ved Krishna.
According to Naman Ramachandran, the author of Rajinikanth: The Definitive Biography, most of Rajinikanth's philanthropic activities went unpublicised because he did not want them to be so. In the 1980s, when superstitious beliefs prevented a majority of people from donating eyes, Rajinikanth took the case of campaigning in support of corneal transplantation via television and public speeches. In 2011, Rajinikanth announced his support for the anti-corruption movement led by Gandhian Anna Hazare and offered his marriage hall, the Raghavendra Kalyana Mandapam, in Chennai free of cost for the India Against Corruption members to hold their fast.Rajinikanth's fan associations regularly organise blood donation and eye donation camps and distribute food during his birthday.



Rajinikanth has received numerous awards for many of his films, mostly in Tamil. He received his first Filmfare Award for Best Tamil Actor in 1984 for Nallavanuku Nallavan. Later he received Filmfare Award nominations for his performances in Sivaji (2007) and Enthiran (2010). As of 2014, Rajinikanth has received six Tamil Nadu State Film Awards for his performances in various films.He also received numerous awards from Cinema Express and Filmfans' Association for his on-screen performances and off-screen contributions in writing and producing.


Rajinikanth received the Kalaimamani award in 1984 and the M. G. R. Award in 1989, both from the Government of Tamil Nadu. In 1995, the South Indian Film Artistes' Association presented him with the Kalaichelvam Award. He was honoured with the Padma Bhushan (2000) and the Padma Vibhushan (2016) by the Government of India.He was selected as the Indian Entertainer of the Year for 2007 by NDTV, competing against the likes of Shahrukh Khan. The Government of Maharashtra honoured him with the Raj Kapoor Award the same year. He received the Chevalier Sivaji Ganesan Award for Excellence in Indian Cinema at the 4th Vijay Awards. Rajinikanth was also named one of the most influential persons in South Asia by Asiaweek.He was also named by Forbes India as the most influential Indian of the year 2010.In 2011, he was awarded the Entertainer of the Decade Award by NDTV for the year 2010 by the then Indian Minister for Home Affairs P. Chidambaram.In December 2013, he was honoured by NDTV as one among the "25 Greatest Global Living Legends". In 2014, he was presented with the "Centenary Award for Indian Film Personality of the Year" at the 45th International Film Festival of India held at Goa.