बलराम जाखड़ (मृत्यु- 3 फ़रवरी, 2016)

February 03, 2017

बलराम जाखड़ जन्म: 23 अगस्त, 1923; मृत्यु- 3 फ़रवरी, 2016) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष हैं। बलराम जाखड़ में मध्य प्रदेश राज्य के राज्यपाल भी रहे हैं। डॉ. बलराम जाखड़ ने सातवीं लोक सभा के लिए अपने सर्वप्रथम निर्वाचन के तुरन्त बाद अध्यक्ष पद प्राप्त करके अपने संसदीय जीवन की शुरूआत करने का गौरव प्राप्त किया। उन्हें लगातार दो बार लोक सभा में पूर्ण अवधि के लिए सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुने जाने का अनूठा सम्मान भी प्राप्त हुआ। कृषक से राजनीतिज्ञ बने बलराम जाखड़ ने लोकसभा अध्यक्ष पद की चुनौतियों का पूरी जीवंतता से मुकाबला किया और पूर्ण गरिमा, शालीनता और निष्पक्षता से सभा की कार्यवाही का संचालन किया। उन्होंने अपने दल में सक्रिय भूमिका निभाने तथा इसके जरिए देश के सामाजिक-राजनीतिक जीवन में सक्रिय बने रहने के लिए वर्ष 1989 में अध्यक्ष पद का त्याग कर दिया।


जीवन परिचय
बलराम जाखड़ का जन्म 23 अगस्त, 1923 को पंजाब राज्य के फिरोजपुर ज़िले में पंजकोसी गांव में हुआ था। उनका शैक्षिक जीवन बहुत प्रतिभाशाली रहा। उन्होंने वर्ष 1945 में फॉरमेन क्रिश्चियन कालेज, लाहौर से संस्कृत ऑनर्स में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वह, वस्तुतः बहुभाषाविद् हैं और उन्हें अंग्रेज़ी, संस्कृत, हिन्दी, उर्दू और पंजाबी का गहन ज्ञान है। जाखड़ मूलतः एक कृषक और विशेष रूप से फलोद्यानी हैं। स्नातक स्तर तक शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात् उन्होंने अपने कृषि के पारिवारिक व्यवसाय को अपनाया तथा अपनी कृषि-भूमि पर फलों और अंगूरों के बागों के विकास के लिए आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया। अनेक वर्षों तक कठोर परिश्रम करके वह अरसे से बंजर पड़ी ज़मीनों को हरे-भरे चरागाहों तथा फलते-फूलते फलोद्यानों और अंगूरों के बागों में परिवर्तित करने में सफल हुए जिससे उनकी पैदावार कई गुणा बढ़ गई। फल उगाने के क्षेत्र में जाखड़ की सेवाओं को राष्ट्रीय मान्यता तब प्राप्त हुई, जब वर्ष 1975 में उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा "ऑल इंडिया उद्यान पंडित" की उपाधि प्रदान की गई। इसी वर्ष उन्हें वाशिंगटन में कृषि उत्पादकों के अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने वाले कृषक शिष्टमंडल के नेतृत्व के लिए चुना गया। इसी अवधि के दौरान वह पंजाब सहकारी अंगूर उत्पादक महासंघ तथा राज्य के कृषक मंच के अध्यक्ष भी चुने गए। कृषि के क्षेत्र में उनके योगदान को मान्यता प्रदान करते हुए उन्हें हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार और गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार द्वारा क्रमशः "डॉक्टर ऑफ साइंस" और "विद्या मार्तण्ड" की मानद उपाधियां प्रदान की गईं।


