गुरु हरराय -मृत्यु: (6 अक्टूबर, 1661 ई.)

October 06, 2016

गुरु हरराय (अंग्रेज़ी: Guru Har Rai, जन्म: 16 जनवरी, 1630 ई. - मृत्यु: 6 अक्टूबर, 1661 ई.) सिक्खों के सातवें गुरु थे। गुरु हरराय अपने पितामह, महान योद्धा गुरु हरगोविंद सिंह के विपरीत थे, गुरु हरराय शांति के समर्थक थे, जो मुग़ल उत्पीड़न का विरोध करने के लिए उपयुक्त नहीं था।


जीवन परिचय
गुरु हरराय का जन्म सन् 16 जनवरी, 1630 ई. में पंजाब में हुआ था। गुरु हरराय जी एक महान आध्यात्मिक व राष्ट्रवादी महापुरुष थे। गुरु हरराय सिखों के छठे गुरु के पुत्र बाबा गुरदिता जी के छोटे बेटे थे। जिनका जन्म बाबा गुरुदिता जी के घर माता निहाल कौर की कोख से हुआ था।गुरु हरगोविन्द साहिब जी ने ज्योति जोत समाने से पहले, अपने पोते हरराय जी को 14 वर्ष की छोटी आयु में 3 मार्च 1644 को “सप्तम नानक” के रूप में स्थापित किया।गुरु हरराय साहिब जी का विवाह अनूप शहर, उत्तर प्रदेश के श्री दया राम जी की पुत्री किशन कौर जी के साथ सम्वत् 1697 में हुआ था। गुरु हरराय साहिब जी के दो पुत्र रामराय जी, हरकिशन साहिब जी (गुरु) थे। गुरु हरराय साहिब जी का शांत व्यक्तित्व लोगों को प्रभावित करता था। गुरु हरराय साहिब जी ने अपने दादा गुरु हरगोविन्द साहिब जी के सिख योद्धाओं के दल को पुनर्गठित किया था।गुरु हरराय एक आध्यात्मिक पुरुष होने के साथ-साथ एक राजनीतिज्ञ भी थे।

गुरु हरराय ने अपना अधिकांश समय प्रशासनिक व युद्ध संबधी ज़िम्मेदारियों के बजाय आध्यात्मिक कार्यों में लगाया और उन्हें राजनीतिक शक्ति पर नियन्त्रण के बारे में कम जानकारी थी। इससे सिक्खों की धर्मप्रचारक गतिविधियों में कमी आई और गुरु हरराय के सिक्ख जीवन की मुख्यधारा से लगातार कटे रहने के कारण गुरु से उत्साह पाने की आशा रखने वाला समुदाय कमज़ोर हो गया। अत: गुरु हरराय के ख़िलाफ़ गंभीर अंदरूनी विरोध पैदा होने लगा।



राजनीतिक भूल
मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब के भाई दारा शिकोह की विद्रोह में मदद करके गुरु हरराय ने पहली बड़ी राजनीतिक ग़लती की थी। दारा शिकोह संस्कृत भाषा के विद्वान थे। दारा शिकोह को भारतीय जीवन दर्शन प्रभावित करने लगा था। हरराय का कहना था कि उन्होंने एक सच्चा सिक्ख होने के नाते सिर्फ़ एक ज़रूरतमंद व्यक्ति की मदद की है। जब औरंगज़ेब ने इस मामले पर सफ़ाई देने के लिए हरराय को बुलाया, तो हरराय ने अपने पुत्र राम राय को प्रतिनिधि बनाकर भेज दिया।


Guru Har Rai (16 January 1630 – 6 October 1661) revered as the seventh Nanak, was the seventh of ten Gurus of the Sikh religion. He became the Sikh leader at age 14, on 8 March 1644, after the death of his grandfather and sixth Sikh leader Guru Hargobind. He guided the Sikhs for about seventeen years, till his death at age 31.


Guru Har Rai is notable for maintaining the large army of Sikh soldiers that the sixth Sikh Guru had amassed, yet avoiding military conflict. He supported the moderate Sufi influenced Dara Shikoh instead of conservative Sunni influenced Aurangzeb as the two brothers entered into a war of succession to the Mughal Empire throne.


After Aurangzeb won the succession war in 1658, he summoned Guru Har Rai in 1660 to explain his support for the executed Dara Shikoh. Har Rai sent his elder son Ram Rai to represent him. Aurangzeb kept Ram Rai as hostage, questioned Ram Rai about a verse in the Adi Granth – the holy text of Sikhs at that time. Aurangzeb claimed that it disparaged the Muslims. Ram Rai changed the verse to appease Aurangzeb instead of standing by the Sikh scripture, an act for which Guru Har Rai is remembered for excommunicating his elder son, and nominating his younger son Har Krishan to succeed him. Har Krishan became the eighth Guru at age 5 after Guru Har Rai's death in 1661. Some Sikh literature spell his name as Hari Rai.