भगवतीचरण वर्मा मृत्यु- (5 अक्टूबर, 1981)

October 05, 2016

जीवन परिचय

हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार भगवतीचरण वर्मा का जन्म 30 अगस्त, 1903 ई. में उन्नाव ज़िले, उत्तर प्रदेश के शफीपुर गाँव में हुआ था। इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.ए., एल.एल.बी. की परीक्षा उत्तीर्ण की। भगवतीचरण वर्मा जी ने लेखन तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में ही प्रमुख रूप से कार्य किया। इसके बीच-बीच में इनके फ़िल्म तथा आकाशवाणी से भी सम्बद्ध रहे। बाद में यह स्वतंत्र लेखन की वृत्ति अपनाकर लखनऊ में बस गये। इन्हें राज्यसभा की मानद सदस्यता प्राप्त करायी गई।
भगवतीचरण वर्मा जी ने एक बार अपने सम्बन्ध में कहा था-

 मैं मुख्य रूप से उपन्यासकार हूँ, कवि नहीं-आज मेरा उपन्यासकार ही सजग रह गया है, कविता से लगाव छूट गया है।

कोई उनसे सहमत हो या न हो, यह माने या न माने, कि वे मुख्यत: उपन्यासकार हैं और कविता से उनका लगाव छूट गया है। उनके अधिकांश भावक यह स्वीकार करेंगे कि सचमुच ही कविता से वर्माजी का सम्बन्ध विच्छिन्न हो गया है, या हो सकता है। उनकी आत्मा का सहज स्वर कविता का है, उनका व्यक्तित्व शायराना अल्हड़पन, रंगीनी और मस्ती का सुधरा-सँवारा हुआ रूप है। वे किसी 'वाद' विशेष की परिधि में बहुत दिनों तक गिरफ़्तार नहीं रहे। यों एक-एक करके प्राय: प्रत्येक 'वाद' को उन्होंने टटोला है, देखा है, समझने-अपनाने की चेष्टा की है, पर उनकी सहज स्वातन्त्र्यप्रियता, रूमानी बैचेनी, अल्हड़पन और मस्ती, हर बार उन्हें 'वादों' की दीवारें तोड़कर बाहर निकल आने के लिए प्रेरणा देती रही और प्रेरणा के साथ-साथ उसे कार्यान्वित करने की क्षमता और शक्ति भी। यही अल्हड़पन और रूमानी मस्ती इनके कृतित्व में किसी भी विधा के अंतर्गत क्यों न हो जहाँ एक ओर प्राण फूँक देती है, वहीं दूसरी ओर उसके शिल्प पक्ष की ओर से उन्हें कुछ-कुछ लापरवाह भी बना देती है। वे छन्दोबद्ध कविता के हामी हैं, उसी को कविता मानते हैं, पर यह उनकी सहज स्वातन्त्र्यप्रियता के प्रति नियति का हल्का, मीठा सा परिहास ही है।


Bhagwati Charan Verma (30 August 1903 – 5 October 1981), was one of the leading writers in Hindi. He wrote many novels, his best work was Chitralekha (1934), which was made into two successful Hindi films, 1941 and 1964.He was awarded Sahitya Akademi Award for his epic five-part novel, Bhoole Bisre Chitra in 1961and Padma Bhushan in 1971. He was also nominated to Rajya Sabha in 1978.


Verma was born on 30 August 1903 in Safipur, Uttar Pradesh, India, where he received his early education. He also spent some years living with his extended family at the ancestral home in Patkapur.Thereafter he studied in The Sophical School, and went on to do his B.A. L.L.B. from Allahabad University.


After his education he practiced law at Kanpur and later at Hamirpur where he wrote his historic novel Chitralekha in 1934. Its success got him instant fame and started his literary career in which he went to write over 17 novels.He work at Calcutta Film Corporation for a while, followed by editing a weekly magazine, Vichaar. He also did screenwriting in Bombay, and later edited a Hindi daily Navjeevan; and finally he started writing independently in 1957.


He also served as a Hindi advisor at All India Radio, Lucknow and later in 1978, he was nominated to the Upper House of Indian Parliament, Rajya Sabha. He died on 5 October 1981. A park is named after him, in his birthplace, the town of Safipur.



Writings
Bhule Bisre Chitra, Rajkamal Prakashan, Delhi, 1959.
Chitralekha
Yuvraj Choonda
Sabahin Nachawat Ram Gosain
Kahi na Jay ka Kahiye
Rekha
Sabhin Nachavat Ram Gosai
Samarthya Aur Seema
Sampooran Natak
Sidhi Sachchi Baten
Tedhey Medhey Rastey
Woh Phir Nahi Aai
Do Banke
Mathrubhu Barbar Santh Pranam
Diwano ki hasti



He also wrote other numerous short stories which were not published but still was recognised by other writers