कृषक समुदाय के बीच उनकी नेतृत्व की भूमिका ने ही अन्ततः श्री बलराम जाखड़ को राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय राजनीतिक भूमिका निभाने के लिए अग्रसर किया। जाखड़ वर्ष 1972 में पंजाब विधान सभा के लिए निर्वाचित हुए और तब ही से उनका विधायी जीवन शुरू हुआ। विधान सभा के लिए उनके निर्वाचन के एक वर्ष के भीतर ही उन्हें सहकारिता, सिंचाई और विद्युत उपमंत्री के रूप में मंत्रिपरिषद में शामिल कर लिया गया। वह वर्ष 1977 तक मंत्री रहे। वर्ष 1977 में विधान सभा के लिए पुनः निर्वाचित होने पर उन्हें कांग्रेस (इ.) विधान मंडल पार्टी के नेता के रूप में चुन लिया गया और उस हैसियत से उन्हें पंजाब विधान सभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता प्राप्त हुई। इस पद पर वह जनवरी 1980 में तब तक रहे जब उन्हें फिरोजपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से सातवीं लोक सभा के लिए चुना गया। इस दौरान, पंजाब के मामलों में एक राजनीतिक कार्यकर्ता, विधायक, मंत्री और विपक्ष के नेता के रूप में अपनी सक्रिय भूमिका के माध्यम से जाखड़ पहले ही अपने आप को एक दूरदर्शी और सक्षम प्रशासक सिद्ध कर चुके थे।


बलराम जाखड़ को 22 जनवरी, 1980 को सातवीं लोक सभा का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। यद्यपि जाखड़ को पीठासीन अधिकारी के रूप में पिछला कोई अनुभव नहीं था, तथापि उन्हें सौंपी गई नई भूमिका के बहुत बड़े उत्तरदायित्व से वह बिल्कुल भी विचलित नहीं हुए। अपने यथार्थपरक भूमिका-बोध, स्वयं में पूर्ण विश्वास और अपनी सहज सामान्य सूझ-बूझ के द्वारा जाखड़ सभा के पीठासीन अधिकारी के रूप में अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन करते रहे। उन्हें इस बात की पूरी जानकारी थी कि अध्यक्ष का पद उस लोक सभा के सुचारू और प्रभावी कार्यकरण में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसमें विविध भाषा, संस्कृति, धर्म, क्षेत्र और सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले सदस्य चुनकर आते हैं।


जाखड़ ने सातवीं लोक सभा में सदन की कार्यवाही का जिस तरीके से संचालन किया, उसकी सर्वत्र सराहना की गई और वह सभा के सभी वर्गों के प्रिय बन गए। इसलिए, दिसम्बर, 1984 के आम चुनाव में उनके इस बार राजस्थान के सीकर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से लोक सभा के लिए पुनः निर्वाचित होने पर वह नई सभा की भी अध्यक्षता करने के लिए स्वाभाविक पसंद बने। 16 जनवरी, 1985 को उन्हें एक बार फिर सर्वसम्मति से आठवीं लोक सभा का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। दिसम्बर, 1989 में आठवीं लोक सभा का कार्यकाल पूरा होने पर जब जाखड़ ने अध्यक्ष पद का त्याग किया तो उन्हें स्वतंत्र भारत में लगातार दो बार लोक सभा की पूर्ण अवधि के लिए बने रहने वाले एक मात्र अध्यक्ष का अनूठा गौरव प्राप्त हुआ। यह अवधि (अर्थात् 22 जनवरी, 1980 से 18 दिसम्बर, 1989 तक) एक दशक से मात्र एक माह कम थी।


अध्यक्ष के रूप में बलराम जाखड़ के कार्यकाल में लोक सभा में अनेक प्रक्रियात्मक नवीनताएं और पहल भी देखने को मिलीं। सन् 1952 के बाद पहली बार, अध्यक्ष बलराम जाखड़ की पहल पर सन् 1989 में लोक सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों की विस्तृत समीक्षा की गयी और मई, 1989 में उनमें अनेक परिवर्तन शामिल किये गये। उनके कार्यकाल के दौरान सन् 1985 में संसद द्वारा दल-बदल विरोधी क़ानून पारित किया गया जिसके अन्तर्गत सदस्यों को दल-बदल के आधार पर निरर्ह करने का उपबंध किया गया था। लोक सभा सदस्य (दल-बदल के आधार पर निरर्ह किया जाना) नियम, 1985 को 18 मार्च, 1986 से लागू किया गया।


