जॉन अब्राहम- (जन्म :11 अगस्त, 1937)

August 11, 2017

जॉन अब्राहम (जन्म- 11 अगस्त, 1937; मृत्यु- 31 मई, 1987) लघु कथा लेखक, मलयाली भारतीय फ़िल्म निर्माता-निर्देशक और पटकथा लेखक थे। फ़िल्मों के अतिरिक्त वे अपनी जीवन शैली के लिए भी जाने जाते थे। जॉन अब्राहम ने तमिल फ़िल्म 'अग्राहरतिल कजुथै' से अपनी छाप छोड़ी।


परिचय-
मलयाली फ़िल्म निर्देशक जॉन अब्राहम का जन्म 11 अगस्त सन 1937 को हुआ था। फ़िल्म इंस्टीट्यूट, पुणे से सिनेमा में प्रशिक्षित हुए जॉन अब्राहम अपने गुरु ऋत्विक घटक की तरह ही अपने जीवन काल में कल्ट बन गए। उनके कल्ट बनने में सबसे महत्वपूर्ण योगदान उनकी अगुवाई में चले 'ओडिसा फ़िल्म आन्दोलन' का था, जिसने ‘अम्मा अरियन’ जैसी विश्वस्तरीय फ़िल्म का निर्माण प्रोडक्शन के एकदम नए मॉडल यानि लोगों से एक-एक रुपये हासिल करके उनका सिनेमा निर्मित करके किया।


सन 
1984 में जॉन ने अपने सिने प्रेमी दोस्तों के साथ 'ओडिसा फ़िल्म समूह' की स्थापना की। इस समूह का मकसद सिनेमा निर्माण और वितरण को नए सिरे से परिभाषित करना था। इस समूह ने सार्थक सिनेमा को लोकप्रिय बनाने के लिए कस्बों से लेकर गाँवों तक विश्व सिनेमा की कालजयी फ़िल्मों की सघन स्क्रीनिंग करते हुए नए जिम्मेदार दर्शक बनाए। कई बार किसी फ़िल्म के मुश्किल हिस्से को समझाने के लिए ओडिसा समूह का एक्टिविस्ट फ़िल्म को रोककर उस अंश को स्थानीय मलयाली भाषा में समझाता।
वर्ष 1986 में जॉन अब्राहम ने अपने समूह के लिए ‘अम्मा अरियन’ का निर्माण शुरू किया था। यह उनका ड्रीम प्रोजक्ट था। इस फ़िल्म के जरिये वे फ़िल्म सोसाइटी आन्दोलन को एक ऐसी पारदर्शी संस्था में बदलना चाहते थे, जो पूरी तरह से अपने दर्शकों के प्रति उत्तरदायी हो। इसी वजह से उन्होंने ‘अम्मा अरियन’ के निर्माण के खर्च के लिए चार्ली चैपलिन की मशहूर फ़िल्म ‘किड’ के प्रदर्शन कर चंदा इक्कठा करना शुरू किया। इसी वजह से इसकी लागत को कम करने का निर्णय लेते हुए सिर्फ वेणु और बीना पॉल जैसे प्रशिक्षित सिने कर्मियों को टीम में शामिल किया। वेणु ने फ़िल्म का छायांकन किया, जबकि बीना ने सम्पादन की जिम्मेदारी सभांली। बाकी सारा काम स्थानीय लोगों की मदद से किया गया। एक-एक रुपये के आम सहयोग से कुछ लाख रुपयों में बनी इस फ़िल्म में इसी कारण अभिनेता अभिनय करने के साथ-साथ शूटिंग की लाइटों को भी एक लोकेशन से दूसरी लोकेशन में ले जाने का काम करते थे।



केरल के नक्सलवादी राजन के मशहूर पुलिस एनकाउंटर को कथानक बनाती यह फ़िल्म राजन के साथियों द्वारा उसकी लाश को लेकर उसकी मां तक पहुचने की कहानी है। इस यात्रा में एक शहर से दूसरे शहर होते हुए जैसे-जैसे राजन के दोस्तों का कारवाँ बढ़ता है, वैसे-वैसे उन शहरों की कहानी भी सुनते जाते हैं। एक अद्भुत नाटकीय अंत में इस फ़िल्म की स्क्रीनिंग को फ़िल्म के भीतर एक दूसरी स्क्रीनिंग का हिस्सा बनता हुआ देखते हैं। यह नाटकीय अंत जॉन अब्राहम ने शायद अपने फ़िल्म आन्दोलन प्रेम के कारण ही बुना था। आज ओडिसा आन्दोलन उस तीव्रता से मौजूद नहीं है, लेकिन तमाम नए सिने आंदोलनकारियों के लिए ‘अम्मा अरियन’, ओडिसा फ़िल्म प्रयोग और जॉन अब्राहम आज भी आदर्श बने हुए हैं।


John Abraham (11 August 1937 – 31 May 1987) was a Malayali Indian filmmaker, short story writer and screenwriter. Abraham is ranked among the greatest Indian film directors. His film Amma Ariyan (1986) was the only south Indian feature film to make the list of "Top 10 Indian Films" of all time by British Film Institute.[ Agraharathil Kazhuthai was listed among the "100 Greatest Indian Films" of all time by IBN Live's 2013 poll.


John Abraham was born in Chennamkary, Kuttanadu in 1937. He is from the Vazhakkat branch, Chennamkary of the Pattamukkil Family. He completed his intermediate studies in C.M.S, College, at Kottayam staying with his grandfather, who nurtured Abraham's talent in early days. After completing his degree in [history and politics] from Marthoma College, Thiruvalla, he worked as a private college teacher and latter he joined as an office assistant with Life Insurance Corporation of India in Udupi, Karnataka.[citation needed] After that he joined the FTII, Pune and there he met film-makers such as Ritwik Ghatak and Mani Kaul. Abraham graduated out of the FTII with gold medals in screenwriting and film direction. He entered the film industry working as an assistant director to Mani Kaul for the film Uski Roti (1969, Hindi).[citation needed] He has worked for some Hindi projects that was shot in Kerala, but none were released. Abraham's first attempt in direction came in 1967 named Vidyarthikale Ithile Ithile. It was the Tamil film Agraharathil Kazhuthai (1977) that gave Abraham recognition.


On 30 May 1987 Abraham was admitted to the Calicut Medical College hospital following his fall from a house top after a party. He was not identified by the hospital authorities, and allegedly not given due attention and medical care, which caused his condition to deteriorate, leading to his death on 31 May. Following the allegations of medical negligence, a departmental inquiry was conducted into the incident. 26 years after Abraham's death, social activist B. Ekbal who was a surgeon at the Calicut Medical College when Abraham was admitted for treatment, revealed that the director could have been saved if his identity was known to the doctors at the time of admission. He said the doctors at the casualty did not know Abraham and mistook him for a film representative when he said that he was a filmmaker. In a Facebook post, Ekbal said the doctors failed to diagnose internal bleeding suffered by Abraham and to check his blood pressure which could have prevented him from slipping into a shock through a timely surgery.