वर्ष 1991 के आम चुनावों में बलराम जाखड़ सीकर निर्वाचन क्षेत्र से लोक सभा के लिए एक बार फिर निर्वाचित हुए और नई सरकार में कृषि मंत्री बने। वर्ष 1991-96 की अवधि के दौरान केन्द्रीय कृषि मंत्री के रूप में जाखड़ की मुख्य चिंता भारतीय किसानों, जिनकी संख्या देश की कुल जनसंख्या का लगभग 80 प्रतिशत है, के हितों की रक्षा करना था। उन्होंने किसानों के हितों को संसद तथा सरकार के समक्ष सफलतापूर्वक रखा तथा उनकी रक्षा की। उन्होंने सरकार द्वारा, जिसका वह भी एक हिस्सा थे, शुरू किये गए अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के कारण किसानों को दी जाने वाली राज-सहायता में कटौती करने के राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय, दोनों प्रकार के दबावों का कड़ा प्रतिरोध किया। उनका दृढ़ विश्वास था कि देश के किसानों की कीमत पर उद्योगों को प्रोत्साहन नहीं देना चाहिए। कृषि मंत्री के रूप में अनेक शिष्टमण्डलों का अन्य देशों में नेतृत्व करने के अलावा उन्होंने मात्स्यिकी तथा कृषि से संबंधित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।


कांग्रेस तथा राष्ट्रीय राजनीति में एक वरिष्ठ नेता तथा प्रतिष्ठित सांसद होने के अलावा जाखड़ मध्य प्रदेश के राज्यपाल (30 जून 2004 से 29 जून 2009) भी राज्यपाल भी रहे और साथ ही साथभारत कृषक समाज के अध्यक्ष तथा जलियावाला बाग स्मारक न्यास की प्रबंध समिति के अध्यक्ष भी रहे हैं।


यहाँ यह उल्लेखनीय है कि उनका व्यस्त सार्वजनिक जीवन उनके लेखन जैसे विद्वतापूर्ण कार्यों में कभी बाधा नहीं बना और उन्होंने समकालीन भारतीय राजनीति पर "पीपुल, पार्लियामेंट एण्ड एडमिनिस्ट्रेशन " नामक प्रामाणिक पुस्तक लिखी है।


पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और कांग्रेस नेता बलराम जाखड़ का निधन 93 वर्ष की आयु में 3 फ़रवरी, 2016 में हुआ। वे काफ़ी लंबे समय से ब्रेन स्ट्रोक की बीमारी से जूझ रहे थे।


Balram Jakhar (23 August 1923 – 3 February 2016) was an Indian politician, a parliamentarian and Governor of Madhya Pradesh.Jakhar was born in Panchkosi village of Fazilka district in Punjab now in Abohar on 23 August 1923. His father was Chaudhari Rajaram Jakhar and his mother Patodevi Jakhar. His elder son, Sajjan Kumar Jakhar, is a former Punjab minister and his youngest, Sunil Jakhar is three time MLA from Abohar and became Leader of the Opposition in Punjab in March 2012 and Member of Parliament from Gurdaspur and became PPCC President in 2017.


Jakhar earned a degree in Sanskrit from Forman Christian College, Lahore, in 1945. He had knowledge of English, Punjabi, Urdu, Sanskrit and Hindi languages.Jakhar was elected to the Punjab Legislative Assembly in 1972 and was re-elected in 1977 becoming the Leader of the Opposition.


He was elected to the seventh Lok Sabha from Ferozepur in 1980 and re-elected to the eighth Lok Sabha from Sikar in 1984. He served twice as Speaker of Lok Sabha from 1980 to 1989, a rare achievement in indian parliament history. As Speaker of Lok Sabha he was an instrument for automation and computerization of Parliamentary works. He promoted Parliament library, reference, research, documentation and information services for the knowledge and use of members of Parliament. The establishment of Parliament Museum was his contribution. He was first Asian to be elected as Chairman of Commonwealth Parliamentarian Executive Forum.


He became the Central Agriculture minister in 1991 in INC govt headed by P. V. Narasimha Rao.He was Governor of Madhya Pradesh state from 30 June 2004 to 30 May 2009.Jakhar was the life president of Bharat Krishak Samaj and president of Jallianwala Bagh Memorial Trust Management Committee. He has written a book, People, Parliament and Administration. He tried to introduce scientific techniques in agriculture to increase production. The president of India awarded him 'Udyan Pandit' in 1975 for his contribution to Horticulture. Haryana Agricultural University Hisar and Gurukul Kangri Visvavidyalaya Haridwar have awarded him Doctor of Science and ‘'Vidya Martand'’ honorary degrees for his contribution to the Agriculture and Horticulture.


Sports, farming and reading were his hobbies.